जगदलपुर/ यदि आप ठेले, होटलों में जलेबी और चाट खाने के शौकीन है, तो खाने से पहले एक बार जरूर सोच लें। कई दुकानदार इन दोनों खाद्य पदार्थों में कपड़ा रंगने वाला कलर मिला रहे हैं। इससे कैंसर का भी खतरा रहता है। यह बात शनिवार को खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की जांच में सामने आई।
शहर के सिरहासार भवन के पास लग रहे ठेले और चलित खाद्य प्रयोग शाला लेकर टीम ने 20 से अधिक ठेले व दुकानों में दबिश दी और खाद्य पदार्थों के लिए। इनमें से 12 खाद्य पदार्थों में तय मात्रा से ज्यादा रंग मिला। अधिकारियों ने इन दुकानदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की बल्कि हर बार की तरह इस बार भी कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि दोबारा ऐसा रंग मिलाते मिलने पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी और वहां से चल दिए। जिसका फायदा ठेले वाले उठा रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक इससे पहले शहर के शहीद पार्क चौपाटी में जून 2023 मे हुई जांच मे कई खाद्य पदार्थों में तय मात्रा से ज्यादा रंग मिला था जो सेहत के लिए यह नुकसान देह है। इसके बाद अब तक कोई कार्रवाई विभाग के द्वारा नहीं की गई है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी आशीष यादव ने कहा कि जिले के समस्त रेस्टोरेंट, फास्ट फुड सेंटर, ठेले गुमटी, जूस सेंटर संचालकों की जांच के निर्देश कलेक्टर विजय दयाराम के निर्देश पर किया जा रहा है। ठेले वाले खाद्य पदार्थ में रंग लाने के लिए जिस कलर का उपयोग कर रहे हैं वत तय मात्रा से ज्यादा था। इसके साथ ही मीठे पानी में कलर ज्यादा पाया गया जो स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। तय मात्रा से ज्यादा रंग पाए जाने के कारण नमूनों को अमानक माना गया।
खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम के तहत खाद्य पदार्थों में हानिकारक रंग मिलाने पर वैधानिक कार्रवाई का भी प्रावधान है। संबंधित दुकानदार पर 5 लाख तक का जुर्माना और 6 माह सजा का प्रावधान है। हालांकि जिले में अब तक ऐसी कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है। जन समुदाय के लिए भी यह खतरनाक है, इसलिए लोग भी कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। लेकिन विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई रायपुर से जांच रिपोर्ट आने के बाद संभव ही है। चलित प्रयोगशाला की रिपोर्ट में यह कार्रवाई संभव नहीं है।
जिले में पिछले कुछ दिनों से मिलावटी कारोबार की आशंका को लेकर खाद्य एंव औषधिक प्रशासन विभाग के द्वारा शहर में संचालित किराना दुकान और होटल और रेस्टोरेंट की जांच की जा रही है। इसी आशंका को लेकर सिरहासार भवन के पास संचालित ठेले में करीब चार घंटे तक की गई जांच के दौरान मोबाइल फूड लैब के माध्यम से किए गए 72 नमूनों की तत्काल जांच की गई, जिसमें 12 नमूने अमानक पाए गए। इसके साथ ही केसर कतली, खोवा रोल, बेसन लड्डू तथा किराना दुकानों से तिल तेल एवं नमक का नमूना संग्रहण कर जांच हेतु राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला कालीबाड़ी रायपुर भेजा गया है।
जांच के दौरान टीम ने ठेलों में बिकने वाले करीब एक दर्जन नमूनों की जांच की। जिसके बाद चाशनी, फिंगर चिप्स, मीठी चटनी, मीठा पानी, इमली चटनी में ज्यादा रंग मिला। अधिकारियों की मानें तो शहर भर के ठेले सहित होटलों में बिकनेवाले लड्डू, जलेबी, बुंदिया, मंचूरियन व चाट में यह रंग धड़ल्ले से प्रयोग किया जा रहा है। रंग युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन में पर्याप्त सावधानी जरूरी है। खास कर पीले रंग से तैयार खाद्य पदार्थ से परहेज किया जाये।यादव ने कहा कि चलित खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला के माध्यम से शहर स्थित शासकीय प्री मैट्रिक विशिष्ट बालक छात्रावास एवं शासकीय प्री मैट्रिक बालक छात्रावास नयापारा जगदलपुर में निरीक्षण किया गया। सभी छात्रावासों में स्टोर रुम एवं किचन का निरीक्षण कर संबंधित स्टॉफ को समुचित रखरखाव तथा सफाई के बारे में आवश्यक निर्देश दिए गए।

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