एक युवक ने रेलवे लाइन के आगे दे दिया धक्का, कट गए दोनों पैर- हाथ, दे रही है 12वीं की परीक्षा, बनना चाहती हैं डीएम
बरेली/ मेरी जिंदगी छोटी नहीं है, मैंने ठीक से चलना ही सीखा था। पढ़कर अधिकारी बनने की चाह थी। हाईस्कूल में 87% नंबर आए, तो गांव में बधाई देने वालों की लाइन लग गई। घर में माता-पिता खुशी से मिठाई बांट रहे थे। जिंदगी में डीएम बनने का सपना लिए सुबह स्कूल जाती…दोपहर को छुट्टी के बाद कोचिंग जाती।
लेकिन मेरी जिंदगी में 10 अक्टूबर, 2023 को वह मनहूस दिन आया, जिसने मेरी और मेरे माता-पिता की जिंदगी को झकझोर कर रख दिया। शाम को कोचिंग से घर लौट रही थी, तभी गांव के रहने वाले एक युवक ने मुझे रेलवे लाइन के आगे धक्का दे दिया।
फिर अस्पताल में जब होश आया, तब मम्मी की आंखों में आंसू थे। जैसे ही मैंने बोला, तो पापा की आंखों से आंसू आने लगे। मेरे दोनों पैरों और बाएं हाथ पर पट्टी बंदी थी। जो उस हादसे में कट गए थे। ये शब्द उस 17 साल की लड़की के हैं…जिसे एक बदमाश ने ट्रेन के आगे फेंक दिया था।
17 साल की छात्रा कोचिंग पढ़कर अपने घर जा रही थी। तभी रास्ते में गांव के रहने वाले विजय मौर्या ने छात्रा को रोक लिया। छात्रा उसे नजरअंदाज कर आगे बढ़ गई। विजय उसकी हरकत से नाराज हो गया कि छात्रा को ट्रेन की पटरी पर फेंक दिया।
तभी ट्रेन आ गई और उसके ऊपर से गुजर गई। छात्रा 2 महीने तक अस्पताल में भर्ती रही। तीन ऑपरेशन हुए। छात्रा घर आई, तो वो अपने आप कुछ कर नहीं सकती थी। माता-पिता के सहारे सारे काम करने पड़ रहे थे। पढ़ने में काफी होनहार थी, तो कुछ करने का जज्बा हमेशा बना रहता था। धीरे-धीरे कुछ सुधार हुआ, तो 12वीं की परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। अब छात्रा एक हाथ से साइंस सब्जेक्ट से 12वीं की परीक्षा दे रही है।
छात्रा बताती है हादसे के बाद 22 फरवरी को उसका 12वीं का पहला पेपर था। सेंटर बरेली के झुमका तिराहा स्थित इंटर कॉलेज में है। एग्जाम हॉल में एंट्री की, तो सब उसे देख रहे थे। उसने अपनी कॉपी पर नाम और रोल नंबर लिखकर सबसे पहले लाइन खींचनी शुरू की। जिससे कॉपी दिखने में अच्छी लगे और अच्छे नंबर आएं। कॉपी को कटे हुए पैर से दबाया, फिर सीधे हाथ से स्केल से लाइन खींची। यह सब क्लास में मौजूद टीचर देख रहे थे। सभी छात्रों की नजर भी उसकी तरफ थी।
उसने किसी से हेल्प लेने का कोई प्रयास नहीं किया। पूरे सवा 3 घंटे में पेपर लिखा। छात्रा ने कोशिश की, जो लिखा अच्छा और साफ लिखा। क्योंकि इंटर बोर्ड परीक्षा के नंबर उसके आगे के करियर में काफी मदद करेंगे। पेपर देने के बाद छात्रा ने घर आकर अपने प्रश्न पत्र का मिलान भी किया। जिसमें उसे लगा कि शायद पांच नंबर का एक सवाल गलत हो गया है।
छात्रा बताती है कि जब वो प्रैक्टिकल देने गई, तो मम्मी-पापा मुझे लेकर गए थे। मैंने सर और मैम से नमस्ते कहा, तो वो मुझे देखकर भावुक हो गए। मुझसे हालचाल पूछा और चुप हो गए। मेरा प्रैक्टिकल भी जल्दी हो गया। इसके बाद अपने दोस्तों से मुलाकात की, तो उनकी आंखों में आंसू आ गए।
वे मुझे देखने मेरे घर भी आए थे। अन्य छात्र भी चुप रहे। मेरे मम्मी-पापा मुझे फिर कार से घर ले आए। फिलहाल बोर्ड के पहले पेपर में कोशिश की है कि पेपर बहुत अच्छा हो। हादसे के बाद यह पहला पेपर है। क्योंकि हादसे साढ़े 3 महीने हो चुके हैं। लेकिन अब मैं पहले जैसी स्थिति में नहीं हूं, बस सीधा हाथ ही बचा है।
सरकार मदद कर दे, तो दोनों पैर लग जाएंगे
छात्रा ने बताया कि अभी मुझे बहुत कुछ करना है। बस सरकार से यही अपील है कि दोनों पैर लग जाएं। पिता के साथ बरेली में जिला विकलांग अधिकारी के पास जाते हैं। उनका बहुत अच्छा व्यवहार है। इससे पहले बरेली के DM रविंद्र जी के पास भी पापा के साथ गए थे।
डीएम सर मीटिंग छोड़कर बाहर आए, उन्होंने मुझे पहचान लिया। मुझे देखा और हालचाल पूछा। उन्होंने पूछा कि पेपर शुरू हो गए? मैंने कहा कि सर एक पेपर हुआ है। उन्होंने शाबाशी देते हुए परेशानी होने पर कॉल करने को बोला। नकली पैर के लिए बहुत पैसे लगेंगे, बस सरकार इसमें मदद कर दे।
एक दिन लोग मेरी काययाबी को याद करेंगे
छात्रा कहती हैं कि मेरे जो सपने थे, वो अभी जिंदा हैं। 12वीं करने के बाद आईएएस की तैयारी करूंगी। इसके साथ ही बाकी तैयारी भी करते रहूंगी। मैं कुछ बनकर ही दिखाउंगी। जिससे मेरे जैसे और लोगों को हौसला मिलता रहे। किताबें ही मेरे लिए सब कुछ हैं। किताबें ही मेरी दोस्त हैं, अब उन्हीं से करियर बनाऊंगी।
जब इस स्थिति में संघर्ष करके जीत गई, तो आगे भी मुझे सफलता मिलेगी। मैं यही कहना चाहूंगी कि जो जीवन एक बार मिला है, संघर्ष ही जीवन है। मैं सब कुछ देख चुकी हूं। रात में सोती हूं, तो किताबें पास में रहती हैं। एक दिन लोग मेरे हादसे को ही ध्यान में नहीं रखेंगे, बल्कि मेरी सफलता को भी ध्यान रखेंगे।
हादसे के वक्त सरकारी नौकरी की बात कही गई
छात्रा के पिता बताते कि प्रशासन ने हमारा बहुत साथ दिया है। मेरी बेटी को पैर लग जाएं। मैं इस मामले में डीएम साहब से भी मिला। पैर लगने का खर्च 15 लाख रुपए के आसपास का है। बेटी के इलाज में 8 लाख रुपए खर्च हुआ है।
इसमें 5 लाख रुपए का भुगतान आयुष्मान कार्ड से हुआ है। सरकार द्वारा 5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी गई। बाकी उनसे इलाज में खर्च हो चुका है। बिटिया के लिए सरकारी नौकरी की घोषणा हादसे के समय की थी, इसी साल बेटी 18 साल की उम्र पूरी कर लेगी। जिसके बाद बेटी को सरकारी नौकरी लग जाए।
हादसे के बाद भी पढ़ाई नहीं छोड़ी
छात्रा की मां का कहना है कि बेटी ही उनके लिए सब कुछ है। इस हादसे को 4 महीने हो गए हैं। मैं तब से एक मिनट भी बेटी को छोड़कर कहीं नहीं जा सकी। बेटी एक भी आवाज देकर मम्मी कहती है, तो मैं सामने मिलती हूं। भगवान ने जो लिखा था वह हो गया, फिर भी बेटी की जान बच गई यही बहुत है।
बेटी ने इतना सब झेलने के बाद भी पढ़ाई नहीं छोड़ी है। जब भी देखती हूं तो कभी कॉपी पर लिखती रहती है, तो कभी पढ़ते हुए दिखती है। बच्चों के लिए मां-बाप ही सहारा होते हैं। जब तक हम हैं तब तक सुई जैसी परेशानी नहीं होने देंगे।
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