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बिलासपुर वन मंडल में घोटाला बिना बेस कर दी फेंसिंग

फदहाखार में फेंसिंग घोटाला, बिना बेस कर दी फेंसिंग, दीवार ढह गई


वन विभाग बिलासपुर सर्किल के फदहाखार में 52 लाख रुपए का फेंसिंग घोटाला फूटा है। बता दें कि बिलासपुर वन मंडल के बिलासपुर सर्किल स्थित फदहाखार में वन विभाग के जिम्मेदार अफसरों ने खुली जमीन को घेरने की आड़ में अपनी कमाई का जरिया निकाल लिया। घोटाले की जांच होगी तो वन विभाग के कई जिम्मेदार अफसर नपेंगे।

तत्कालीन डीएफओ कुमार निशांत ने जाली तार फेंसिंग के लिए 52 लाख रुपए की स्वीकृति दी थी। विभाग का दावा है कि 7600 मीटर में जाली तार का घेरा और 5 हजार लोहे के एंगल लगाए गए, लेकिन मौके की तस्वीर कुछ और बयां कर रही है। मौका-मुआयना से साफ है कि मौके पर एस्टीमेट के अनुसार एंगल नहीं लगाए गए। इसमें सबसे बड़ी गड़बड़ी दीवार उठाने में की गई थी। जमीन की खुदाई किए बगैर और बेस बनाए बिना ही दीवार खड़ी कर दी गई। अभी हाल में बारिश होने से जमीन में नमी आ गई और दीवार गिर गई। फेंसिंग भी अस्त-व्यस्त हो गया। वन विभाग के अफसरों ने 42 पोल चोरी होने की रिपोर्ट भी लिखाई थी, ताकि गड़बड़ी से बचा जा सके। जिला पंचायत सामान्य सभा की बैठक में भी यह मामला उठ चुका है।

लगातार शिकायत के बाद भी जांच क्यों नहीं ?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस मामले में लगातार शिकायत हो रही थी। इसके बाद भी जांच क्यों नहीं बिठाई गई। जिसके कार्यकाल में यह गड़बड़ी हुई, उस अफसर का तबादला भी हो चुका। उनके बाद दो डीएफओ आ चुके हैं, लेकिन अब तक इस मामले की जांच नहीं की जा सकी है।

जांच कराई जाएगी

पूर्व में एंगल चोरी के मामले में विभाग की ओर से थाने में रिपोर्ट की गई थी। दीवार गिरने की जानकारी नहीं है। दीवार क्यों गिरी, इस मामले की जांच कराई जाएगी। - सत्यदेव शर्मा, डीएफओ, बिलासपुर

एंगल खरीदी में भी गड़बड़ी

मार्केट में 8 फीट लंबी एक लोहे की पोल की कीमत 150 रुपए तक है, जिसका वन विभाग ने 166 रुपए के हिसाब से भुगतान किया है। जानकारों के अनुसार 7600 मीटर में जाली तार का घेरा और 5 हजार लोहे लगवाने और मजदूरी चार्ज को मिलाकर पूरे काम में 30 लाख से ज्यादा खर्चा नहीं आएगा, लेकिन वन विभाग ने ठेकेदार को 52 लाख भुगतान किया है।

बिना बेस की गई फेंसिंग से नुकसान के बाद मौके पर दीवार का पड़ा मलबा।


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