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नगर तथा ग्राम निवेश में फर्जीवाड़ा

• कॉलोनी बनाने के लिए शासकीय जमीन से रास्ता दिए जाने का मामला

दो तहसीलदारों ने तीन बिल्डरों को कॉलोनी के लिए जो रास्ता दिया था, उस आदेश को प्रशासन ने निरस्त करते हुए इनके कॉलोनी डेवलपमेंट लाइसेंस को निरस्त करने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के जेडी को पत्र लिखा है। साथ ही उन्हें जांच रिपोर्ट भी भेजी गई है।

एसडीएम की जांच में खुलासा हुआ कि नायब तहसीलदार शेष नारायण जायसवाल ने गायत्री कंस्ट्रक्शन को सरकारी जमीन में से 160 फीट लंबा और 32 फीट चौड़ा यानी 5120 वर्गफीट जमीन आम रास्ते के तौर पर दिया। इसके लिए उन्होंने एनओसी दी। वहीं अतिरिक्त तहसीलदार शशिभूषण सोनी ने श्रीराम सरिता बिल्डर्स एंड कॉलोनाइजर आशीष गुप्ता के बहतराई स्थित जमीन के मामले में अलग से आदेश जारी करने से मना करते हुए केस खारिज कर फायदा पहुंचाया।

कॉलोनाइजर को सरकारी जमीन से उसकी जमीन में जाने 40 फीट चौड़ा रास्ता मिला। राज कंस्ट्रक्शन को भी 30 फीट चौड़ी शासकीय जमीन रास्ते के लिए सोनी ने दी। बिलासपुर एसडीएम पीयूष तिवारी ने टीएंडसीपी के जेडी को पत्र लिखकर बताया कि इन तहसीलदारों द्वारा शासकीय भूमि संबंधी आदेशों को अतिरिक्त तहसीलदार ने निरस्त किया है। ऐसे में बिल्डरों को उनके विभाग द्वारा कॉलोनी निर्माण के लिए जारी डेवलपमेंट लाइसेंस का कोई औचित्य नहीं रह जाता। इसलिए बिल्डरों को दिए गए लाइसेंस को निरस्त करने के संबंध में प्रतिवेदन भेजा जा रहा है।

जिन पर आरोप, उसे ही जिम्मेदारी

टीएंडसीपी के जेडी के खिलाफ भी शिकायत हुई थी और जांच में यह पता चला कि उन्होंने भी अपने पद का दुरुपयोग किया है। दरअसल तत्कालीन जेडी ने 13 मार्च 2023 और 10 जनवरी 2024 को आवासीय भूखंड के विकास के लिए अनुज्ञा जारी किया था। इस तरह विकास अनुज्ञा जारी नहीं किया जा सकता था। गंभीर बात ये है कि जांच रिपोर्ट में उन पर पद के दुरुपयोग का आरोप लगने के बावजूद इनके खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा नहीं की गई है। अब उन्हें ही लाइसेंस निरस्त करने पत्र लिखा गया है।

कमिश्नर के पास फाइल, कौन बचा रहा

बेलगहना में पदस्थ अतिरिक्त तहसीलदार शशिभूषण सोनी व मरवाही तहसीलदार शेष नारायण जायसवाल ने बिलासपुर में पोस्टिंग के दौरान कॉलोनाइजरों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी जमीन दी, लेकिन अब तक उन्हें सस्पेंड नहीं किया गया है। इनके खिलाफ शिकायत की जांच में सात माह लगे।

हालत ये है कि विभागीय जांच शुरू नहीं हुई। कलेक्टर अवनीश शरण ने 20 सितंबर को इन्हें सस्पेंड करने के लिए संभागीय कमिश्नर महादेव कावरे को पत्र लिखा था, लेकिन उन्होंने कोई कदम नहीं उठाया है। अब सवाल यह उठता है कि इन अधिकारियों को आखिर कौन और क्यों बचा रहा है।

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