अरपा भैंसाझार मुआवजा मामले में 10 करोड़ का घोटाला दो एस डी एम एवं दो एक्जीक्यूटिव इंजीनियर ने किया था
अब तक किसी पर कार्रवाई नहीं
बिलासपुर/ कलेक्टर के निर्देश पर 10 फरवरी को अरपा भैंसाझार के जिन मुआवजा मामलों के समाधान के लिए राजस्व और जल संसाधन विभाग के अफसरों की बैठक बुलाई गई है, उन मामलों की जांच जिला प्रशासन एक साल पूर्व करा चुका है। मामले में तीन एसडीएम और सिंचाई विभाग के पांच अफसरों के अलावा अन्य को दोषी पाया गया था। इसके बावजूद अब तक किसी पर कार्रवाई नहीं हुई ।
इस मामले में तत्कालीन कलेक्टर सारांश मित्तर ने विधानसभा में पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के निर्देश पर छह सदस्यीय जांच कमेटी बनाई थी। जांच रिपोर्ट में 1.9 किमी. नहर के लिए मुआवजा बांटने तत्कालीन एसडीएम, एसडीओ समेत 11 अफसरों ने 10.86 करोड़ रुपए का घोटाला किया था। अरपा भैंसाझार प्रोजेक्ट में राजस्व और जल संसाधन विभाग के 11 अफसरों ने मुआवजा बांटने में 10 करोड़ 86 लाख 44 हजार 846 रुपए की गड़बड़ी की। अफसरों ने उस जमीन का मुआवजा बांट दिया, जो नहर अलाइनमेंट के दायरे में है ही नहीं।
जांच रिपोर्ट में तत्कालीन कोटा एसडीएम आनंद रूप तिवारी, कीर्तिमान सिंह राठौर, तत्कालीन नायब तहसीलदार मोहर साय सिदार, तत्कालीन राजस्व निरीक्षक हुल सिंह, तत्कालीन पटवारी दिलशाद अहमद, मुकेश साहू के अलावा जल संसाधन विभाग के तत्कालीन कार्यपालन अभियंता आरएस नायडू, अशोक तिवारी, तत्कालीन एसडीओ तखतपुर राजेंद्र प्रसाद मिश्रा, आरपी द्विवेदी, उप अभियंता तखतपुर आरके राजपूत दोषी पाए गए थे।
- 9 जून 2021 को मुआवजे में गड़बड़ी को लेकर पवन अग्रवाल ने 13 बिंदुओं तत्कालीन कलेक्टर सारांश मित्तर से शिकायत की थी।
- 5 जुलाई 2021 को राजस्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल ने विधानसभा में इस मामले को लेकर जांच के आदेश दिए थे।
- 6 जुलाई 2021 को तत्कालीन कलेक्टर मित्तर ने तत्कालीन एडीएम उइके के नेतृत्व में 6 सदस्यीय टीम गठित की।
- 24 जुलाई 2021 करो जांच टीम ने प्रारंभिक जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपी थी और बताया गया कि बारिश के चलते जांच पूरी नहीं हुई है।
जांच में पाया गया कि 19 जुलाई 2019 से 21 जुलाई 2019 के बीच राजस्व भू पोर्टल के कंप्यूटर नक्शे में तत्कालीन पटवारी मुकेश साहू द्वारा खसरों का अवैध बटांकन किया था।
6 सदस्यीय जांच टीम में शामिल रहे ये अफसर जांच समिति में अतिरिक्त कलेक्टर आरए कुरूवंशी, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बिलासपुर श्रीकांत वर्मा, प्रभारी अधिकारी भू-अभिलेख वैभव क्षेत्रज्ञ,तत्कालीन कार्यपालन अभियंता खारंग जल संसाधन विभाग डी जायसवाल, अधीक्षक भू-अभिलेख बीएल कंवर, तहसीलदार सकरी राजेंद्र भारत शामिल थे।
इन किसानों की जमीन गायब प्रदीप मिश्रा, अशोक कुमार, कौशल समेत कई किसान ऐसे हैं, जिनकी जमीन का खसरा नंबर प्रारंभिक और अंतिम अधिसूचना में था, लेकिन मुआवजा पत्रक में गायब हो गया। मौके पर इनकी जमीन भी गायब हो गई है। रैकेट में शामिल लोग अब इनसे धमका-चमकाकर जमीन अपने नाम लिखवाना चाहते हैं।

टिप्पणियाँ