अजमेर/ अयोध्या में 22 जनवरी को राम मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा उत्सव है। इसे लेकर लोगों में उत्साह है। लोग अपने-अपने तरीके से इस ऐतिहासिक पल में अपना योगदान दे रहे हैं। अजमेर के आर्टिस्ट नितिन के.कृष्ण 21 जनवरी को अंडरवॉटर राम मंदिर और राम की पेंटिंग बनाएंगे।
अजमेर के तोपदड़ा क्षेत्र के रहने वाले नितिन के पिता कृष्ण कुमार रेलवे में नौकरी करने के साथ ही आर्टिस्ट भी थे। पिता को पेंटिंग करता देख नितिन को भी इसका शौक लग गया।
नितिन ने बताया- राम मंदिर बनने से बहुत खुश हूं। मैं इस उत्सव को सेलिब्रेट करना चाहता था। सोचा, क्यों न पेंटिंग के अपने हुनर से ही इस उत्सव का हिस्सा बनूं। इसलिए राम मंदिर और राम का चित्र बनाकर अपना योगदान दूंगा। नितिन ने कहा- 'सभी लोग अपने मन में श्री राम भगवान को खोजें और उन्हें महसूस करें।' नितिन ने बताया- जब मैंने अंडरवॉटर पेंटिंग बनाने के लिए ट्रेनिंग ली थी तो स्कूबा डाइविंग टीम कमर में 100-100 किलो वजन बांधकर मुझे पानी में उतारती थी ताकि मैं पानी के अंदर रहूं।
रिश्तेदार ताने देते थे
नितिन ने अपनी पूरी पढ़ाई अजमेर में ही की है। उन्होंने फाइन आट्र्स में मास्टर्स किया है। नितिन ने बताया- 5 साल की उम्र में खेलते-खेलते गिर गया था। मेरा हिप जॉइंट ब्रेक हो गया था। तब से मेरे पैर में प्रॉब्लम है। पहले चल भी नहीं पाता था। डॉक्टर को दिखाने के बाद चलना शुरू हो गया था। बचपन से रिश्तेदारों और लोगों के ताने मिले। सभी कहते थे- 'यह जिंदगी में क्या करेगा।'
बकौल नितिन- मैं अपने थॉट्स लोगों के साथ शेयर करता था। मेरे विचार लोगों से अलग हुआ करते थे। मैंने हमेशा उस चीज पर काम किया, जो आज तक किसी ने नहीं किया है। लोग मेरा मजाक उड़ाते थे। कहते थे- पागल है क्या। जब पहली बार अंडरवाॅटर पेंटिंग करने जा रहा था, तब लोगों ने काफी मजाक उड़ाया था। लोगों ने कहा था- पानी के अंदर कोई पेंटिंग बनती है क्या।
मैंने प्रयास किया और सफल रहा। अब तक मैं अंडरवाॅटर 7 से 8 पेंटिंग बना चुका हूं। वर्तमान में सचिवालय में कार्यरत हूं। मैं आधा समय अपनी जॉब को देता हूं और आधा समय आर्ट को देता हूं।
अपने नाम में पिता का नाम जोड़ा
नितिन ने बताया कि मैं बचपन से ही पिता के साथ पेंटिंग करता था। 2010 में हार्ट अटैक के कारण पिता का निधन हो गया। 2012 में मुझे इंटरनेशनल प्रोग्राम में एक सर्टिफिकेट देना था। सर्टिफिकेट में नाम लिखना था।
तब मन में ख्याल आया- मैं वह कर रहा हूं, जो मेरे पिता करना चाहते थे। इसके बाद सर्टिफिकेट में अपना नाम लिखा- नितिन के.कृष्ण। तब से पिता के सपने को अपने नाम के साथ जोड़ रखा है। इसके बाद मुझे एक नई ऊंचाई मिली है।
सबसे पहले टैटू आर्टिस्ट बना
2009 में शुरुआत बॉडी टैटू मेकिंग से की थी। बचपन से आर्ट फील्ड में रहने के कारण टैटू का शौक चढ़ा था। कैनवास पर पेंटिंग करते वक्त ज्यादा कमाई नहीं हो पाती थी। उस समय ट्रेडिंग में टैटू चल रहा था। अजमेर में उस वक्त कोई भी टैटू आर्टिस्ट नहीं था।
ऑनलाइन सामान मंगवाकर इस काम को शुरू किया था। टैटू का काम शुरू करने के बाद भी लोगों ने मजाक उड़ाया था। लोग कहते थे- टैटू के कारण लोग मर जाते हैं। शुरू से ही हाइजीन प्रक्रिया पर टैटू बनाता था।
100-100 किलो वजन के साथ समुद्र में उतारा
2017 में अंडरवॉटर जाकर पेंटिंग बनाने की शुरुआत की थी। नए साल को नए तरीके से सेलिब्रेट करने के लिए केरल जाकर हिंद महासागर के दृश्य को देखा। स्कूबा डाइविंग टीम से कॉन्टैक्ट किया। पहले तो टीम ने मना कर दिया। काफी मशक्कत के बाद मुझे स्कूबा डाइविंग की ट्रेनिंग दी गई। स्कूबा डाइविंग टीम ने मुझे काफी डराया था। मुझे पानी में तैरना नहीं, डूबना था।
मुझे कमर पर 100-100 किलो वेट बांधकर डुबाे दिया जाता था। सिर्फ इशारों से पानी के अंदर बात होती थी। पहले दिन पानी में रहकर करीब तीन से चार घंटे ट्रेनिंग की थी। समुद्र में जब पहली बार गया था, डर भी लगा था। सांस लेने में भी दिक्कत हो रही थी। नाक पैक होने के कारण मुंह से सांस लेनी पड़ रही थी। परिवार वालों ने कहा था- समुद्र में जाएगा, कोई शार्क आ गई तो खा जाएगी।
पहली बार 20 मिनट में बनाई अंडरवाॅटर पेंटिंग
स्कूबा डाइविंग टीम और अन्य लोगों की मदद से पहली बार करीब 15 से 20 मिनट में ऑयल कलर से कैनवास पर समुद्र के अंदर चित्र बनाया था। उस समय मैं 30 साल का था। अंडरवाॅटर पेंटिंग करने से पहले ही हमें चित्र को डिसाइड करना पड़ता है। सांस लेने में काफी दिक्कत होती है। टीम की ओर से ऑक्सीजन पाइप सेट किया जाता है। पानी में ज्यादा देर सोच नहीं सकते, कुछ बोल तक नहीं सकते हैं। शांति और सुकून में ही वहां पर पेंटिंग तैयार होती है।
इस दौरान 4 से 5 लोगों की टीम वहां होती है। जब पेंटिंग बनाकर समुद्र से बाहर आया, तब मुझे काफी अच्छा महसूस हुआ। मुझे पता चला कि इस तरह की पेंटिंग बनाने वाला मैं पहला शख्स हूं, जिसने भारत में अंदर अंडरवाॅटर पेंटिंग बनाई है। मैंने हिंद महासागर में 16 फीट गहराई में जाकर पहली पेंटिंग एक्वेटिक लाइफ पर बनाई थी। यह पेंटिंग वर्ल्ड आर्ट दुबई में एग्जीबिट हुई थी। कोविड के दौरान अर्थ डे पर 'मास्क पहने अर्थ' पेंटिंग बनाकर मास्क पहनने का संदेश दिया था। इस पेंटिंग के लिए 2021 में मुझे इंडिया और एशिया बुक रिकॉर्ड का प्राइज मिला था।
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