नागरिक आपूर्ति निगम:- बिना ठोस वजह 3 साल के लिए ब्लैक लिस्ट कर दिया गया था अनुबंधित फर्म को, संचालक पर 50 हजार जुर्माना
कोरबा/ मजदूर आपूर्ति के लिए अनुबंधित की गई फर्म को बिना किसी ठोस वजह के 3 साल के लिए ब्लैक लिस्ट करने व अमानत राशि 16 लाख रुपए जब्त कर लेने के आदेश को हाई कोर्ट ने निरस्त करते हुए नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंध संचालक पर 50 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया है। फर्म को ब्लैक लिस्ट से बाहर करने व जब्त अमानत राशि की वापसी का भी आदेश दिया है।
मामला नागरिक आपूर्ति निगम, कोरबा का है। विभाग के जिला प्रबंधक के अधीन ट्रांसपोर्ट कंपनी की संचालक कविता जैन निवासी मेन रोड कोरबा द्वारा अनुबंध किया गया था। अनुबंधित फर्म लोडिंग व अनलोडिंग के लिए मजदूरों की आपूर्ति के व्यवसाय में लगी हुई है। राज्य नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड के द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 के लिए खाद्यान्न परिवहन एवं लोडिंग-अनलोडिंग के लिए मजदूरों की आपूर्ति के लिए निविदा के क्रम में याचिकाकर्ता कविता जैन के पक्ष में 19 अगस्त 2021 को कार्यादेश जारी किया गया और 26 अगस्त 2021 को दोनों पक्षों में समझौता हुआ। अनुबंध अवधि तक कार्य सफलतापूर्वक हुआ, प्रबंध संचालक नागरिक आपूर्ति निगम की सहमति से समझौता 3-3 महीने के लिए बढ़ाते हुए नए ठेकेदार की नियुक्ति तक कार्य दिया गया।
वर्ष 2022 में 4 से 6 अक्टूबर के बीच नवरात्रि व दशहरा के कारण मजदूर, हमाल नहीं आने की सूचना विभाग के आदेश के संबंध में फर्म द्वारा दी गई थी। जिला प्रबंधक नान ने 1 नवंबर 2022 से तीन महीने की अतिरिक्त अवधि के लिए अनुबंध बढ़ाने का प्रस्ताव दिया जिसमें पुराने दर पर मजदूर नहीं मिलने का हवाला देकर अनुबंध करने से इंकार कर दिया। मजदूरों की आपूर्ति करने में विफल रहने व समझौते का हवाला देकर खामियों के लिए नोटिस जारी कर 20 दिसंबर 22 को प्रबंध संचालक ने 16 लाख रुपए की सुरक्षा राशि और 3 साल की अवधि के लिए फर्म को ब्लैक लिस्ट करने का आदेश जारी किया । कविता जैन ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई।
जहां अधिवक्ता मनोज परांजपे ने पक्ष रखते हुए तथ्यों से अवगत कराया। पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने पाया कि प्रबंध संचालक के द्वारा दिया गया आदेश गलत होना पाया। प्रबंध संचालक द्वारा पारित आदेश को निरस्त करते हुए 50 हजार अर्थदंड के रूप में क्षतिपूर्ति का भुगतान का आदेश दिया गया।
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