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14 अपात्र हितग्राहियों को बाँट दिया ई-रिक्शा, रिकवरी के लिए नोटिस जारी

जांजगीर चंपा/ जिला श्रम कार्यालय में ई-रिक्शा घोटाले का मामला सामने आया है। यह घोटाला वर्ष 2018 में हुआ था। जिसमें तत्कालीन श्रमपदाधिकारी ने पद का दुरुपयोग करते हुए ऐसे 14 अपात्र हितग्राहियों को ई-रिक्शा प्रदान कर दिया था। मामले की शिकायत होने पर जांच हुई और मामला सही पाया गया।

इसके बाद अधिकारियों की टीम ने ऐसे 14 लोगों को रिकवरी के लिए नोटिस जारी किया है। जिसमें तीन लोगों से रिकवरी की कार्रवाई हो चुकी है। 11 अपात्र हितग्राही रिकवरी के लिए आनाकानी कर रहे हैं। जिन्हें लगातार नोटिस जारी किया जा रहा है।

आपको बता दें कि वर्ष 2018 में तत्कालीन जिला श्रम पदाधिकारी वीआर पटेल ने श्रम योजनाओं का लाभ देते हुए जिले के 130 हितग्राहियों को ई-रिक्शा प्रदान किया था। 130 हितग्राहियों में 116 हितग्राही ही पात्र पाए गए थे। शेष 14 हितग्राही ऐसे थे जिन्होंने कूटरचना करते हुए दिव्यांग बन गए और योजना का लाभ लेते हुए ई-रिक्शा उठा लिए थे। इसके बाद कुछ लोगों को इसकी भनक लगी तो उन्होंने मामले की शिकायत राज्य स्तर पर कर दी। राज्य स्तर से मौजूदा श्रम पदाधिकारी को मामले की जांच का जिम्मा सौंपा।

जांच में इस बात की पुष्टि हो गई कि वास्तविक में 14 हितग्राही ऐसे थे जो किसी भी दृष्टिकोण से दिव्यांग नहीं थे और तत्कालीन अधिकारियों से मिलीभगत कर योजना का लाभ उठा लिया था। इसके बाद ऐसे अपात्र हितग्राहियों को जिला श्रमपदाधिकारी ने नोटिस जारी कर तलब किया है। जिसमें अब तक 3 हितग्राहियों ने सरेंडर कर दिया है। शेष 11 हितग्राही ऐसे हैं जिन्हें नोटिस का असर नहीं हो रहा है। इसके लिए जिला श्रमपदाधिकारी ने विधिसंमत कार्रवाई के लिए आवश्यक कदम उठा रहे हैं।

श्रम कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार 130 हितग्राहियों को दो तरह का ई-रिक्शा उपलब्ध कराया गया था। एक की कीमत डेढ़ लाख तो दूसरे किस्म के रिक्शे की कीमत दो लाख रुपए तक की थी। प्रत्येक रिक्शे में हितग्राहियों को 50 हजार रुपए की सब्सिडी मिलनी थी। बाकायदा सभी हितग्राहियों ने सरकार की छूट का भरपूर लाभ उठाया। इसलिए सरकार छूट के अंतर की राशि को ही रिकवरी करना चाह रही है। क्योंकि रिक्शे के वास्तविक कीमत को हितग्राही सरकार के खाते में जमा कर चुके हैं। इसलिए उससे केवल 50 हजार रुपए की ही रिकवरी होगी।

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