सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

UPPSC इंटरव्‍यू के दिन पिता की मौत पर आनंद कुमार के लिए हो गई बहुत मुश्किल घर पे रहे या इंटरव्यू दे...फिर बने डिप्‍टी जेलर

उत्‍तर प्रदेश सिविल सर्विस एग्‍जाम यानी UPPSC 2023 के फाइनल रिजल्‍ट 23 जनवरी को जारी हुए। इसमें कुल 251 कैंडिडेट्स सिलेक्‍ट हुए। इन्‍हीं कैंडिडेट्स में एक नाम है आनंद कुमार राजपूत का, जिनके लिए ये परीक्षा बाकियों के मुकाबले कहीं ज्‍यादा कठिन थी। क्योंकि.....कारण बता रहे हैं खुद आनंद कुमार राजपूत.

6 जनवरी की बात है, मैं दिल्ली में था। UP PCS इंटरव्यू देने जाने के लिए पैकिंग कर रहा था। इंटरव्यू 8 जनवरी को इलाहाबाद में होना था। सोचा एक बार और मॉक इंटरव्यू दे लूं, तो सिलेक्शन का चांस बढ़ जाएगा। तभी घर से फोन आया। लगा मेरी तैयारी के बारे में पूछने के लिए फोन किया जा रहा है। मगर फोन उठाया तो खबर मिली कि मेरे पिताजी का देहांत हो गया है...

इंटरव्यू के लिए पैक किया बैग उठाकर मैं घर के लिए निकल गया। दिल्ली से बांदा के पूरे रास्ते ढेरों सवाल, दुख और निराशा एक साथ महसूस हो रहे थे। पिताजी का ही सपना था कि मैं PCS ऑफिसर बनूं, जिसके लिए मैं घर से दूर दिल्‍ली में तैयारी कर रहा था। घर पहुंचा तो वहां मेरा ही इंतजार किया जा रहा था। अगले दिन मुझे ही पिता को मुखाग्नि देनी थी। मगर उसी दिन इलाहाबाद में UPPSC का इंटरव्‍यू था। मुझे उसी वक्‍त फैसला करना था कि पिताजी का सपना पूरा करने के लिए इंटरव्‍यू देने जाऊं या उन्‍हें खोने का दुख मनाऊं...

आखिरकार UP के बांदा जिले के रहने वाले 26 साल के आनंद सिंह राजपूत ने इंटरव्यू देने जाने का फैसला किया। वे सुबह ही इलाहाबाद के लिए निकल गए। मन भारी था मगर पूरी ईमानदारी से इंटरव्‍यू दिया। वहां से सीधे घर लौटे और देर शाम पिता को मुखाग्नि दी।

11 दिन बाद ही 23 जनवरी को UP PCS का फाइनल रिजल्ट जारी हुआ। आनंद ने पूरे प्रदेश में 30वीं रैंक हासिल की थी। ट्रेनिंग के बाद वो डिप्टी जेलर के पद पर नियुक्त होंगे।

आनंद के पिताजी सरकारी स्कूल में शिक्षक थे। घर चलाने वाले वो अकेले ही थे। उनके गुजर जाने के बाद घर में गम का माहौल था। घर में आनंद के अलावा उनकी मां, एक बड़ी बहन और एक छोटा भाई है। आनंद के PCS रिजल्ट के बाद घर का माहौल बेहतर हुआ है। घर में खुशी तो नहीं पर संतुष्टि आई हैं कि पिताजी के बाद घर में एक आधार हो गया है।

खुद को संभालना चुनौती जैसा था

आनंद ने बताया कि उनका इंटरव्यू बहुत ही एवरेज हुआ था। पिताजी के गुजरने के दुख से कोपअप नहीं कर पा रहे थे। इंटरव्यू तक पहली ही बार पहुंचे थे तो नर्वसनेस भी थी। इंटरव्यू से एक दिन पहले पिताजी की मृत्यु हो के बाद इंटरव्यू देने जाने का फैसला मुश्किल था। लेकिन क्योंकि उनके पिताजी की इच्छा थी कि वो ये नौकरी करें तो उनके गुजरने के बाद उनकी इच्छा तो पूरी करनी ही थी। इसलिए आनंद हिम्मत करके आगे बढ़े।

10-15 दिन पहले ही पता चलता है इंटरव्यू के बारे में

आनंद ने कहा कि इंटरव्यू पर्सनैलिटी टेस्ट की तरह होता है। ज्यादातर सवाल बैकग्राउंड से रिलेटेड ही पूछे जाते हैं। आनंद ने BEd किया हुआ था, तो उनसे एजुकेशन से रिलेटेड ही सवाल पूछे गए। बाकी कई सवाल पैनल के मूड पर डिपेंड करते हैं।

इंटरव्यू के लिए कोई स्पेसेफिक तैयारी नहीं की जाती, क्योंकि ये एक पर्सनैलिटी टेस्ट होता है। इंटरव्यू का कोई सिलेबस भी नहीं होता। कोई करिकुलम नहीं होता जिसे पढ़ के इंटरव्यू क्वालिफाई कर सकते हैं। आखिर के 10-15 दिन पहले ही पता चलता है इंटरव्यू के बारे में, तो तैयारी का भी ज्यादा समय होता नहीं है और 10-15 दिन में पर्सनैलिटी तो चेंज नहीं कर सकते।

पैटर्न पर ध्यान दें

आनंद ने कहा कि कोई भी एग्जाम क्वालिफाई करने के लिए उसका पैटर्न समझना बहुत जरूरी है। पढ़ने के लिए काफी कुछ होता है, लेकिन हर चीज याद नहीं की जा सकती। आनंद ने 1-2 बार प्रीलिम दिया और सिलेक्शन नहीं हुआ। तब उन्हें समझ आया कि वो पैटर्न के हिसाब से नहीं पढ़ रहे थे। पढ़ रहे थे और एग्जाम में कुछ और आ रहा था। फिर उन्होंने एग्जाम में क्या पूछा जा रहा है, उस पर ध्यान देना शुरू किया और उन्हीं चीजों पर काम करना शुरू किया। इसमें पिछले सालों के क्वेश्चन पेपर्स से काफी मदद हुई। करेंट अफेयर्स का भी रोल अहम रहता है। फिर तीसरे अटेंम्ट में आनंद ने प्रीलिम एग्जाम क्वालिफाई किया। इसके बाद चौथे अटेंप्ट में वो इंटरव्यू तक पहुंचे।

टॉपिक्स के हिसाब में पढ़े 

बोर्ड एग्जाम देने वाले बच्चों के लिए आनंद ने कहा कि एग्जाम्स की तैयारी एक टॉर्गेट बनाकर करें। घंटों के हिसाब से नहीं टॉपिक्स के हिसाब से पढ़ाई करें। टारगेट बनाएं कि दिन में कितने टॉपिक्स कवर करने ही हैं, चाहे उसमें पूरा दिन लगे या सिर्फ एक घंटा। मार्क्स गेन करने हैं तो प्रीवियस इयर क्वेश्चन्स पर ध्यान दें। आखिरी समय में ऐसे टॉपिक्स पर ध्यान दें जो एग्जाम में आने वाले हैं। नॉलेज तो ठीक है, लेकिन अलटीमेटली मार्क्स भी मैटर करते हैं। पेपर देने जाने से पहले पिछले सालों के सवाल जरूर देखें।

सक्सेस मंत्रा के सवाल पर आनंद ने बताया कि कॉम्पिटिशन या भीड़ देखकर या लंबे समय तक सक्सेसफुल नहीं हो रहे हैं तो परेशान न हों, पढ़ते रहें। कोशिश करते रहें, कंटीन्यूटी बनी रहेगी तो एक न एक दिन सफलता जरूर मिलेगी। कई लोग सक्सेसफुल नहीं होते तो तैयारी करना छोड़ देते हैं। फिर जब एग्जाम आने वाला होता है तो वापस तैयारी शुरू करते हैं। ये गलत है, डेली पढ़ें और लंबा गैप न करें।

अंतरआत्मा की सुनें

आनंद कहते हैं कि मुश्किल समय में जब समझ नहीं आता कि क्या करें तो शांत होकर अंतरआत्मा की सुनें। उसी के फैसले सही होते हैं। पिता की मुखाग्नि टालकर इंटरव्‍यू देने जाने का उनका फैसला आसान नहीं था। असमंजस की स्थिति में अंतरआत्मा से जो भी आवाज आए, उसी के आधार पर फैसला कर लेना चाहिए, क्योंकि फ्यूचर में क्या होगा ये कोई नहीं जानता। लेकिन किसी न किसी फैसले पर तो आना ही पड़ता है। मन की आवाज के अनुसार चले तो बेहतर रिजल्ट मिलेंगे और अगर रिजल्ट अनुकूल नहीं भी आता है तो अफसोस नहीं होगा।

टिप्पणियाँ