छत्तीसगढ़ रियल इस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी (सीजी रेरा) बनने से बिल्डरों की मनमर्जी पर लगाम कसा है, लेकिन कई बिल्डर अब भी लोगों के खून पसीने की कमाई डकार रहे है। न्याय की जटिल प्रक्रिया में उन्हें उलझाकर रख रहे हैं। हालत यह है कि बिल्डर रेरा का आदेश नहीं मान रहे हैं, तो दूसरी ओर जिला प्रशासन के कर्मचारी कलेक्टर का आदेश नहीं मान रहे हैं। इससे कई परिवार अपने हक के लिए भटक रहे हैं। किसी को 6 साल से, तो किसी को 8 साल में बिल्डरों ने फ्लैट-मकान नहीं दिए हैं। कई मामलों में न्यायालय ने जिला प्रशासन को बिल्डर से फ्लैट-मकान दिलाने का आदेश दिया है, लेकिन जिला प्रशासन आगे कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
उपस्थित नहीं हुए अधिकारी
प्रशासनिक अनदेखी से हताश प्रार्थिया ने फिर रेरा अपीलेट ट्रिब्यूनल में शिकायत की। इस पर ट्रिब्यूनल ने लगातार चार बार जिला प्रशासन को कोर्ट की अवमानना के लिए नोटिस जारी किया। इससे कोई फर्क नहीं पड़ा। ट्रिब्यूनल ने फिर 21 अगस्त 2024 को किसी जिम्मेदार अधिकारी को भेजने कहा था। लेकिन इस बार भी कोई उपस्थित नहीं हुआ।
कब मिलेगा न्याय
कमल विहार के पास आरएस ड्रीमलैंड के प्रोजेक्ट ई-2 में बिल्डर खुशीराम कुंदनानी से निशी पालीवाल ने वर्ष 2014 में फ्लैट (बी- 301) खरीदा था। ट्राई पार्टी एग्रीमेंट पर बैंक फाइनेंस कराकर बिल्डर को 90 फीसदी राशि भुगतान कर दिया, लेकिन बिल्डर ने तय सीमा पर फ्लैट नहीं दिया। दो साल बाद निशी ने रेरा में शिकायत की। रेरा ने 12 अप्रैल 2019 को बिल्डर के खिलाफ फैसला देते हुए एक माह में निशी के नाम पर फ्लैट की रजिस्ट्री और जुर्माने की राशि देने कहा। बिल्डर ने इसे नहीं माना।
प्रार्थिया ने हाईकोर्ट में अपील की। वहाँ से प्रार्थिया ने 16 मई 2023 को रेरा अपीलेट ट्रिब्यूनल में आवेदन किया। ट्रिब्यूनल ने 2 अप्रैल 2024 को प्रार्थिया को फ्लैट की तत्काल रजिस्ट्री कराने और 12 लाख 83 हजार भुगतान करने का आदेश बिल्डर को दिया। यह आदेश कलेक्टर रायपुर के नाम से जारी हुआ था। कलेक्टर ने 15 मई 2024 को तहसीलदार को आदेश लागू करने कहा। इसके बाद अतिरिक्त तहसीलदार ने मामले को हाशिए में डाल दिया। आदेश का पालन नहीं किया गया। इससे परेशान प्रार्थिया ने 25 जुलाई 2024 को कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत की। लेकिन अब तक तहसील से कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उल्लेखनीय है कि खुशीराम के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले दर्ज है।
अपराध दर्ज कराने का आदेश
21 अगस्त को जिला प्रशासन की ओर से कोई उपिस्थत नहीं हुआ, तो ट्रिब्यूनल ने सख्त आदेश दिया है और कहा कि जिला प्रशासन से नोटिस का उत्तर नहीं मिला है और न ही उनकी ओर से कोई उपस्थित हुआ है। रजिस्ट्रार को निर्देशित किया जाता है कि वे भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के तहत दंडनीय अपराध के लिए मुख्य मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रायपुर के समक्ष शिकायत दर्ज कराएं। रजिस्ट्रार को उपरोक्त उद्देश्य के लिए सक्षम अधिवक्ता नियुक्त करने की अनुमति प्रदान की जाती है।
निशी जैसे कई लोग चक्कर काट रहे
निशी की तरह किरण सबलानी भी 6 साल से फ्लैट के लिए भटक रही है। इसके अलावा कई लोग प्रशासनिक तंत्र और बिल्डरों की मिलीभगत के शिकार हो रहे हैं। रेरा ने अब तक 2700 मामलों में से 1952 प्रकरणों पर आदेश किया है। निशी की तरह के प्रकरण वाले 50 से ज्यादा मामले लंबित पड़े हैं, जिन पर न्याय नहीं मिल पा रहा है।
इस प्रकरण की फाइल मंगाई जाएगी। कोर्ट का मामला है। इसमें कोर्ट में जवाब दिया जाएगा।
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