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डॉक्टर गायब थे जिसके कारण सांप के काटने से एक मौत

उतई के 30 बिस्तर सरकारी अस्पताल में डॉक्टर नहीं होने से सर्प-दंश पीड़िता 14 साल की बच्ची को प्राथमिक उपचार तक नहीं मिला। सर्प दंश की चपेट में आने के एक घंटे के भीतर जिले के दो बड़े सरकारी अस्पतालों का चक्कर काटने के बाद भी उसकी मौत हो गई। फिर भी सरकारी सिस्टम ने मौत का कारण जानने गुरुवार को हुई सरकारी समीक्षा में खुद को क्लीन चीट दे दिया। सीएमएचओ डॉ. जेपी मेश्राम ने सरकारी प्रेस नोट जारी कर बताया कि बच्ची अत्यंत गंभीर स्थिति में मंगलवार शाम 7.20 बजे जिला अस्पताल में भर्ती हुई थी।

मेडिसिन विशेषज्ञ (नाम गायब) ने तत्काल जांच कर जीवन रक्षक दवाइयां व सर्पदंश का इंजेक्शन देकर ऑक्सीजन सपोर्ट में रख दिया। उसकी गंभीर स्थिति के बारे में बताया तो परिजन बच्ची को अन्यत्र लेकर चले गए। परोक्ष तौर पर उन्होंने कहा कि परिजनों के अन्यत्र जाने के कारण मौत हो गई। लेकिन उतई के अस्पताल में दोपहर 2 से रात 8 बजे तक एक भी डॉक्टर मौजूद क्यों नहीं था? सरकारी जानकारी में इस बाबत एक शब्द नहीं लिखा। डॉक्टरों की लंबी फौज के बाद भी बच्ची को इलाज नहीं मिला।

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