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मच्छर क्वॉइल 100 सिगरेट जितनी खतरनाक, कैंसर और कई बिमारियों का खतरा, जानें बचने के तरीके

किचन का धुआं शरीर के लिए आफत बन रहा है, चाहे वो मिट्‌टी का चूल्हा हो या एलपीजी से जलने वाला चूल्हा। इनसे न सिर्फ फेफड़े, बल्कि दिल और दिमाग भी बीमार हो रहे हैं। और तो और घर में मच्छरों को भगाने वाली क्वॉइल भी जाने-अनजाने जानलेवा बन रही है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक क्वॉइल 100 सिगरेट पीने जितनी खतरनाक है।

हाल ही में IIT मंडी की एक रिसर्च में पारंपरिक तरीके से खाना बनाने के तरीके के नुकसान पर बात की गई है। इसके मुताबिक लकड़ी और उपले के इस्तेमाल से खाना बनाने में जो धुआं निकलता है, उससे इनडोर पॉल्यूशन होता है। चूंकि गांवों में आज भी आमतौर पर महिलाएं खाना बना रही हैं तो उनकी सेहत पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ता है। वहीं, एलपीजी से जलने वाले चूल्हे से भी वायु प्रदूषण की बात कही गई है। इसके चलते रेस्पिरेटरी डिजीज, कार्डियोवैस्कुलर डिजीज और लंग कैंसर का खतरा बढ़ रहा है।

आमतौर पर लोग सिगरेट के धुएं और वायु प्रदूषण को सेहत के लिए हानिकारक मानते हैं, लेकिन हमारा किचन भी कम बीमारियां नहीं देता है। गांव या दूर दराज के इलाकों में खाना बनाने के लिए इस्तेमाल हो रही लकड़ी और उपले से निकलने वाला धुआं धीरे-धीरे हमें मौत की तरफ ले जाता है।

वहीं एलपीजी गैस को जलाने से निकल रहीं कई खतरनाक गैस भी गंभीर बीमारियों की वजह बनती हैं। इन्हें लेकर कई रिसर्च भी सामने आई हैं। आइए विस्तार से समझते हैं।

कौन सा धुँआ कितना खतरनाक है

रिसर्च के मुताबिक भारत के पूर्वोत्तर राज्यों जैसे- असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश के लोगों को सांस, कैंसर और फेफड़ों की बीमारियों का खतरा ज्यादा है, क्योंकि दूर-दराज के इलाकों में एलपीजी या दूसरे कम नुकसानदेह ईंधनों की पहुंच उतनी सुलभ नहीं है।

ऐसा नहीं है कि एलपीजी के धुएं से कोई नुकसान नहीं होता है, लेकिन आईआईटी मंडी के रिसर्चर्स ने अपनी शोध में पाया है कि लकड़ी या उपलों से निकले वाला धुआं इसकी अपेक्षा 57 गुना अधिक नुकसानदायक है। इस रिसर्च के मुताबिक पूर्वोत्तर राज्यों में आज भी 50% आबादी खाना बनाने के लिए पारंपरिक ईंधनों पर ही निर्भर है।

इसके चलते इन घरों में बेहद हानिकारक गैस एयरोसोल की मात्रा बहुत अधिक हो जाती है। यह सीधे श्वसन तंत्र और फेफड़ों को प्रभावित कर रही है। रिसर्च के मुताबिक एयरोसोल गैस का 29 से 79 फीसदी हिस्सा श्वसन तंत्र में ही जमा हो जाता है। इससे फेफड़ों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। इससे बचाव किया जा सकता है।

एलपीजी गैस के धुएं से होते ल्युकेमिया और लिंफोमा जैसे कैंसर

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च के मुताबिक एलपीजी गैस के चूल्हों से कई हानिकारक गैस निकलती हैं। इनसे सांस की बीमारियों के अलावा भी कई खतरनाक बीमारियां हो सकती हैं। इनसे ल्युकेमिया और लिंफोमा जैसे कैंसर होने का भी खतरा होता है। रिसर्च के मुताबिक एलपीजी गैस के चूल्हे का एक नॉब अगर 45 मिनट तक खुला रहता है तो इससे इतनी बेंजीन गैस निकलती है, जो एक सिगरेट के धुएं से निकलने वाली बेंजीन से कहीं ज्यादा होती है।

क्या है कार्सिनोजेन, कितना खतरनाक?

कार्सिनोजेन एक एक ऐसा सब्सटेंस है जो कैंसर का कारण बन सकता है। ये आमतौर पर सूरज की रोशनी में पराबैंगनी किरणों में होते हैं। इसके अलावा गाड़ियों से निकलने वाले धुएं और सिगरेट के धुएं में भी कार्सिनोजेन होता है। चितरंजन नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के पूर्व असिस्टेंट डायरेक्टर डॉ. मानस रंजन रे के मुताबिक ये खतरनाक सब्सटेंस लकड़ी और उपलों को जलाने पर निकलने वाले धुएं में भी होते हैं।

डॉ. रे के मुताबिक लकड़ी के जलावन वाले चूल्हे में 4 घंटे तक खाना पकाया जाए तो इससे निकलने वाला धुआं 10 से 100 सिगरेट के धुएं जितना खतरनाक होता है। इससे इनडोर पॉल्यूशन होता है, जिसके चलते घर में रह रहे लोगों की सेहत खतरे में पड़ती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की चिंता 

विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में हर साल 70 लाख से ज्यादा लोगों की मौत प्रदूषण से होती है। यह प्रदूषण वातावरण या हमारे किचन और मॉस्किटो क्वॉइल की वजह से भी हो सकता है। इससे मौतों के कई मामले सामने आ रहे हैं। इसमें WHO ने अस्थमा के अलावा अन्य 5 गंभीर बीमारियों को जिम्मेदार माना है।

निमोनिया

निमोनिया वैसे तो आम समस्या है, लेकिन इसे समय पर नियंत्रित न किया जाए तो वायु प्रदूषण के चलते काफी जोखिम भरा हो सकता है और मौत की वजह भी बन सकता है।

स्ट्रोक

हाल के वर्षों में स्ट्रोक के मामले तेजी से बढ़े हैं। इसके पीछे वायु प्रदूषण है। इसमें अगर घर का भी प्रदूषण शामिल हो जाए तो यह और खतरनाक हो सकता है।

लंग कैंसर

फेफड़ों के कैंसर को आमतौर पर सिगरेट के धुएं से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इस बीच हम चूल्हे से निकल रहे धुएं पर ध्यान ही नहीं दे पाते हैं।

हृदय रोग

आपके घर में हो रहा वायु प्रदूषण भी हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा रहा है। ज्यादा देर तक किचन में रहने से शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है जो आपके हृदय, मस्तिष्क और अन्य अंगों के लिए खतरा बनता है। इससे दिल का दौरा पड़ने की आशंका बढ़ जाती है।

स्किन संबंधी परेशानी

प्रदूषण के कारण स्किन से जुड़ी परेशानियां होने का खतरा भी बढ़ रहा है। चूंकि छोटे बच्चों की स्किन अधिक मुलायम और रिएक्टिव होती है तो उनमें इस तरह की समस्या काफी ज्यादा देखी जाती है। स्किन पर रैशेज, खुजली होने की आशंका रहती है। इसके अलावा स्किन कैंसर जैसी गंभीर समस्या भी हो सकती है।

एक मॉस्किटो क्वॉइल से 100 सिगरेट के बराबर धुआं निकलता है

ऐसा नहीं है कि सिर्फ चूल्हे से निकलने वाला धुआं ही हानिकारक है। अगर घर पर मच्छरों को भगाने के लिए क्वॉइल जलाते हैं तो आप कई बीमारियों को बुलावा दे रहे हैं। डॉ. रे के मुताबिक एक क्वॉइल जलाने से 100 सिगरेट के बराबर धुआं निकलता है।

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