गरियाबंद/ गरियाबंद के शासकीय, प्राथमिक और मिडिल स्कूल के मिड डे मील में बच्चों को परोसी जा रही सोयाबीन बड़ी में लगातार कीड़े (इल्ली, घुन) निकलने की शिकायत सामने आ रही है। इस मामले में गरियाबंद कलेक्टर दीपक अग्रवाल ने जांच के बाद कार्रवाई करने की बात कही है।
दरअसल, आत्मानंद बालक प्राथमिक और माध्यमिक शाला हिंदी माध्यम के मिड डे मील में मिलने वाली सोयाबीन बड़ी में कीड़े निकले थे। इसकी लिखित शिकायत फोटो सहित खाना बनाने वाली स्व सहायता समूह की महिलाओं ने ब्लॉक शिक्षा अधिकारी से की थी। बीईओ ने 20 मार्च को आदेश जारी करते हुए सोयाबीन में कीड़ा पाए जाने पर सैंपल ब्लॉक ऑफिस में भेजने की बात कही।
शिकायत पर पहुंचे अधिकारी
इस पूरे शिकायत की जांच को लेकर जिला स्रोत समन्वयक और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी मौके पर पहुंचे। जांच के दौरान जब अधिकारियों के सामने सोयाबीन बड़ी के सील पैक पैकेट को खोलकर उसे गर्म पानी में डालकर पकाया गया तो उसमें से छोटी-छोटी इल्लियां निकली। दूसरे पैकेट में से घुन निकले। वहीं तीसरा पैकेट ठीक निकला।
इसके बाद जिला स्त्रोत समन्वयक के एस नायक ने पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपने की बात कही। सूत्रों की मानें तो बीते कुछ दिनों में अंग्रेजी माध्यम आत्मानंद इंग्लिश स्कूल और डाकबंगला स्कूल में भी कीड़े निकले थे जिसके बाद उन्होंने खिलाना बंद कर दिया। शिकायत केवल दो-तीन स्कूलों से ही नहीं लगभग हर स्कूल से कीड़े निकालने की शिकायत आ रही है।
सोयाबीन बड़ी मार्केट रेट से अधिक दर पर उपलब्ध
छत्तीसगढ़ राज्य बीज और कृषि विकास निगम द्वारा दिए गए सोयाबीन बड़ी मार्केट रेट से अधिक दर पर उपलब्ध कराई जाती है। मार्केट में अच्छी क्वालिटी की सोयाबीन बड़ी 80 से 90 रुपए किलो में मिल जाती है।
वहीं स्कूलों में आने वाली सोयाबीन बड़ी की कीमत 131 रुपए किलोग्राम बताई जाती है, जो खाना बनाने वाली स्व सहायता समूह के खाते से कटती है। पैकेट में 1 साल की अवधि लिखी है लेकिन मैन्युफैक्चरिंग डेट दूसरी जगह लिखी होने के चलते लोगों को दिखाई नहीं देती है।
सोयाबीन बड़ी का स्टॉक किसी महीने नहीं आने पर दूसरे महीने दिया जाता है। उसे इस महीने खत्म करने का दबाव रहता है, जैसे जनवरी महीने में सोयाबीन पैकेट नहीं मिला और फरवरी महीने में मिला तो जनवरी और फरवरी दोनों महीने के पैकेट फरवरी महीने में बच्चों को खिलाए जाने का प्रेशर रहता है। हफ्ते में दो दिन के बदले बच्चों को 3 से 4 दिन सोयाबीन की बड़ी खानी पड़ती है।
जरूरत से ज्यादा पौष्टिक खाद्य पदार्थ हानिकारक
गरियाबंद स्थित जिला अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ से जब इस बारे में जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा बच्चों को पौष्टिकता भी एक निश्चित मात्रा में देना है, अगर जरूरत से ज्यादा पौष्टिक खाद्य पदार्थ उन्हें दिए गए तो वो भी उनके शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। वहीं अधिकतर स्कूलों में शिकायत मिली है कि बच्चे सोयाबीन बड़ी खाना पसंद नहीं करते हैं।
बड़ी की क्वालिटी को पसंद नहीं करते बच्चे
गरियाबंद विकासखंड के अंतर्गत 192 प्राइमरी स्कूल है, जिसमें 8432 बच्चे हैं इसी तरह 93 मिडिल स्कूल है जिसमें 4959 बच्चे हैं। शासन द्वारा जारी की गई गाइडलाइन के अनुसार प्राइमरी स्कूल के बच्चों को 10 ग्राम और मिडिल स्कूल के बच्चों को 15 ग्राम बड़ी सब्जी में मिलाकर खिलाना है। मगर बड़ी की क्वालिटी को देखते हुए अधिकतर बच्चे इसे खाने से परहेज करते हैं।
होगी कार्रवाई
गरियाबंद कलेक्टर दीपक अग्रवाल का कहना है कि मामला मेरे संज्ञान में आया है, इसे जिला शिक्षा अधिकारी और संकुल स्त्रोत समन्वयक को जांच के लिए दिया गया है। अगर इस तरह की शिकायत सही पाई जाती है तो जिस संस्था के द्वारा बड़ी की सप्लाई की जाती है उसके ऊपर कार्रवाई की जाएगी।
संकुल स्रोत समन्वयक के एल नायक ने बताया कि आत्मानंद हिंदी माध्यम स्कूल में सोयाबीन बड़ी की जांच की गई है। ब्लॉक शिक्षा अधिकारी और स्कूल के शिक्षकों को भी जांच के के लिए कहा गया है। जांच के बाद जो भी रिपोर्ट आएगी उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

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