बीईओ के पद पर लेक्चरर की नियुक्ति नियम विरुद्ध फिर भी दर्जनों लेक्चरर और प्रिंसिपल बीईओ बनकर बैठे, क्लास बिना टीचर के
बिलासपुर/ स्कूल शिक्षा विभाग ने बलौदाबाजार के प्रभारी बीईओ राजेंद्र जोशी को हटा दिया है। विभाग के अवर सचिव आरपी वर्मा ने गुरुवार को इस संबंध में आदेश जारी किया है। उनके स्थान पर एबीईओ राजेंद्र टंडन को प्रभारी बीईओ की जिम्मेदारी दी गई है। 30 सितंबर 2022 को राजेंद्र जोशी को बलौदाबाजार का प्रभारी बीईओ बनाया गया था। इसे एबीईओ राजेंद्र टंडन ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। इस मामले में हाई कोर्ट ने 19 सितंबर 2023 को आदेश जारी किया था।
विभाग ने टंडन के अभ्यावेदन का परीक्षण किया। इसके मुताबिक 25 प्रतिशत पदों को एबीईओ की पदोन्नति से भरा जाना है। 75 प्रतिशत पदों को अन्य सेवाओं के व्यक्तियों के स्थानांतरण/प्रतिनियुक्ति से भरा जाना है। भर्ती नियम में यह स्पष्ट है कि पात्र अभ्यर्थी नहीं होने की स्थिति में न्यूनतम 5 साल के अनुभवी प्राचार्य को बीईओ की जिम्मेदारी दी जा सकती है। जोशी का मूल पद लेक्चरर है, इसलिए वे बीईओ के पद के लिए पात्र नहीं हैं।
छत्तीसगढ़ के स्कूलाें में शिक्षकों की कमी पूरी नहीं हो पा रही है और दर्जनों लेक्चरर और प्रिंसिपल बीईओ बनकर बैठ गए हैं। नियम के मुताबिक लेक्चरर को बीईओ की जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती है। हाई कोर्ट ने भी बीईओ के पद पर लेक्चरर की नियुक्ति को नियम विरुद्ध माना है। इसके बाद भी 146 ब्लॉक में से 55 में लेक्चरर ही बीईओ की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इसी तरह 41 प्राचार्य बीईओ के पद पर हैं। विधानसभा में शिक्षकों की कमी के संबंध में एक सवाल में पूर्व शिक्षा मंत्री ने बताया था कि प्रदेश में प्रिंसिपल के 3200 और लेक्चरर के 6485 पद रिक्त हैं। इसके बाद भी इन्हें बीईओ बनाकर रखा गया है। ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर (बीईओ) का पद प्रशासनिक है। इसमें प्रिंसिपल के पद पर 5 साल या ज्यादा की सीनियारिटी के आधार पर प्रतिनियुक्ति की जाती है। लेक्चरर की नियुक्ति नहीं कर सकते। इसके विपरीत बीईओ बनने के लिए मंत्री और विधायक स्तर पर लॉबिंग होती है।
स्कूलों में पढ़ाई का काम छोड़कर लेक्चरर प्रशासनिक पदों पर बैठ जाते हैं। 146 ब्लॉक में सिर्फ 34 में ही नियमित बीईओ की नियुक्ति है। 5 ब्लॉक में एबीईओ को प्रभारी बनाकर बैठाया गया है, जबकि प्रिंसिपल से ज्यादा संख्या में लेक्चरर इस पद पर बैठे हैं।
जो प्रिंसिपल इस पद पर हैं, उनमें कई 5 साल सीनियारिटी में नहीं आते हैं। कई प्रभारी बीईओ के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतें भी हैं।12 साल से जमे हैं बीईओ बनकर: कई लेक्चरर पिछले 12 साल से बीईओ बनकर जमे हुए हैं। सबसे ज्यादा लेक्चरर की नियुक्ति 2018 के बाद हुई है, जो अभी भी बीईओ बनकर बैठे हैं। पिछली सरकार के समय में भी लेक्चरर को मूल पद पर भेजने की मांग उठी थी। हालांकि इस पर कोई निर्णय नहीं हो पाया। यहां तक कि हाई कोर्ट के निर्देश के बाद भी बीईओ को नहीं हटाया गया।
बीईओ-एबीईओ संघ द्वारा कई बार प्रभारी बीईओ को हटाने की मांग की जा चुकी है। इसके बावजूद उन्हें हटाया नहीं गया। संघ की ओर से पहले कई शिक्षा मंत्री को ज्ञापन दिया जा चुका है। इसी मामले में हाई कोर्ट का भी फैसला आ चुका है। इसके बाद भी मांगें पूरी नहीं हुई और नियम विरुद्ध तरीके से लेक्चरर और अपात्र प्रिंसिपल बीईओ बनकर बैठे हैं।
.jpeg)
टिप्पणियाँ