नई दिल्ली/ UP के मुज्जफरनगर का एक वीडियो आजकल वायरल है जिसमें स्टेज पर दूल्हा-दुल्हन पिस्तौल से फायर करते दिख रहे हैं। असल में, शादियों में बैंड-बाजा-बारात के साथ बंदूक जश्न का हिस्सा बनती जा रही है। अक्सर आर्थिक और सामाजिक असमानता से जूझ रहे इलाकों में शादी ब्याह का जश्न इस तरह मनाना आम बात है। इस जश्न के पीछे का मकसद समाज में अपनी पकड़ और ताकत का दिखावा करना होता है।
बारातियों के हाथों में बंदूक आम बात है, लेकिन बदलते जमाने ने इस बारूदी चलन को भी नया रूप दे दिया गया। ये बात कोई हवा हवाई फायरिंग की बिसात पर नहीं कही जा रही है, बल्कि शादी का वीडियो वायरल होना चर्चा का विषय बना हुआ है। हद तब हो गई जब फायरिंग में सिर्फ बाराती और दूल्हा ही नहीं बल्कि घूंघट में रहने वाली दुल्हन भी हर्ष फायरिंग का हिस्सा बन गई।
बुलेट राजा....
पिछले साल बिहार के मुंगेर जिले में एक बारात की तस्वीरें वायरल हुईं जिनमें हाथों में राइफल लिए दूल्हा निशाना साधते और फायरिंग करते दिखाई दे रहा है। इन तस्वीरों को देखकर हर कोई कह रहा है कि ‘ये दूल्हे राजा नहीं, ई तो बुलेट राजा हैं...।’
दुल्हन लेने जा रहे दूल्हे ने खुशी में ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। बारात में आए दूसरे बारातियों ने भी जमकर फायरिंग की। बारात में फायरिंग की इस घटना की पुलिस को भनक तक नहीं लगी या यह भी मुमकिन है कि पुलिस इस मामले का अनदेखा किया हो।
इसी से मिलता-जुलता एक और वीडियो वायरल हो रहा है जहां शादी के स्टेज पर दूल्हा दुल्हन दोनों एक साथ फायर कर रहे हैं। ये वीडियो इंस्टाग्राम mayank_purani के अकाउंट से शेयर किया गया है, जहां शादी के स्टेज पर दूल्हा दुल्हन दोनों ने एक साथ बंदूक को ऐसे थामा मानो पेशेवर ‘बंदूकबाज’ हों। अगले ही पल दूल्हे ने धांए से फायर किया तो बेचारी दुल्हन डर से चौंक गई। दुल्हन के चेहरे पर खौफ साफ नजर आ रहा है।
बारातियों में बंदूक लहराने का ट्रेंड
शादियों में बंदूक से फायरिंग करना और जश्न मनाना आम है। अक्सर बाराती हवाई फायरिंग करके या पटाखे जलाकर जश्न में खुशी का इजहार करते हैं। लेकिन इसके पीछे की वजह क्या है और इसकी शुरुआत कब हुई?
फायरिंग का चलन शुरू हुआ
बारात में फायरिंग और आतिशबाजी के मुद्दे पर हमने कई बुजुर्गों से बात की। इसी क्रम में आजमगढ़ के मोहन बाबा का कहना था कि जब पुराने जमाने में शादियां होती थीं तो चोर और डकैत शादी वाले घर और बारातियों पर हमला कर लूटपाट करते थे। उस जमाने में ये चलन आम था। मेहमानों से भरे घर में गहने और कीमती सामान होते, जिस पर डकैतों की नजर रहती।
डकैत घरों में सेंध लगाकर लूटपाट मचाते। सुबह जब बहू की विदाई होती तो गहनों से सजी दुल्हन को रास्ते में अगवा करने का खतरा बना रहता, जिसकी वजह से लोगों ने शादियों में हथियार और बंदूक ले जाना शुरू कर दिया।
बंदूक लेकर चलने का मकसद चोर और डकैतों को बताना था कि हमारे पास ढेर सारा असलहा, बम-बारूद है। हमसे भिड़ने की कोशिश न करें हम जवाबी कार्रवाई करने की हिम्मत रखते हैं।
सुरक्षा के लिए आतिशबाजी
मोहन बाबा कहते हैं-अब बात आती है पटाखों की। बंदूक आज की तरह पहले भी बहुत महंगी थी। जो लोग बंदूक रखने में सक्षम नहीं थे उन्होंने पटाखों का इस्तेमाल करना शुरू किया। दूसरी वजह ये थी कि पहले आने-जाने के साधन ज्यादा नहीं थे और बारात को एक जगह से दूसरे जगह जाने में कई दिन लग जाते। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अमीरों ने बंदूक का सहारा लिया और गरीबों ने पटाखों का। यहीं से बारूदी चलन शादियों का हिस्सा बन गया।
हर्ष फायरिंग और हवाई फायरिंग में क्या फर्क है?
हर्ष फायरिंग को अंग्रेजी में सेलेब्रेटरी गनफायर कहते हैं। खुशी और त्योहार के मौके पर हर्ष फायरिंग की जाती है। अमेरिका जैसे देशों में क्रिसमस और न्यू ईयर के मौकों पर फायरिंग का चलन है। भारत में अक्सर शादी के मौकों पर फायरिंग की जाती है।
वहीं हवाई फायरिंग सुरक्षा के लिए की जाती है, जबकि हर्ष फायरिंग जश्न के मौके पर की जाती है। हर्ष और हवाई फायरिंग को ग्रैफिक के जरिए समझते हैं। हर्ष और हवाई फायरिंग दोनों तरह की फायरिंग गैर-कानूनी है। लेकिन गोलियां चलाकर जश्न मनाने में दूल्हे और उसके दोस्त ही नहीं, बल्कि लड़की वाले भी पीछे नहीं हैं।
कई बार तो खुद महिलाएं हर्ष फायरिंग करती नजर आती हैं। पिछले साल अप्रैल में यूपी के हाथरस का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें स्टेज पर बैठी दूल्हन ताबड़तोड़ गोलियां चलाती देखी गई।
संभल कर कहीं गोली न लग जाए
हर्ष फायरिंग को लेकर बिहार के आकड़े चौकाने वाले हैं। पिछले दो साल में हर्ष फायरिंग में 17 लोगों की जान जा चुकी है जबकि 199 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस मुख्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2022 में हर्ष फायरिंग के 99 मामले दर्ज किए गए जिसमें आठ की मौत हुई और 36 लोग जख्मी हो गए।
इस दौरान 127 गिरफ्तार किए गए। वहीं 18 हथियार भी जब्त किए गए जिनमें आठ के लाइसेंस रद्द हुए। 2023 में मई तक हर्ष फायरिंग के 38 केस दर्ज हुए, जिनमें नौ की जान चली गई और 13 घायल हुए। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 72 लोगों को गिरफ्तार किया है। तीन हथियार जब्त किए जबकि एक का लाइसेंस रद्द किया गया।
फायरिंग से बारातियों को हुई स्किन एलर्जी
हर्ष फायरिंग में जान का खतरा तो रहता ही है। लेकिन बारातियों में मौजूद कुछ शरारती तत्व ऐसी जगह फायरिंग कर देते हैं जिससे पेड़ पौधों को भी नुकसान होता है। ऐसा ही एक मामला अजमगढ़ में देखा गया जहां इलाहाबाद से आए बरातियों में द्वाराचार के दौरान आस-पास लगे पपीते के पेड़ों पर जमकर फायरिंग की जिसकी वजह से पपीते के फल बर्बाद हुए।
साथ ही कच्चे पपीते के दूध के छींटे लोगों पर पड़े। ड्रेस खराब होने के साथ कई लोगों को स्किन एलर्जी भी झेलनी पड़ी। पुलिस इंस्पेक्टर रजनी सुलभ सिंह कहती हैं कि भले ही कई मौकों पर पुलिस और सुरक्षा बलों को हवा में गोलियां चलानी पड़ती है, लेकिन आम लोग उनसे अपनी तुलना नहीं कर सकते।
कानून की नजर में हवाई फायरिंग और हर्ष फायरिंग अलग-अलग हैं। कानून अपनी या दूसरों की जान बचाने के लिए हवा में गोली चलाने की तो अनुमति देता है, लेकिन जश्न मनाने के लिए नहीं।
हर्ष फायरिंग करने वालों पर गृह मंत्रालय ने सख्त रुख अपनाया है। ऐसे मामले में 2 साल की सजा और 1 लाख तक का जुर्माने का प्रावधान है। आर्म्स एक्ट 1959 में बदलाव कर हर्ष फायरिंग के खिलाफ सख्ती बढ़ाई गई। सार्वजनिक समारोह, धार्मिक स्थल, शादी की पार्टियों पर हर्ष फायरिंग करने पर सख्त सजा का प्रावधान है।
नया मसौदा
शादी के फंक्शन में हर्ष फायरिंग की परंपरा रही है। ऐसे मौकों पर की जाने वाली इस फायरिंग में कई बार लोगों की जान तक चली गई है।
कुछ घटनाएं तो ऐसी भी हुई हैं जिनमें हर्ष फायरिंग ने दूल्हा, दुल्हन या किसी करीबी रिश्तेदार की जान ली है। आर्म्स एक्ट 1959 में संशोधन का ड्राफ्ट साल 2019 में सामने आया। नए नियम के तहत एक मौके विशेष पर सिर्फ 1 ही हथियार रखा जा सकेगा। ड्राफ्ट में लाइसेंस की अवधि को 3 साल से बढ़ाकर 5 साल करने का प्रस्ताव है।
झूठी शान से जान पर बन आई
मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चम्बल इलाके में पुलिस और प्रशासन की सख्ती के बावजूद हर्ष फायरिंग का जानलेवा शौक जारी है। सितंबर 2023 का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें एक युवक भीड़भाड़ भरे समारोह के बीच रायफल से हवाई फायरिंग करते नजर आ रहा है।
भीड़ के बीच बैठा युवक माउजर रायफल लेकर खड़ा होता है और बंदूक की नाल ऊपर करके ताबड़तड़ फायरिंग शुरू कर देता है।
वहां कुर्सियों पर बैठे लोगों के चेहरे पर साफ दहशत नजर आ रही है, लेकिन वहां बैठा कोई भी व्यक्ति हर्ष फायरिंग रोकने की बात कहने की हिम्मत नहीं कर पा रहा। अक्सर ऐसी फायरिंग जानलेवा साबित होती है। बेहतर होगा कि खुशी के मौके पर फायरिंग से बचें और खुशियों को कायम रखें।


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