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चलते-फिरते, नाचते-गाते, हँसते-खेलते हो रही युवाओं को मौत, विशेषज्ञ बता रहे इसकी वजह

भोपाल/ 18 साल का राजा कोचिंग में बैठे-बैठे अपनी सीट से गिर पड़ा। दोस्त उसे अस्पताल ले गए, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। इसी तरह 35 साल के सेना के जवान विनोद शंकर को क्रिकेट खेलते हुए सीने में दर्द हुआ। परिजन उन्हें अस्पताल ले गए, लेकिन रास्ते में उन्होंने दम तोड़ दिया। ऐसे केवल दो मामले नहीं है। मध्यप्रदेश में पिछले दिनों इसी तरह चलते-फिरते, खेलते-कूदते हार्ट अटैक से हुई मौत के कई मामले सामने आए हैं।

मौत की ये कहानियां हार्ट अटैक का बेहद चौंकाने वाला रूप बता रही है। कम उम्र में अटैक दबे पांव आ रहा है। दैनिक भास्कर ने ऐसे 10 चौंकाने वाले मामलों की मेडिकल हिस्ट्री निकाली। परिजन से बात कर उनकी लाइफस्टाइल और मेडिकल हिस्ट्री को जाना। इसमें एक बात समान थी कि किसी को कोई बीमारी नहीं थी। 10 केस की मेडिकल हिस्ट्री निकालने के बाद हमने भोपाल के AIIMS और जेके अस्पताल के हार्ट स्पेशलिस्ट से बात भी की।

 भोपाल के दो मशहूर डॉक्टर डॉ. किसलय श्रीवास्तव (HOD कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट, AIIMS भोपाल), डॉ. जीसी गौतम, कॉर्डियोलॉजिस्ट, जेके अस्पताल से बात की। जिन्होंने हमारे हर सवाल का जवाब देते हुए बताया कि अचानक हंसते-हंसते, चलते-फिरते मौतें क्यों हो रही हैं?

  • स्मोकिंग और तंबाकू का चलन बढ़ा

जेके अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. जीसी गौतम कहते हैं कि पहले के मुकाबले युवाओं में हार्ट अटैक की सबसे बड़ी वजह लाइफ स्टाइल है। जितने भी युवा है, उनमें स्मोकिंग का चलन बढ़ा है। वे तंबाकू का भी इस्तेमाल करते हैं। ये हार्ट के लिए फायदेमंद नहीं है। साथ ही अनसैचुरेटेड फैट जैसे समोसे, कचोरी और तला हुआ खाना भी इसकी बड़ी वजह है।

ज्यादातर युवा घर के खाने की बजाय बाहर की चीजें ज्यादा खाते हैं। एक्सरसाइज बिल्कुल नहीं करते। वैसे भी सर्दी में हार्ट अटैक की समस्या ज्यादा होती है क्योंकि हार्ट वेसल्स में सिकुड़न होती है।

एक्सरसाइज करने वालों को क्यों आ रहा अटैक?

डॉ. जीसी गौतम कहते हैं कि हमारे हार्ट की आर्टरी के अंदर प्लाक होता है, इसे थक्का कहते हैं। एक स्टेबल प्लाक होता है, दूसरा अनस्टेबल होता है। अनस्टेबल थक्का किसी भी रिस्क फैक्टर से फट जाता है। आपने यदि हैवी एक्सरसाइज कर ली तो ये प्लाक उससे फटता है और आर्टरी में खून के प्रवाह को रोक देता है।

डॉ. गौतम कहते हैं कि जिन लोगों की फैमिली हिस्ट्री पॉजिटिव है यानी जिनके पेरेंट्स को 60 की उम्र के पहले अटैक आया है तो उनके बच्चों को अटैक आने के चांस ज्यादा होते हैं। इसके अलावा हायपरटेंशन, डायबिटीज, ओबेसिटी भी इसकी बड़ी वजह है। मोटापा बढ़ने के साथ-साथ एंग्जाइटी भी सबसे बड़ी वजह है। आज का युवा कम समय में ज्यादा हासिल करना चाहता है।

हार्ट अटैक की एक बड़ी वजह

भोपाल एम्स के डॉ. किसलय श्रीवास्तव कहते हैं कि विटामिन की कमी से हाइपरहोमोसिस्टीनेमिया होता है। ये होमोसिस्टीन एक अमीनो एसिड होता है, जो शरीर में बढ़ जाता है। इससे ब्लड क्लॉट के चांस बढ़ जाते हैं। अभी मैंने जांच में पाया है कि इसकी मात्रा लोगों के शरीर में बढ़ी हुई है। पहले ये 20 से 30 फीसदी होती थी, अब 80 से 90 फीसदी हो गई है। अब या तो ये विटामिन की कमी से है या फिर आनुवांशिक है। ज्यादा चांस विटामिन की कमी से लगते हैं। विटामिन की कमी दूर कर हम युवाओं को बचा सकते हैं।

बच्चों में भी हार्ट की समस्या क्यों आ रही है?

डॉ. किसलय श्रीवास्तव कहते हैं कि एक होता है हार्ट अटैक, जो नसों के ब्लॉक होने की वजह से होता है। दूसरा होता चैनलोपैथी, इसमें दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है। इसमें नसों का ब्लॉकेज नहीं होता। 10 से 15 साल की उम्र के बच्चों में हम जो हार्ट की समस्या देखते हैं, वो दिल की धड़कन अनियमित होने की वजह से है। अगर बच्चा बता रहा है कि उसे चक्कर आ रहे हैं, धड़कन तेज चल रही थी या उसके दोस्त कहते हैं कि एकदम बेहोश हो गया था। इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

फिट है और एक्सरसाइज करते हैं उन्हें भी प्रॉब्लम 

डॉ. किसलय श्रीवास्तव कहते हैं कि जो फिट रहते हैं, उन्हें समस्या कम होती है। जो लोग रेगुलर एक्सरसाइज करते हैं, उन्हें इसका फायदा निश्चित तौर पर मिलता है। हार्ट में यदि कोई छोटा सा अवरोध या ब्लॉकेज है, तो एक्सरसाइज से वो दूर हो सकता है, मगर उन्हें भी हार्ट प्रॉब्लम हो सकता है।

उनसे पूछा कि क्या कोविड भी इसकी वजह है तो उन्होंने कहा कि कोविड हर व्यक्ति को हुआ है और उसने नुकसान पहुंचाया है। वैक्सीनेशन की वजह से कोविड की तीव्रता कम हुई है। मैं वैक्सीनेशन को ब्लेम नहीं करूंगा। कोविड सभी को हुआ है। किसी को ज्यादा नुकसान किया है, किसी को कम नुकसान पहुंचाया है।

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