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आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में फर्नीचर सप्लाई में बड़ा घोटाला- 2 साल में करोड़ों की फर्नीचर टूटने लगी

रायपुर/ रायपुर जिले के आत्मानंद स्कूलों में पहुंचाए गए ऐसे टेबल और बेंच जिसमें प्लाई नहीं बुरादे की सीट लगा दी, इसलिए टूटने पर मरम्मत भी नहीं

कांग्रेस सरकार सबसे चर्चित योजनाओं में शामिल आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में फर्नीचर सप्लाई में बड़ा घोटाला हुआ है। अकेले रायपुर जिले में 2 साल में करोड़ों की लागत से जिन टेबल-बेंच की सप्लाई हुई, वो टूटने लगे हैं। लोहे के फ्रेम में प्लाई नहीं बल्कि बुरादे की सीट लगी हैं। छात्र इन्हीं टूटे फर्नीचर में बैठने को मजबूर हैं। स्थिति यह कि स्कूल प्रबंधन इन्हें कबाड़ में पटकवा रहा है, क्योंकि बुरादे की सीट्स की मरम्मत नहीं हो रही। स्क्रू तक नहीं कस रहे। पानी पड़ने पर सीट गल रही है।

 जिले के 36 आत्मानंद स्कूलों में से 10 में मौके पर जाकर पड़ताल की। इस दौरान खुलासा हुआ कि फर्नीचर की खरीदी छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (सीएसआईडीसी) से रजिस्टर्ड फर्मों से हुई है। सप्लायर ने सीधे स्कूलों में फर्नीचर सप्लाई किए। प्राचार्यों को दी गई पावतियों में सिर्फ फर्नीचर की संख्या दर्ज है, लागत नहीं। स्कूलों में 50 सेट (50 टेबल, 50 बेंच) से लेकर 260 सेट सप्लाई हुए हैं। एक सेट की कीमत करीब 4 हजार रुपए है। पड़ताल में दो फर्मों उन्नति बेंचर और केचिका इंटरप्राइजेज के नाम सामने आए हैं।

इस पूरे मामले में रायपुर जिला शिक्षा अधिकारी विजय खंडेलवाल का कहना है कि- मैंने 2 दिन पहले चार्ज लिया है, जानकारी नहीं है। यहां बताया गया कि खरीदी लोक शिक्षण संचालनालय से हुई है, तो हमने संचालनालय के अधिकारियों से बात की।

ये बोले- आत्मानंद स्कूलों के लिए किसी भी खरीदी के लिए संचालनालय अधिकृत नहीं है। अब सवाल था कि फिर खरीदी किसने की? तो जवाब मिला कि हर स्कूल की अपनी समिति है। कलेक्टर अध्यक्ष, जिला शिक्षा अधिकारी सचिव और प्राचार्य सदस्य होते हैं। यही खरीदी करती हैं। हालांकि मौजूदा भाजपा सरकार ने समितियों को भंग कर स्कूलों का संचालन शासन स्तर पर करने का फैसला ले लिया है। आदेश जल्द जारी होगा। उधर, बीते सालों में बिलासपुर, गरियाबंद, रायगढ़ और सूरजपुर में फर्नीचर सप्लाई में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आईं,कलेक्टरों ने जांच करवाई और कार्रवाईयां हुई।

घोटाले का कैल्कुलेशन: स्कूल में प्राचार्यों की मांग के अनुसार 50-50, 100-100 से 260-260 बेंच-टेबल सप्लाई हुए हैं। एक सेट की कीमत करीब 4 हजार रुपए है। अगर, एक स्कूल 260 सेट सप्लाई हुए हैं तो लागत 10 लाख रुपए होगी।

आत्मानंद स्कूल योजना को समझ लीजिए- 1 नवंबर 2020 को कांग्रेस सरकार ने स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय योजना लांच की। इसका उद्देश्य समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के प्रतिभाशाली छात्रों को समान अवसर प्रदान करना है, इन्हें अंग्रेजी और हिंदी मिडियम में शिक्षा मुहैया करवाना है। आज दिनांक तक 751 स्कूल संचालित हैं। इनमें इंफ्रास्ट्रक्चर, अत्याधुनिक लाइब्रेरी,कम्प्यूटर लैब, साइंस लैब स्थापित की गई है। (आरडी तिवारी, बीपी पुजारी व शहीद स्मारक स्कूल फर्स्ट फेज में खुले। सिर्फ इनका फर्नीचर कलरफुल है।)

हिंदी मिडियम स्कूलों को नहीं मिला फर्नीचर- योजना के तहत हिंदी मिडियम के स्कूल, जिन्हें आत्मानंद योजना में जोड़ा गया उनमें अब तक फर्नीचर ही सप्लाई नहीं हुआ है। इनमें मायाराम सुर्जन, जेआर दानी और जेएन पांडेय स्कूल शामिल हैं। फर्नीचर क्यों नहीं दिया गया? इसका कोई स्पष्ट जवाब विभाग के पास नहीं है।

गौरव कुमार सिंह, कलेक्टर रायपुर फैक्ट फाइल- 37 स्कूल रायपुर में। 751 स्कूल प्रदेश में। 450452 छात्र अध्ययनरत। ये तो उदाहरण हैं, अमूमन यही स्थिति हर स्कूल की है

केस-1

पीजी उमाठे उत्कृष्ट शासकीय स्कूल, शांति नगर विद्यार्थी-1000 15 मार्च, समय- 1:30 बजे 2022-23 में स्कूल को योजना में जोड़ा गया। यहां 260-260 टेबल, बेंच सप्लाई हुए। स्थिति यह है कि सब टूट रहे हैं। छात्र इन्हीं टूटे फर्नीचर में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। पूछने पर छात्रों ने टूटे फर्नीचर उठा-उठाकर दिखाए।

केस-2

स्वामी आत्मानंद शासकीय स्कूल, सरोना विद्यार्थी-807 16 मार्च, समय- 2 बजे 2022 में योजना में शामिल किया गया। यहां एक क्लास में पढ़ा रहे शिक्षक से फर्नीचर के बारे में पूछा तो बोले- आप खुद देख लीजिए। उनका इतना बोलना था कि छात्र टूटे फर्नीचर दिखाने लगे।हर क्लास का यही हाल है। टूटे फर्नीचर डंप किए जा रहे हैं।

केस-3

आरडी तिवारी, शासकीय स्कूल, आमापारा विद्यार्थी-1132 27 फरवरी, समय- 3 बजे यह स्कूल पहले फेज में खुले 3 स्कूलों में शामिल है। यहां, साल 2021 में कलरफुल फर्नीचर सप्लाई हुआ। पर जल्द फर्नीचर खराब होने लगा। कलरफुल सीट उखड़ी तो पता चला कि ये बुरादे से बने हैं। 3 साल मरम्मत करनी थी, मगर सप्लायर नहीं आ रहा।

आत्मानंद स्कूलों में फर्नीचर सप्लाई मानकों पर नहीं है। मैंने इसे लेकर जांच के निर्देश दिए हैं। मैंने विधानसभा में भी कहा है कि आत्मानंद स्कूलों में काफी गड़बड़ी हुई है। जो भी दोषी पाया जाएगा उस पर कार्रवाई होगी।-बृजमोहन अग्रवाल, स्कूल शिक्षा मंत्री

आत्मानंद स्कूल जिला कलेक्टरों के अंतर्गत संचालित हो रहे हैं। स्कूल संबंधित सभी चीजों की खरीदी कलेक्टर स्तर समितियां करती हैं। फिर भी कहीं से फर्नीचर खराब होने की शिकायतें हैं तो आप बताईए, मैं दिखवाती हूं।

-दिव्या उमेश मिश्रा, संचालक, लोक शिक्षण

आत्मानंद स्कूलों के फर्नीचर के संबंध में अभी तक मेरे पास कोई भी शिकायत नहीं आई है, अगर किसी की शिकायत आएगी तो कमेटी बनाकर जांच करवाऊंगा।-गौरव कुमार सिंह, कलेक्टर रायपुर

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