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परिवहन अधिकारियों ने किया फर्जी रजिस्ट्रेशन कैग का रिपोर्ट

देशभर में लाखों गाड़ियां फर्जी नंबरों पर चल रही हैं। इनमें ज्यादतर ट्रक हैं। छत्तीसगढ़ में दौड़ रहीं सैंकड़ों बड़ी गाड़ियां पूर्व में फेक में रजिस्टर्ड हुईं, फिर उन गाड़ियों का छत्तीसगढ़ में ट्रांसफर हो गया। भास्कर की टीम ने इसकी पड़ताल के लिए नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश और बंगाल तक पहुंची। रायपुर से टीम ने 1883 किलोमीटर की दूरी तय की और नगालैंड के दिमापुर पहुंची। दिमापुर से 190 किमी दूर दुर्गम पहाड़ियों पर है फेक जिला। यहां जाने के लिए दिनभर में राज्य परिवहन की सिर्फ एक ही बस चलती है, वो भी सुबह 6 बजे। यह बस खराब थी। अगले दिन एक मात्र बोलेरो जाने वाली थी। एडवांस बुकिंग करवाकर टीम दुर्गम पहाड़ी रास्ते से होते हुए 7 घंटे में फेक पहुंची। इस रास्ते हमें एक भी 6 चक्का या उससे बड़ी गाड़ी नहीं दिखी, न ही पूरे फेक जिले में। फेक में कोई बड़ी इंडस्ट्री भी नहीं, जहां बड़ी गाड़ियां लगे। यहां सामान या माल ढोने के लिए पिकअप और मालवाहक का उपयोग किया जाता है। इन पहाड़ी रास्तों में ट्रक-ट्रेलर चल ही नहीं सकते, फिर भी वहां 20 हजार से ज्यादा बड़ी गाड़ियां रजिस्टर्ड हैं। इसमें ट्रक और ट्रेलर की संख्या ज्यादा...

ब्रजेश शर्मा: मजदूर शोषण के खिलाफ सख्ती से आवाज उठाएगी भारतीय जनता मजदूर ट्रेड यूनियन काउंसिल

भारतीय जनता मजदूर ट्रेड यूनियन काउंसिल (BJMTUC) ने देशभर में मजदूरों के शोषण के खिलाफ सशक्त अभियान चलाने का ऐलान किया है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ब्रजेश शर्मा के नेतृत्व में यूनियन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी श्रमिक के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नवनियुक्त राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी दीपक पाण्डेय ने नियुक्ति के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि BJMTUC एक राष्ट्रीय स्तर का श्रमिक संगठन है, जो संगठित और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के अधिकारों, उचित वेतन और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि संगठन का मुख्य उद्देश्य मजदूरों और युवाओं को एकजुट कर उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराना और उनके सामाजिक-आर्थिक उत्थान को गति देना है। संयुक्त प्रेस नोट में राष्ट्रीय अध्यक्ष ब्रजेश शर्मा और मीडिया प्रभारी ने बताया कि कार्यस्थल पर मजदूरों का शोषण कई रूपों में सामने आता है, जैसे वेतन भुगतान में देरी, निर्धारित लाभों को रोकना, मुआवजा देने से इंकार करना या उपस्थिति के आधार पर अनुचित दबाव बनाना। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार का उत्पीड़न शोषण का गंभीर रूप ह...

घोटालेबाज शिक्षा अधिकारियों को उच्चअधिकारियों का संरक्षण

रायपुर }डीबी स्टार। सरकारी स्कूलों में शिक्षा गुणवत्ता बढ़ाने और योजनाओं के संचालन के लिए जिन जिला शिक्षा अधिकारियों की नियुक्ति की गई है इनके खिलाफ ही सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार की शिकायतें हैं। 5 साल में 33 जिला शिक्षा अधिकारी के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) में केस दर्ज हुए हैं। इसमें गबन, भ्रष्टाचार, घूसखोरी और अनियमितता की शिकायतें शामिल हैं। जांच में 12 डीईओ दोषी भी मिले हैं। लेकिन इन पर कार्रवाई नहीं हुई है। शेष 21 की जांच व कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। सभी केस मिलाकर कुल 10-12 करोड़ रुपए की अनियमितता बताई गई है। शासन से संचालित सरकारी योजना व पदोन्नति, ट्रांसफर में भ्रष्टाचार हुआ है। कईयों के विरुद्ध केस दर्ज होने के बावजूद ये अब भी जिला शिक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। पड़ताल में पता चला कि व्याख्याता व प्राचार्यों को डीईओ बनाकर जिलों में जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसे लेकर हाईकोर्ट पहले भी आपत्ति जता चुका है कि जूनियर को बीईओ-डीईओ नहीं बनाया जाना है। 33 में से 80 फीसदी डीईओ प्रभारी के तौर पर काम कर रहे हैं। जिनके खिलाफ केस दर्ज हुआ है। 90 फीसदी ...

जल जीवन मिशन का फर्जीवाड़ा फर्जी भूजल रिपोर्ट के कारण हजारों बोरों में पानी नहीं निकला

जल जीवन मिशन में 19313 नलकूप खनन होने हैं। इसके लिए 243.84 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। एक बोर पर सरकार 1.25 से 1.50 लाख रुपए देती है। अब तक 13651 बोर किए जा चुके हैं। इसमें से 3755 बोर सूखे निकल गए हैं। इस तरह करीब 56 करोड़ रुपए बिना पानी मिले ही सरकार के खर्च हो गए। जब इन सूखे बोर के नीचे का खेल समझने के लिए परत दर परत 15 दिन तक इन्वेस्टैिशन किया गया तो एक बड़ा सच सामने आया। हर खनन के पहले हाइड्रोलॉजिस्ट से जांच करवानी होती है। यह देखना होता है कि पानी है या नहीं। रेसिस्टिविटी सर्वे में अगर पानी की संभावना मिले तब भी खनन शुरू करना होता है। विभाग ने भी नियम बना रखा है कि जब 90 से 120 मीटर की रेसिस्टिविटी सर्वे रिपोर्ट मिले तभी बिल पास होगा। लेकिन यह रिपोर्ट घर बैठे महज 1500 रुपए तैयार होकर मिल जा रही है। इस वजह से 50 मीटर पर पानी न मिलने वाले बोर भी 120 मीटर की खुदाई दिखाकर विभाग से पैसे वसूल ले रहे हैं। यह तब सामने आया जब दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने एक ठेकेदार बनकर तीन हाईड्रोलॉजिस्ट से बात की और एक फर्जी सर्वे रिपोर्ट तैयार करवाई। रिपोर्ट भी बिना मौके पर गए ही बनकर मिल गई। यही न...

भ्रष्टाचार वाले 50 अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों से तत्काल हटाना आवश्यक है

छत्तीसगढ़ के रायपुर प्रदेश में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के घेरे में आए करीब 50 वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ जांच प्रस्ताव लंबित पड़े हैं। इनमें आईएएस, आईपीएस और आईएफएस स्तर के अफसर शामिल हैं। (EOW) और (ACB) ने कई मामलों में राज्य सरकार से अभियोजन स्वीकृति मांगी है, लेकिन नौ अधिकारियों के खिलाफ अब तक अनुमति नहीं मिल पाई है। इससे जांच एजेंसियों की कार्रवाई ठप पड़ी है। CG Corruption Case: नौ अफसरों पर कार्रवाई की अनुमति का इंतजार ईओडब्ल्यू-एसीबी ने जिन मामलों में जांच की सिफारिश की है, वे महीनों से लंबित हैं। • आईएएस इफ्फत आरा: पाठ्यपुस्तक निगम में कागज खरीदी और परिवहन निविदा में अनियमितता (लंबित: 13 अप्रैल 2024 से) • आईएएस संजय अलंग: समाज कल्याण विभाग में निराश्रित राशि वितरण में गड़बड़ी (लंबित: 29 जनवरी 2025 से) • आईएएस सुधाकर खलखो: माटीकला बोर्ड में शासकीय धन के दुरुपयोग के आरोप • इसी तरह आईएफएस अधिकारियों—अनूप भल्ला, रमेश चंद्र दुग्गा, केके खेलवार, लक्ष्मण सिंह, चूड़ामणि और एसपी मशीह—के खिलाफ भी भ्रष्टाचार व गबन से जुड़े मामलों में अनुमति का इंतजार है। कोयला और शराब घोटाले की आंच प्रदे...

फुंडा स्कूल के बच्चे पढ़ाई में नंबर वन है

शासकीय प्राथमिक शाला कुंडा में मात्र दो शिक्षकों की पदस्थापना के बावजूद छात्र-छात्राओं का शैक्षणिक स्तर अत्यंत सराहनीय पाया गया। निरीक्षण के दौरान सभी बच्चे अपनी कक्षा के स्तर के अनुरूप दक्ष दिखाई दिए। लगभग सभी विद्यार्थियों ने अंग्रेजी का धारा-प्रवाह वाचन किया तथा बीस तक के पहाड़े सभी बच्चों को पूर्णतः कंठस्थ थे। विद्यार्थियों की उपस्थिति भी 50 प्रतिशत से अधिक पाई गई, जो बच्चों की सीखने में रुचि और शिक्षकों के निरंतर प्रयासों को दर्शाती है। डीईओ ने इन उत्कृष्ट परिणामों के लिए संस्था की दोनों शिक्षिकाएं देवकुमारी वर्मा एवं संगीता बोरकर की प्रशंसा की। इससे बाकि के स्कूलों को सीख लेनी चाहिए।

पाटन के एक स्कूल में शिक्षक पढ़ाने के बजाय गप्पे मारते मिले

जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा के औचक निरीक्षण ने पाटन ब्लॉक के स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी। कई शिक्षक बिना अवकाश आवेदन के अनुपस्थित मिले। कक्षाओं के समय कुछ शिक्षक स्टाफ रूम में बैठे दिखे। विद्यार्थियों की उपस्थिति बेहद कम रही। कुछ कक्षाओं में तो एक भी छात्र मौजूद नहीं था। प्राथमिक से लेकर उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों तक यही हाल रहा। ग्रामीणों ने भी शिक्षकों की लापरवाही की शिकायतें की मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित कर्मचारियों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है।  डीईओ के निरीक्षण के दौरान स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय कन्या पाटन में कई अनियमितताएं सामने आई। यहां कल्पना वर्मा और पूजा अग्रवाल बिना अवकाश आवेदन के अनुपस्थित पाई गई। ऑनलाइन अवकाश पोर्टल में भी उनका कोई आवेदन दर्ज नहीं था। इसी विद्यालय में सहायक ग्रेड-3 आरती यादव, फरवरी की शुरुआत से लेकर निरीक्षण तिथि तक उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर नहीं कर रही थीं। कक्षा 11वीं में अर्थशास्त्र के कालखंड के दौरान व्याख्याता त्रिवेणी साहू कक्षा में पढ़ाने के बजाय स्टाफ रूम में बैठी हुई थी। अधिकांश शिक्षक कक्ष...

बिना आंख वाले शिक्षक पढ़ाने में है नंबर वन

सरकारी स्कूलों में घटते एडमिशन के बीच रतनपुर के एक प्राथमिक स्कूल ने सकारात्मक मिसाल पेश की है। गांधी नगर स्थित स्कूल में इस साल 17 प्रतिशत ज्यादा बच्चों ने दाखिला लिया है। इसके पीछे स्कूल के प्रधानपाठक मुकुटमणि तिवारी का पूर्ण समर्पण है, जो पिछले 13 वर्षों से दृष्टिबाधित होने के बावजूद नियमित रूप से स्कूल पहुंचकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं। उनके पढ़ाने का तरीका ऐसा है कि स्कूल में कक्षा-2 में पढ़ने वाले बच्चे 25 तक का पहाड़ा एक सांस में बता देते हैं। प्रधानपाठक तिवारी अब सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए मिसाल बन चुके हैं। उन्हें इस साल उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान से भी नवाजा गया है। शिक्षक मुकुटमणि तिवारी ने बताया कि 2011 तक वे बिल्कुल स्वस्थ थे। इसी बीच उन्हें आंखों में समस्या महसूस हुई और कुछ दिनों के भीतर ही आंखों की करीब 80-90 प्रतिशत रोशनी चली गई। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने बताया कि उनकी आंखें अब ठीक नहीं हो सकती। आंखों से देख नहीं पाने के कारण शुरुआत में उन्हें स्कूल जाने व पढ़ाने में समस्या हुई, लेकिन उन्होंने पढ़ाना नहीं छोड़ा। उन्होंने बताया कि वे बालवाड़ी के साथ पहली व द...