कांकेर/ जिला शिक्षा व प्रशिक्षण संस्थान केंद्र कांकेर में पढ़ाई कम फर्जीवाड़ा पर ज्यादा शोध किया जा रहा है। संस्था के शिक्षाविदों ने फर्जीवाड़ा करने ऐसी गलतियां की हैं कि अब इनके पढ़े-लिखे होने पर भी शक होने लगा है। संस्था में स्टेशनरी व फोटोकॉपी को लेकर अलग-अलग लाखों रुपए के बिल लगाए है। चौंकाने वाली बात ये है कि जिस शैलजा कम्प्यूटर से फोटोकॉपी कराना बताया है उसका पता संस्था के किसी कर्मचारी को नहीं है। फिर भी इसका भुगतान हो रहा है। इससे भी ज्यादा हैरान करने वाली बात' है कई बिल उस तारीख के लगे हैं जब पूरे देश में लॉकडाउन था और सभी संस्थाएं बंद थीं। इसके बावजूद डाइट में पढ़ाई के साथ उक्त कम्प्यूटर सेंटर में फोटोकॉपी भी होती रही।
शैलजा कम्प्यूटर का पता व उसकी जानकारी नहीं होने का दावा स्वयं संस्था प्रमुख कर रहे हैं, जिनके द्वारा इसके नाम से लाखों का बिल भुगतान किया गया है। डाइट में स्टेशनरी, फोटोकॉपी व सामग्री खरीदी के नाम लाखों का फर्जीवाड़ा हुआ है। स्टेशनरी व फोटोकॉपी भुगतान को लेकर साल 2020 से 2023 के बीच शैलजा कम्प्यूटर के नाम से कई बिल लगाए गए हैं। बिल में दुकान का पता कोरर रोड आरईएस कॉलोनी कांकेर दिया है। संचालक का मोबाइल नंबर तो दिया है लेकिन नाम का उल्लेख नहीं है। बिल पर लिखा मोबाइल नंबर 9617660801 लगता ही नहीं है।
शैलजा कम्प्यूटर के नाम से फोटोकॉपी, प्रिटिंग, रंगीन पेंसिल, टायपिंग, प्रूफ रीडिंग, बाइंडिंग, शोध कार्य, कोरा कागज, रिम, ड्राइंग शीट, प्रोजेक्ट फाइल, कलर पेन, फोटोग्राफी के बिल लगा भुगतान किया है। शैलजा कम्प्यूटर को लेकर शिकायत होने पर संस्था प्रमुख आनंद गुप्ता से नवंबर 2023 में जवाब मांगा गया तो उन्होंने लिखित जवाब में कहा है शैलजा कम्प्यूटर के संचालक का नाम व पते की जानकारी कार्यालय में नहीं है। शैलजा कम्प्यूटर के नाम से कोई कार्यादेश भी जारी नहीं किया है। संस्था सदस्यों द्वारा व्यक्तिगत रूप से काम करा नगद भुगतान कर बिल कार्यालय में जमा कराया है। पता चला इस नाम से कोरर रोड आरईएस कॉलोनी या उसके आसपास कोई संस्था ही नहीं है। फर्जीवाड़ा करने कर्मचारियों ने शैलजा कम्प्यूटर के नाम से बिलबुक छपवा फर्जीवाड़ा किया। कोरोना को लेकर पहला लॉकडाउन मार्च 2020 से जून 2020 तक लगा था। इस दौरान पूर्ण लॉकडाउन था। सभी शिक्षण प्रशिक्षण संस्थाओं के साथ दुकानें बंद थीं। डाइट द्वारा लाकडाउन के दौरान शैलजा कम्प्यूटर के नाम से अप्रैल, मई व जून 2020 में भी विभिन्न कामों का बिल लगा भुगतान किया गया है। शैलजा कम्प्यूटर के नाम से लॉकडाउन के दौरान दिया गया बिल।
फर्जी बिलों का भगुतान करने के चक्कर में यह भी नहीं देखा कि बिल कहां का है। डाइट में फरवरी 2023 में डिजिटल प्रिंट साल्युशन टिकरापारा कांकेर के नाम से दो हजार का बिल लगाया है। यह बिल प्राचार्य डाइट के नाम से नहीं होकर प्रणिता साहू प्राथमिक शाला चवांड के नाम का है। जांच किए बिना डाइट से यह बिल भी पास हो गया और भुगतान भी कर दिया गया।
शैलजा कम्प्यूटर को लेकर शिकायत हुई तो डाइट द्वारा कमेटी बनाकर जांच करा दी गई। तीन सदस्यी टीम में संस्था के उन कर्मचारियों को लिया गया जिन पर घोटाले का आरोप है। टीम में संस्था के व्याख्याता बालाराम सिन्हा, हेमचंद सिन्हा के अलावा बीएड कॉलेज प्राध्यापक कृष्णमूर्ति शर्मा को शामिल किया गया। शिकायत की जांच करते टीम ने प्रतिवेदन भी सौंप दिया। स्वयं टीम के सदस्य प्राध्यापक कृष्णमूर्ति शर्मा का कहना है उन्हें टीम में जरूर शामिल किया था लेकिन क्या और कब जांच हुई इसकी जानकारी मुझे नहीं है।

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