चेहरा देखने के लिए 4.5 लाख रुपए का आईना
जयपुर/ एक ऐसा कमरा जहाँ सभी फर्नीचर सोने के, कमरे में है 400 किलो वजन का पलंग, 60 लाख रुपए के पलंग में सोने-चांदी का काम है। चेहरा देखने के लिए 4.5 लाख रुपए का आईना। टाइम देखने के लिए 4.80 लाख रुपए की घड़ी, 35 लाख की ऑफिस टेबल और 30 लाख का ड्रेसिंग टेबल। ये सब देखने को मिल रहा है गुरुवार से जयपुर में शुरू हुए इंडिया स्टोन मार्ट में। यहां के हॉल नंबर 1 में स्टॉल नंबर 37 में बना है राॅयल बेडरूम।
सोने और चांदी का ही इस्तेमाल
बेडरूम के हर आर्टिफैक्ट्स को बनाने में 250 से 300 ग्राम 24 कैरेट सोने और करीब 350 ग्राम चांदी का इस्तेमाल हुआ है।
बारीक काम के कारण एक पीस बनने में महीनों लग जाते हैं। ड्रेसिंग टेबल को बनने में करीब 8 महीने का समय लगा है। फायर प्लेस 6-7 महीने में तैयार हुआ है। इसका वजन 100 किलोग्राम के आस पास है। ईगल टेबल में लाइट रशियन मेलाकाइट पत्थर का इस्तेमाल हुआ है।
विवेक तोतला मिडिल क्लास फैमिली से थे। पिता शिव कुमार जयपुर स्थित NBC कंपनी में जॉब करते थे। मां सरिता माहेश्वरी स्कूल में टीचर थीं।
21 साल की उम्र में विवेक की बैंक ऑफ पंजाब में हाउसिंग फाइनेंस मैनेजर की जॉब लग गई थी। मिडिल क्लास फैमिली के लिए बैंक में मैनेजर की पोस्ट पर जाॅब लगनी बड़ी बात थी। प्रोबेशन पीरियड में 27 हजार रुपए सैलरी मिल रही थी। पूरा परिवार खुश था, लेकिन विवेक खुश नहीं थे। क्योंकि उनका इरादा अपना बिजनेस शुरू करने का था। उन्होंने परिवार को अपने सपने के बारे में बताया और जाॅब छोड़ दी।
जॉब छोड़ी तो रिश्तेदारों का रिएक्शन मायूस करने वाला था। विवेक बताते हैं- जिन रिश्तेदारों-पड़ोसियों ने जॉब लगने की बधाई दी थी, वही मेरे पिता को ताने देते थे। यहां तक कहा था- तुम्हारा बेटा बेवकूफ है। विवेक इन तानों से नहीं घबराए। जाॅब छोड़ने के बाद उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशल टेक्नोलॉजी से डिजाइनिंग का कोर्स किया और इंटीरियर स्टोन डिजाइनिंग के काम से जुड़ गए। इसके बाद धीरे-धीरे उन्हें कुछ बड़े प्रोजेक्ट्स के काम मिलने शुरू हो गए।
विवेक ने बताया कि साल 2015-16 में मक्का मस्जिद के काम के दौरान बिन लादेन ग्रुप के मालिकों ने उन्हें रशियन आट्र्स वाले मेलाकाइट स्टोन डिजाइन दिखाए। उन्होंने उनसे कहा कि क्या वो ऐसे आइटम बना सकते हैं? रशिया से इन्हें खरीदना बेहद महंगा हो रहा था। लादेन ग्रुप के इस सवाल और आइडिया ने विवेक की जिंदगी बदल दी। विवेक ने कई महीनों तक रशियन आर्ट को स्टडी किया। इसके बाद मेलाकाइट स्टोन को छांटने में भी लंबा टाइम लगा। डिजाइनिंग में पहले से ही मास्टरी थी तो इसमें ज्यादा तकलीफ नहीं हुई।
लेकिन सबसे बड़ी समस्या इस के लिए ट्रेंड टीम को बनाने में हुई। एक बार सब कुछ होने के बाद जयपुर में वर्कशॉप का सेटअप किया गया। आज इसी वर्कशॉप में दुनिया के सबसे महंगे लग्जरी एंटीक और यूनिक मेलाकाइट स्टोन प्रोडेक्ट बनाए जा रहे हैं।
80 से 90 फीसदी काम हाथों से करना होता है
इस स्टोन को हीलिंग स्टोन भी कहा जाता है। यह थेरेपीज में काम आता है। शरीर के चक्रों को संतुलित करने में मदद करता है, लेबर पेन में आराम देता है। डिप्रेशन, नींद, एंग्जायटी, निगेटिव एनर्जी और कुछ रोगों के इलाज में काम आता है।
80 से 90 फीसदी काम विवेक की टीम हाथों से करती है। बड़े पीस बनाने में तीन महीने से एक साल तक का समय लगता है। विवेक का कहना है कि राडो की घड़ी, महंगी कार, आईफोन में इंवेस्ट करने में जहां उनकी वैल्यू समय के साथ कम होती जाती है, वहीं मेलाकाइट से बने इन डिजाइंस समय गुजरने के साथ मंहगे हो जाते हैं।
इन पत्थरों को डिजाइन के अनुसार ढालने और फिनिशिंग देने के लिए खास देसी जुगाड़ वाले हैंड टूल्स भी विवेक ने डेवलप किए हैं। दावा है कि देश में अभी विवेक ही मेलाकाइट स्टोंस में इस तरह का एक्सपेरिमेंट कर रहे हैं। उनकी बनाई किसी भी डिजाइन की पूरी दुनिया में कोई दूसरी नकल या सेकंड कॉपी नहीं है।
इस साल के आखिर तक मेलाकाइट के अलावा लूपिस लजूली, टाईगर आई, रोज क्वार्ट्ज, सोडालिथ, मदर ऑफ पर्ल, क्रिस्टल, टरकॉइज, लैपिस और अमेथिक जैसे सेमी प्रीशियस और प्रीशियस स्टोंस में भी 200 से ज्यादा लो प्राइस रेंज एक साथ लाएंगे। इसे मिडिल क्लास को ध्यान में रखकर तैयार कर रहे हैं। इनकी कीमत एक हजार रुपए से शुरू होकर पांच हजार रुपए तक होगी।
विवेक का कहना है कि वह एक पूरी कार मेलाकाइट स्टोन से डिजाइन कर सकते हैं। बॉथरूम, वॉल पैनल्स, किचन, ड्रॉइंगरूम, बेडरूम, विला, बंगलो और मंदिर तक इसमें ढाल सकते हैं।
विवेक ने वास टेबल को 70 हजार से डेढ़ लाख मेलाकाइन पत्थरों के टुकड़ों को बहुत बारीक काम के जरिए जोड़कर मैटलिक फिनिश दिया है। इसी तरह ड्रेसिंग टेबल और बेड भी 1 लाख से 2.50 लाख मेलाकाइट स्टोन को जोड़कर बनाया है।
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