नई दिल्ली/ अचानक अगर सूंघने और स्वाद की शक्ति चली जाए तो क्या होगा? ये दोनों परेशानियां उम्र के किसी भी पड़ाव आ सकती हैं। सर्दी-जुकाम, सांस की परेशानी या विटामिन की कमी की वजह से सुगंध और स्वाद लेने की क्षमता खो जाती है। इसका असर शरीर के दूसरे अंगों पर भी पड़ सकता है।
सर्जन डॉ. पंकज गुलाटी से सुंगध और स्वाद की क्षमता के बारे में जानते हैं।
महक-स्वाद कैसे पता चलता है
गंध और स्वाद इंद्रियां मनुष्य के रसायन विज्ञान प्रणाली का ही हिस्सा है। चीजों को सूंघने की क्षमता इंद्रियों से मिलती है। जिसे ओल्फेक्ट्री सेंसरी न्यूरॉन्स कहते हैं। ये नाक के अंदर टिश्यूज के एक छोटे से भाग में पाए जाते हैं। हर ओल्फेक्ट्री न्यूरॉन्स में एक गंध रिसेप्टर होता है, जो आसपास के पदार्थों द्वारा जारी माइक्रोस्कोपिक मॉलिक्यूल्स को उत्तेजित करता है। महक दो रास्तों के जरिए ओल्फेक्ट्री रिसेप्टर्स तक पहुंचती है। पहली नासिका और दूसरी गले के ऊपरी हिस्से को नाक से जोड़ता है।
स्वाद की पहचान करने वाली इंद्रिया जीभ से होकर गुजरते हैं। इन्हें ‘गस्टोरी रिसेप्टर’ कहते हैं। जीभ की ऊपरी परत पर स्वाद की ग्रंथियां होती हैं। स्वाद और सूंघने की शक्ति कमजोर होने की कई वजह हो सकती हैं।
- एलर्जी
- साइनस
- डिमेंशिया
- बढ़ती उम्र
- न्यूट्रिशन की कमी
- सिर-नाक की चोट
- इंडोक्राइन डिसऑर्डर
- सांस संबंधी समस्या
- नाक-गले में इन्फेक्शन
- न्यूरोलॉजिकल समस्याएं
जुबान स्वाद क्यों महसूस नहीं कर पाती
- चेहरे की एक तरफ की मांसपेशियों का कमजोर होना।
- सर्दी जुकाम।
- वायरल इंफेक्शन।
- नाक में इंफेक्शन ।
- साइनसिसिस।
- फैरिन्जाइटिस ।
- इंफेक्शन से गले में सूजन।
- लार ग्रंथि इन्फेक्शन।
- सिर में चोट।
- साइनस या सिर की सर्जरी।
- धूम्रपान।
- मुंह, नाक या सिर में चोट लगना।
- मुंह का सूखापन।
- मसूड़े की सूजन।
- विटामिन-बी12 की कमी।
- जिंक की कमी।
- अल्जाइमर या पार्किंसंस।
- मनोपॉज।
घरेलू नुस्खे
लहसुन कलियां लौटाएं स्वाद
गर्म पानी में कटे हुए लहसुन को डालें और कुछ मिनट तक पानी को उबलने दें। अब पानी को छान लें और हल्का ठंडा होने पर चाय की तरह पिएं। यह प्रक्रिया दिन में दो बार दोहराई जा सकती है। सूंघने और मुंह के स्वाद के लिए लहसुन फायदेमंद है। लहसुन एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो सूजन को कम करने में मदद करते हैं। सर्दी, फ्लू और सांस से जुड़ी समस्या को भी कम करने में लहसुन कारगर है। एक शोध से पता चलता है कि लहसुन अल्जाइमर से भी बचाव करता है।
अदरक स्वाद लौटाए और सूंघने की ताकत दे
किसी तरह का इंफेक्शन सूंघने और मुंह के स्वाद को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में अदरक खाना फायदेमंद है। अदरक का इस्तेमाल आम सर्दी, फ्लू और एलर्जी जैसे लक्षणों को दूर करने के लिए किया जा सकता है। दिनभर बीच-बीच में थोड़ा-थोड़ा अदरक चबाते रहें। अदरक की चाय भी पी जा सकती है। रोजाना इसे इस्तेमाल करें। इसमें एंटी इंफ्लेमेटरी गुण पाया जाता है, जो सूजन से बचाता है।
लाल मिर्च, शहद, गर्म पानी भी फायदेमंद
एक गिलास पानी में एक चम्मच शहद और लाल मिर्च पाउडर मिलाएं। अब इसे आराम से पिएं। रोजाना दिन में एक बार इसका इस्तेमाल जरूर करें। लाल मिर्च स्वाद और गंध को वापस लाने में मदद करती है, क्योंकि इसमें कैप्साइसिन होता है। कैप्साइसिन नॉन-एलर्जी, राइनाइटिस की समस्या में मददगार है। नाक बंद होने की वजह से सूंघने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। कैप्साइसिन में सूजन को कम करने के प्रभाव भी मौजूद होते है। साथ ही यह लार के स्राव को बढ़ाता है। मुंह का सूखापन भी स्वाद से जुड़ी समस्या का कारण माना जाता है। शहद एलर्जिक रायनाइटिस से राहत दिलाने में मदद कर सकता है। जिसमें एलर्जी के कारण बंद नाक की समस्या हो सकती है। एक गिलास पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर पीएं। एक दिन छोड़कर इस प्रक्रिया को इस्तेमाल किया जा सकता है।
शहद एलर्जिक रायनाइटिस यानी एलर्जी के कारण नाक में होने वाली सूजन की समस्या से राहत दिलाने में मदद कर सकता है। एलर्जिक राइनाइटिस के लक्षण में बंद नाक की समस्या भी शामिल है, जिससे राहत पाने में शहद कारगर हो सकता है। शहद एंटी बैक्टीरियल प्रभाव से भी समृद्ध होता है, जो बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण होने वाली सांस संबंधी समस्या में कुछ हद तक कारगर साबित हो सकती है।
नींबू का रस, शहद डालकर पिएं
एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के मुताबिक, नींबू का इस्तेमाल एलर्जिक राइनाइटिस से होने वाली समस्या जैसे- एलर्जी में नाक में होने वाली सूजन से राहत दिला सकता है। नींबू और शहद का मिक्स्चर एंटी-बैक्टीरियल होता है, जो बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण होने वाली सांस की परेशानी से बचाने में मदद करता है। एक अन्य रिसर्च के मुताबिक, नींबू का इस्तेमाल ओल्फेक्ट्री डिसऑर्डर यानी सूंघने की क्षमता में सुधार करता है। इस शोध में इस बात का साफ तौर से जिक्र मिलता है कि कैंसर के इलाज के बाद अक्सर सूंघने की क्षमता में कमी देखी जाती है। ऐसे में नींबू की महक का इस्तेमाल फायदेमंद है। वहीं बंद नाक, सांस संबंधी इंफेक्शन और ओल्फेक्ट्री डिसऑर्डर स्वाद और गंध की परेशानी के मुख्य कारणों में शामिल हैं। शहद और नींबू को पानी के साथ इस्तेमाल कर इस समस्या से राहत पाएं।
सेब का सिरका
एक गिलास गर्म पानी में सेब का सिरका थोड़ा शहद मिलाएं और धीरे-धीरे पिएं। इसे रोजाना पिया जा सकता है।
मुंह का स्वाद और नाक में सुगंध न आने के इलाज में सेब के सिरके के फायदे भी सहायक हो सकते हैं। दरअसल, सेब के सिरके से जुड़े एक शोध से पता चलता है कि सेब के सिरके में एंटीबायोटिक यानी बैक्टीरिया को नष्ट करने वाला और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण पाया जाता है। यह दोनों गुण सांस संबंधी समस्या को ठीक करने में मदद कर सकते हैं। ऐसे में सेब के सिरके का इस्तेमाल सांस संबंधी परेशानी की वजह से गंध और स्वाद चले जाने की स्थिति में फायदेमंद है।
ऑयल पुलिंग
मुंह में नारियल या तिल का तेल भर लें। तेल को करीब 10 से 15 मिनट तक मुंह के अंदर ही घुमाएं। अब कुल्ला कर लें और दांतों को ब्रश कर लें। रोजाना सुबह-शाम एक बार जरूर करें। ऑयल पुलिंग भी सूंघने और मुंह के स्वाद को ठीक करने में कारगर हो सकते हैं। ऑयल पुलिंग ओरल हेल्थ को बढ़ावा देता है।
अजवाइन और दालचीन
अजवाइन को पानी में उबालकर छानकर इसका इस्तेमाल करें। इस प्रक्रिया को रोजाना एक बार करें। जीभ का स्वाद चले जाने और नाक से सुगंध न आने के इलाज में अजवाइन फायदेमंद है। सर्दी, फ्लू, कफ, बंद नाक और सूजन संबंधी समस्याओं को कम करने में अजवाइन मददगार मानी जाती है। इसी तरह आधा चम्मच दालचीनी पाउडर को एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर इसका पेस्ट जीभ पर लगाएं और 10 मिनट के लिए छोड़ दें। ऐसा रोजाना दो बार कर सकते हैं।
दालचीनी का इस्तेमाल घरेलू उपाय के तौर पर सर्दी, जुकाम खांसी और साइनस से राहत दिलाने में कारगर है। इसमें एंटी फंगल एंटी बैक्टीरियल और एंटी वायरल गुण होते हैं। दालचीनी का इस्तेमाल इंफेक्शन, जुकाम या फिर साइनस की वजह से प्रभावित मुंह के स्वाद या सूंघने की क्षमता को ठीक करने में मदद करता है।
पिपरमिंट
सर्दी जुकाम, फ्लू, साइनस या फिर इंफेक्शन इन सभी कारणों से सूंघने और मुंह के स्वाद लेने की शक्ति कमजोर हो सकती है। एक कप पानी में 10-15 पिपरमेंट की पत्तियां डालकर उबाल लें। अब पानी को छानकर शहद मिलाएं और उसके छोटे छोटे घूंट पिएं। ऐसे में अगर पिपरमिंट और शहद के मिश्रण का इस्तेमाल किया जाए, तो इसमें सुधार हो सकता है। पिपरमेंट की पत्तियों में एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं। ये बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करती हैं। इन सभी घरेलू इलाजों में उनको अपनाएं जो स्वाद और सुगंद लौटाने में मदद करे और आपके शरीर को राहत दे।
.jpeg)
टिप्पणियाँ