दिन भर स्मार्टफोन में घुसे रहने और सोशल मीडिया की लत के नुकसान के बारे में हमें खूब बताया जाता है। इसके नुकसान जानने के बाद लोग संकल्प भी लेते हैं कि अब से स्मार्टफोन का इस्तेमाल कम किया करेंगे।
लेकिन हालिया स्टडी बताती है कि जरूरत से ज्यादा स्मार्टफोन का इस्तेमाल और सोशल मीडिया की लत सेहत संबंधी कुछ ऐसी परेशानियां खड़ी कर सकती हैं, जो जीवन भर बनी रहेंगी। भले ही कोई फोन या सोशल मीडिया का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद कर दे।
जिंदगी से सभी अहम मोड़ पर नुकसान पहुंचाएगा सोशल मीडिया की लत
स्कूल जाने वाले बच्चे कम उम्र में सोशल मीडिया के आदी हो जाएं तो इससे उनके दिमाग पर परमानेंट नकारात्मक असर पड़ सकता है। मोबाइल की लत पूरी तरह से छोड़ने के बाद भी इस असर को दूर कर पाना संभव नहीं होगा। यह असर ताउम्र उनके साथ बना रहेगा और जिंदगी से सभी अहम मोड़ पर नुकसान पहुंचाएगा।
ये बातें कनाडा में हुई एक हालिया रिसर्च में सामने आई हैं। रिसर्च के मुताबिक कम उम्र में सोशल मीडिया की लत पूरे जीवन पर नकारात्मक असर डाल सकती हैं।
विकास में अवरोध बनता स्मार्टफोन
रिसर्च के मुताबिक बचपन और किशोरावस्था में जब दिमाग आकार ले रहा होता है, वैसे वक्त में स्मार्टफोन का इस्तेमाल और सोशल मीडिया की लत सबसे ज्यादा नुकसानदेह साबित हो सकती है।
ऐसी स्थिति में स्मार्टफोन की वजह से बच्चों का सहज दिमागी विकास नकारात्मक रूप से प्रभावित होता है। ब्रेन सिस्टम और नॉर्मल साइकोलॉजी गड़बड़ाने से ‘रिवॉर्ड पनिशमेंट थॉट’ का क्रम भी उलट जाता है। जिसकी वजह से ‘एडवर्स ब्रेन डेवलपमेंट’ का खतरा बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में बच्चे कम उम्र में ही डिप्रेशन, एंग्जाइटी के शिकार होने लगते हैं।
उनका सहज दिमागी विकास इस तरह प्रभावित होता है कि वे स्मार्टफोन और सोशल मीडिया से होने वाली एंग्जाइटी से बचने के लिए फिर से उसी का इस्तेमाल करने लगते हैं। जिसके चलते एक अंतहीन क्रम बन जाता है और लोग इसमें फंसते चले जाते हैं।
- मानसिक और शारीरिक सेहत गिरती चली जाती है।
स्क्रीन टाइम कंट्रोल करने के बाद भी पहले जैसी स्थिति मुश्किल
रिसर्च के अंजाम देने वाली टीम की मुखिया और साइकोलॉजिस्ट एम्मा जी डुएर्डन के मुताबिक अभी तक इस दिशा में जितनी भी रिसर्च हुईं, वह सोशल मीडिया की लत और ज्यादा स्क्रीन टाइम के तात्कालिक नुकसान के बारे में थी।
लेकिन मौजूदा रिसर्च बताती है कि किशोरों में सोशल मीडिया की लत से उनकी मानसिक और मनोवैज्ञानिक सेहत स्क्रीन टाइम कंट्रोल करने के बाद भी पहले जैसी स्थिति में नहीं आ सकती। यानी इसका नुकसान परमानेंट और हमारी सोच से ज्यादा खतरनाक है।
भारत में स्मार्टफोन का इस्तेमाल वैश्विक औसत से ज्यादा
रिसर्च और एक्सपर्ट बताते हैं कि सोशल मीडिया की लत और ज्यादा वक्त फोन से चिपके रहने की आदत आंख लेकर बाकी शरीर और दिलो-दिमाग के लिए भी नुकसानदेह है। बावजूद इसके दुनिया भर में स्मार्टफोन इस्तेमाल के औसत घंटे बढ़ते ही जा रहे हैं
भारत में स्थिति और भी गंभीर होती जा रही है। DataReportal के हालिया आंकड़े की मानें तो भारत में लोग वैश्विक औसत से लगभग 45 मिनट ज्यादा फोन चलाते हैं।
जापान जैसे तकनीकी रूप से विकसित देश में लोग रोजाना औसतन 1.4 घंटे स्मार्टफोन पर बिताते हैं। लेकिन अपने देश में यह आंकड़ा 4.5 घंटे का है।
सोशल मीडिया से एक सप्ताह का ब्रेक शांति लाएगी
नई रिसर्च में यह बात साबित हुई है कि सोशल मीडिया और स्मार्टफोन की लत से हुए नुकसान की पूरी भरपाई संभव नहीं है। लेकिन कुछ उपायों के सहारे इसके असर को कम जरूर किया जा सकता है।
पिछले साल इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ बाथ के रिसर्चर्स ने एक रिसर्च में बताया कि सोशल मीडिया से एक हफ्ते का ब्रेक लेकर मेंटल हेल्थ में सुधार ला सकता है। यानी, अगर कोई शख्स डिप्रेशन और एंग्जाइटी के लक्षणों से जूझ रहा है तो एक सप्ताह का डिजीटल ब्रेक की मदद से इन लक्षणों को कम किया जा सकता है। साथ ही ज्यादा फायदे के लिए ब्रेक की अवधि बढ़ाई भी जा सकती है।

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