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निगम के सड़क निर्माण में घोटाला

नई सड़कों से उखड़ने लगी गिट्टी, ठेकेदारों का भुगतान रोकाः अंबिकापुर निगम में घटिया क्वालिटी की बनी सड़कें, PWD प्रभारी की जांच में खुलासा
हाथों से उखड़ रही नई सड़क की गिट्टी

अंबिकापुर नगर निगम क्षेत्र में 9.5 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित 74 सड़कों में से आधा दर्जन से अधिक सड़कों से गिट्टी निकाली जा रही है। निगम के PWD प्रभारी शफी अहमद ने लोगों से मिली शिकायत के बाद सड़कों की जांच की। शफी अहमद ने ठेकेदारों का भुगतान रोकने और नए सिरे से सड़क बनवाने के निर्देश दिए हैं।

अंबिकापुर नगर निगम क्षेत्र की अंदरूनी सड़कों के डामरीकरण के लिए राज्य शासन ने राशि स्वीकृत की थी। शहर के 74 सड़कों का डामरीकरण 9.5 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। इनमें से कुछ सड़कों में निर्माण के बाद गिट्टी उखड़ने की शिकायत मिली तो नगर निगम के पीडब्लूडी प्रभारी शफी अहमद अधिकारियों के साथ सड़कों के निरीक्षण में पहुंचे।
अधिकारियों के साथ निरीक्षण में सामने आई खामी।

आधा दर्जन से अधिक सड़कें गुणवत्ता विहीन

निरीक्षण के दौरान देवीगंज वार्ड में चित्र मंदिर के पीछे, नमनाकला में शनि मंदिर के पास, कुंडला सिटी कालोनी पहुंच मार्ग, गणेश दादा गली में प्रदीप आटा चक्की के पास, होली क्रॉस के पीछे, अयान मार्ग और नेपाल लॉज के पास सड़क निर्माण में गुणवत्ता की कमी साफ नजर आई।

नगर निगम के प्रभारी ईई संतोष रवि, एसडीओ दुष्यंत बजाज औरतकनीकी अमले के साथ सड़क की गुणवत्ता देखी। सड़कों से डामर मिक्स हाथ से उखड़ जा रहा है। इनमें गिट्टी भी गाड़ियां चलने से उखड़ रही हैं।
सड़कों को उखाड़ कर बनाने के दिए निर्देश।


दो निर्माण एजेंसियों से जांच कराने के निर्देश

शफी अहमद ने कार्य का भुगतान ठेकेदारों को नहीं करने के निर्देश दिए। उन्होंने सड़कों की जांच दो निर्माण एजेंसियों से कराने के निर्देश दिए। अमानक सड़कों का पुनर्निर्माण कराने के भी निर्देश दिए। शफी अहमद ने कहा कि सड़कें खराब बनी हैं। शासन के पैसों की बर्बादी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

निर्माण के दौरान लापरवाही

कांग्रेस शासनकाल में सड़कों के निर्माण के लिए राशि जारी की गई थी। विधानसभा चुनाव में खराब सड़कें भी चुनावी मुद्दा रहीं। लंबे इंतजार के बाद सड़कों का डामरीकरण किया गया, इसमें भी निगम के अधिकारियों की लापरवाही दिखी।

सड़कें उखड़ रही हैं, इससे आशंका है कि हॉट मिक्स का टेंपरेचर कम था। निगम के निर्माण विभाग के अधिकारियों ने काम ठेकेदारों के जिम्मे छोड़ दिया था, जिससे यह स्थिति बनीं है।

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