छ.ग. में 3 साल के अन्दर लगभग 5 पांच सौ मेडिकल स्टोरों को छ.ग. के औषधि निरीक्षकों ने फार्मासिस्टों की अनुपस्थिति में दवा बेचते हुये पकड़ा है। फार्मासिस्टों की अनुपस्थिति में दवा बेचने वालों के खिलाफ फार्मेसी एक्ट 1984 की धारा 42 के तहत् न्यायालय से सजा दिलवाना चाहिये या फिर मेडिकल स्टोरों के लाईसेंस रद्द करना चाहिये। यह दोनों में से एक कार्रवाई आवश्यक रूप से होना चाहिये लेकिन सहायक औषधि नियंत्रका द्वारा नहीं किया जाता है।
चेतावनी देकर या दो-चार दिन के लिये लाईसेंस को निलंबित करके छोड़ दिया जाता है जिसके कारण छ.ग. में हजारों मेडिकल स्टोर वाले फार्मासिस्ट की अनुपस्थिति में ही गलत ढंग से दवाई बेचते हैं।
तीन साल के अन्दर छ.ग. में लगभग 500 मेडिकल स्टोरों को फार्मासिस्टों की अनुपस्थिति में दवा बेचते हुये औषधि निरीक्षकों ने पकड़ा है इन सभी मेडिकल स्टोरों के खिलाफ फार्मेसी एक्ट 1984 की धारा 42 के तहत कार्रवाई होना चाहिये।
फार्मेसी एक्ट 1984 की धारा 42 के तहत छत्तीसगढ़ में एक भी कार्यवाही सहायक औषधि नियंत्रकों ने नहीं किया है जो की बहुत बड़ा लापरवाही एवं मनमानी है।
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