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5.56 करोड़ रुपए की वित्तीय अनियमितता की दोषी डॉ. मधुलिका की पेंशन रुकी

बिलासपुर/ कोविड महामारी के बाद से जिले का स्वास्थ्य विभाग काम से ज्यादा भ्रष्टाचार, धांधली और मनमानी के लिए चर्चा में रहा है। पूर्व सिविल सर्जन डॉ. मधुलिका सिंह पर डीएमएफ से डाक्टरों की मनमानी भर्ती, गड़बड़ी के आरोप लगे। डॉ. मधुलिका द्वारा डीएमएफ से एक डेंटिस्ट की फर्जी भर्ती, फिर निष्कासन, दोबारा भर्ती के आरोप लगे। इसकी शिकायत पर तब शासन ने कार्रवाई नहीं की। अब डॉ. मधुलिका के रिटायरमेंट के बाद से कर्मचारी संघ द्वारा की जा रही शिकायत पर कार्रवाई हुई है। फिलहाल उनके पेंशन पर रोक लगाने का आदेश जारी हुआ है। प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ की शिकायत पर आखिरकार डॉक्टर मधुलिका सिंह पर कार्रवाई की गई है।

बिलासपुर में सिविल सर्जन के पद पर रहते हुए डॉ. मधुलिका के खिलाफ जीवनदीप समिति मद में गड़बड़ी की शिकायत की गई थी। अब संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं द्वारा डॉ. मधुलिका को 5 करोड़ 56 लाख सात हजार 613 रुपए की वित्तीय अनियमितता का दोषी पाते हुए उनके पेंशन प्रकरण के निराकरण पर रोक लगा दी है। मामला 2008-9 से 2015-16 के बीच का है। तब डॉ. मधुलिका बिलासपुर जिला चिकित्सालय में सिविल सर्जन थीं। रायगढ़ जिले में भी सीएमएचओ रहते हुए डॉ. मधुलिका पर मनमानी भर्ती, मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिनिक योजना में धांधली जैसे आरोप लगते रहे।

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