ब्लड शुगर का बढ़ना या घटना होता है हमारे खाने पर निर्भर, ग्लाइसेमिक इंडेक्स के अनुसार खाने से संतुलित रहेगा ब्लड शुगर
- मेडिकल साइंस में एक टर्म है- ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI इंडेक्स) क्या है?
हम जो भी भोजन करते हैं, उसके बाद ब्लड शुगर का स्तर बढ़ता है। सरल शब्दों में कहें तो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वह पैमाना है, जिससे हमें पता चलता है कि कोई भोजन या खाद्य पदार्थ कितनी तेजी से हमारे ब्लड शुगर लेवल को बढ़ाता है।
जैसे ग्लूकोज का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 100 है। ग्लूकोज पेट में जाते ही ब्लड शुगर को तुरंत बढ़ा देता है। वहीं हरी सब्जियों का GI इंडेक्स सबसे कम है। इसलिए उसे खाने के बाद ब्लड शुगर लेवल बहुत देर से और बहुत मामूली सा बढ़ता है।
ग्लाइसेमिक इंडेक्स पर जो खाद्य पदार्थ हाई रेटिंग वाले होते हैं, वह हाई कार्ब फूड, अल्ट्रा प्रॉसेस्ड फूड और शुगर रिच आइटम हैं। हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स का अर्थ है कि इन चीजों में कार्ब की मात्रा ज्यादा है। ये पेट में जाकर जल्दी और आसानी से पच जाती हैं और ब्लड शुगर लेवल को तुरंत बढ़ाती हैं।
वहीं दूसरी ओर जिस फूड की रैंकिंग ग्लाइसेमिक इंडेक्स पर कम होती है, वो पचने में वक्त लेती हैं और उन्हें खाने के बाद ब्लड शुगर लेवल के बढ़ने की गति बहुत धीमी होती है, जैसे फाइबर, प्रोटीन और हाई क्वालिटी फैट।
भोजन का ग्लाइसेमिक इंडेक्स
बॉडी के इंटर्नल मैकेनिज्म को हेल्दी बनाए रखने और मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त रखने में बहुत क्रिटिकल भूमिका एक हॉर्मोन की है, जो पैंक्रियाज से रिलीज होता है। इसे इंसुलिन कहते हैं। इंसुलिन खून से अतिरिक्त शुगर को साफ करने और उसे फैट सेल्स में बदलकर शरीर की कोशिकाओं में डिपॉजिट करने का काम करता है। इसीलिए ज्यादा कार्ब और मीठा खाने से वजन बढ़ता है क्योंकि इंसुलिन उसे फैट में कन्वर्ट कर रहा होता है।
कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी मेडिसिन स्कूल के एंडोक्रोनोलॉजी डिपार्टमेंट में प्रोफेसर डॉ. रॉबर्ट लस्टिग अपनी किताब ‘फैट चांस’ में लिखते हैं, “हर व्यक्ति को यह पता होना चाहिए कि वह जो भी खा रहा है, उसका उसके ब्लड शुगर लेवल पर क्या असर पड़ेगा। ब्लड शुगर लेवल यानी हाई या लो इंसुलिन का सीधा संबंध डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल, हाइपरटेंशन और हार्ट डिजीज से है। शरीर से जुड़ी सारी बीमारियों में इंसुलिन की केंद्रीय भूमिका है। इसलिए जरूरी है कि इंसुलिन का स्तर हमेशा कम रहे।”
इंसुलिन का स्तर कैसे कम होगा
यह जानने के बाद कि इंसुलिन कम रखना हेल्दी मेटाबॉलिज्म के लिए कितना जरूरी, अगला सवाल ये है कि इंसुलिन लेवल को कम कैसे रखा जाए। इसके लिए जरूरी है कि ऐसी चीजें कम या ना के बराबर खाई जाएं, जो ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाती हैं।
ग्लाइसेमिक लोड क्या होता है?
किसी फूड का GI इंडेक्स ये बताता है कि किसी फूड के ब्लड शुगर लेवल को बढ़ाने की स्पीड या गति क्या है। वहीं ग्लाइसेमिक लोड यह बताता है कि उस फूड में मौजूद कार्ब की संरचना क्या है और वह ब्लड शुगर लेवल को कितना बढ़ाता है।
ग्लाइसेमिक इंडेक्स और ग्लाइसेमिक लोड में क्या फर्क है?
अपने इंसुलिन और ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रण में रखने के लिए किसी फूड आइटम का सिर्फ GI इंडेक्स देखना ही काफी नहीं है। उसका ग्लाइसेमिक लोड भी उतना ही जरूरी है। क्योंकि कई चीजों का, खासतौर पर कॉम्प्लेक्स कार्ब्स और फलों का GI इंडेक्स हाई होने के बावजूद उनका ग्लाइसेमिक लोड कम होता है।
उदाहरण के लिए चुकंदर या बीटरूट का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 64 है यानी यह ज्यादा तेजी के साथ डाइजेस्ट हो रहा है और रक्त में मिल रहा है। लेकिन इसका ग्लाइसेमिक लोड सिर्फ 2.9 है यानी इसमें कार्ब की मात्रा बहुत कम है और यह ब्लड शुगर लेवल को ज्यादा नहीं बढ़ाता।
उदाहरण के लिए तरबूज को ही ले लीजिए। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स 80 है, लेकिन ग्लाइसेमिक लोड सिर्फ 5 है। यानी इसके ब्लड शुगर लेवल को बढ़ाने की स्पीड तो ज्यादा है, लेकिन इसे खाने से ज्यादा ब्लड शुगर बढ़ता नहीं। इसका कारण ये है कि तरबूज का अधिकांश हिस्सा पानी और फाइबर होता है और इसमें शुगर और कार्ब की मात्रा बहुत कम होती है।
वहीं अगर सफेद चावल को देखें तो उसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स 70 है और ग्लाइसेमिक लोड 56 है। यानी यह न सिर्फ तेजी से ब्लड शुगर लेवल बढ़ाता है बल्कि ज्यादा मात्रा में बढ़ाता है।
फ्रेंच फ्राइज जैसे हाइली प्रॉसेस्ड फूड ग्लाइसेमिक इंडेक्स और लोड दोनों में बहुत हाई हैं, जो क्रमश: 75 और 56 है। वहीं जिस आलू से यह बनता है, वह आलू अगर हम उबालकर खाएं तो उसका ग्लाइसेमिक लोड 17.8 है।
अब सहज जिज्ञासा से एक सवाल यह उठता है कि एक ही फूड का ग्लाइसेमिक इंडेक्स और लोड अलग-अलग क्यों होता है। हर तरह के कार्ब या शुगर का ब्लड शुगर पर प्रभाव एक जैसा क्यों नहीं होता।
- सभी कार्ब एक जैसे नहीं होते
डॉ. लस्टिग कहते हैं कि हर कार्ब एक जैसा नहीं होता। रिफाइंड कार्ब, प्रॉसेस्ड कार्ब का GI इंडेक्स और लोड दोनों ज्यादा होता है क्योंकि प्रॉसेसिंग के दौरान उसकी बुनियादी संरचना बदल जाती है। उसका सारा फाइबर खत्म हो जाता है और जो बचता है, वो विशुद्ध ग्लूकोज होता है।
इस फूड को पचने के लिए बड़ी आंत (लार्ज इंटेस्टाइन) तक पहुंचने की जरूरत नहीं पड़ती। यह पूरा का पूरा छोटी आंत (स्मॉल इंटेस्टाइन) में ही एब्जॉर्व हो जाता है।
वहीं कॉम्प्लेक्स कार्ब्स में कार्ब के साथ-साथ प्रोटीन और फाइबर भी होता है। जैसे सभी प्रकार की दालें, मिलेट्स, मोटा अनाज। अब इसमें कार्ब तो है, लेकिन ढेर सारा फाइबर भी है। और फाइबर आपका नहीं, आपके पेट में मौजूद माइक्रोबायोम्स का फूड है।
फलों का GI इंडेक्स ज्यादा
फल शुगर से भरपूर हैं, लेकिन फिर भी ये शुगर या चीनी की तरह नुकसान नहीं करते। इनका GI इंडेक्स ज्यादा होता है, लेकिन GI लोड कम होता है।
इसकी वजह है इनका फाइबर से भरपूर होना। अगर आप 100 ग्राम फल खा रहे हैं तो उसमें से 30 ग्राम तो फाइबर ही है।
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