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खराब लाइफस्टाइल से 65 साल में होने वाली डिमेंशिया बीमारी हो रही है युवाओं को, जानें इससे बचने के उपाय

पिछले दिनों एक्टर नसिरुद्दीन शाह की एक शॉर्ट फिल्म आयी थी, ‘द ब्रोकन टेबल’। फिल्म में नसिरुद्दीन एक रिटायर्ड वकील का किरदार निभा रहे हैं। इसमें वह कभी अपना काला कोट पहनकर केस लड़ने के लिए कार लेकर निकल पड़ते हैं, तो कभी पुराने केसों की फाइल पलटने लगते हैं। आसपास के लोगों के समझाने के बाद भी वह मानने के लिए तैयार नहीं कि वे रिटायर हो चुके हैं। असल में फिल्म में नसिरुद्दीन शाह को ‘डिमेंशिया’ की बीमारी है। आमतौर पर यह बीमारी 65 साल से अधिक उम्र के लोगों को होती है। यानी इसे बुढ़ापे की बीमारी माना जाता है। लेकिन अब युवाओं में भी डिमेंशिया के काफी केस मिल रहे हैं।

इंग्लैंड की एक्सेटर और नीदरलैंड की मास्ट्रिच यूनिवर्सिटी ने मिलकर इस पर एक स्टडी की है। इसमें वह 14 कारण बताए गए हैं, जिसके चलते युवा भी ‘डिमेंशिया’ का शिकार हो रहे हैं।

डिमेंशिया से कैसे बचा जा सकता है।

डिमेंशिया क्या है?

डिमेंशिया एक लैटिन शब्द है, जो डिमेन्स से बना है। हिन्दी में इसका मतलब है ‘दिमाग से अस्थिर होना।’ डिमेंशिया भूलने की एक बीमारी है। इसमें हमारे मस्तिष्क के मैमोरी सेंटर कमजोर होने लगते हैं। डिमेंशिया से पीड़ित मरीज रोजमर्रा के काम भी भूलने लगता है। साथ ही निर्णय लेने की क्षमता कम हो जाती है। डिमेंशिया के कई प्रकार हो सकते हैं, जैसेकि-

  1. वैस्कुलर डिमेंशिया
  2. अल्जाइमर्स
  3. फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया
  4. लेवी डिजीज

हम सभी कई बार चीजें भूल जाते हैं। कभी किसी का नाम तो कभी कोई सामान कहीं रखकर भूल गए। पर थोड़ी देर में हमें याद भी आ जाता है। यह डिमेंशिया का लक्षण बिल्कुल नहीं हैं। ऐसा महज ‘लैक-ऑफ अटेंशन’ यानी एकाग्रता की कमी की वजह से होता है।

हेल्दी फूड से करें डिमेंशिया को कंट्रोल

डिमेंशिया के प्रमुख कारण

एक्सेटर और मास्ट्रिच यूनिवर्सिटी की इस स्टडी में 65 साल के कम उम्र के साढ़े तीन लाख से ज्यादा लोगों को शामिल किया गया। इस स्टडी के मुताबिक कम उम्र में डिमेंशिया होने के पीछे यह मुख्य कारण हैं-


डिमेंशिया के प्रमुख कारण

ऐसे पहचाने  डिमेंशिया को 

  1. स्ट्रोक- स्ट्रोक की वजह से दिमाग में ब्लड लेवल में कमी या दिमाग के अंदर रक्तस्त्राव हो सकता है। इससे दिमाग के न्यूरोलॉजिकल फंक्शन को काफी नुकसान पहुंचता है। ऐसे में डिमेंशिया का खतरा बढ़ जाता है।
  2. डायबिटीज- मॉडर्न साइंस में अब अल्जाइमर्स को टाइप-3 डायबिटीज का नाम दिया गया है। अनियंत्रित ब्लड शुगर का सबसे ज्यादा असर हमारे ब्रेन न्यूरॉन्स पर पड़ता है। स्मृति कमजोर होने लगती है। इसलिए डायबिटीज को नियंत्रण में रखना बहुत जरूरी है।
  3. विटामिन डी की कमी- विटामिन डी का सबसे बड़ा स्रोत धूप है। विटामिन डी न लेने से ऑक्सीडेटिव तनाव बढ़ता है, जिससे दिमाग फ्रेश फील नहीं करता।
  4. सोशल अलगाव- जो लोग किसी से घुलते-मिलते नहीं हैं, उनके दिमाग में खुद को और दूसरों को लेकर तरह-तरह के विचार आते हैं, जिससे दिमाग में अवसाद पैदा होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसा देखा गया कि कोरोना पैनडेमिक के दौरान बढ़े आइसोलेशन का असर सीधे दिमाग पर पड़ा। इस स्टडी ने पाया कि अकेलेपन के शिकार लोगों का ब्रेन डिक्लाइन ज्यादा तेजी से हो रहा था।
  5. ज्यादा शराब पीना- ज्यादा शराब पीने से दिमाग में न्यूरॉन्स की एक्टिविटी कम हो जाती है, जिससे बोलने, सोचने और चीजों को याद रखने की क्षमता कम होने के साथ तेजी से मूड स्विंग होता है। ऐसे में डिमेंशिया का खतरा भी बढ़ जाता है। इसे लेकर फ्रेंच नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड मेडिकल रिसर्च की एक रिपोर्ट बताती है कि जो लोग कम शराब पीते हैं, उन्हें डिमेंशिया का रिस्क कम होता है।
  6. ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन- ब्लड प्रेशर में कमी आने की स्थिति को ‘ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन’ कहा जाता है। ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन में इस्केमिक स्ट्रोक की संभावना दोगुनी हो जाती है।
  7. दिल से जुड़ी बीमारी- जिन लोगों को दिल से जुड़ी बीमारियां होती हैं, उनमें डिमेंशिया का खतरा अधिक होता है क्योंकि इससे दिमाग की रक्त वाहिकाओं में थक्का जमने या रक्तस्राव होने की संभावना बढ़ जाती है।
  8. तनाव या स्ट्रेस- जब हम किसी बात को लेकर ज्यादा तनाव लेते हैं तो ‘कोर्टिसोल’ नाम का एक स्ट्रेस हॉर्मोन रिलीज होता है। कोर्टिसोल मैमोरी पर सीधे असर डालता है। ऐसे में ज्यादा तनाव लेना डिमेंशिया के जोखिम को बढ़ा सकता है।
  9. अशिक्षा- इस स्टडी में पाया कि किसी व्यक्ति का सामाजिक-आर्थिक बैकग्राउंड, परिवेश और शिक्षा का उसके स्वास्थ्य से सीधा संबंध है। इसका रिश्ता दरअसल जानकारी, जागरूकता और हेल्दी लाइफ स्टाइल से है। अशिक्षा के वातावरण में हेल्दी लाइफस्टाइल मुमकिन नहीं है।
  10. सुनने की क्षमता कम होना- इस स्टडी में पाया गया कि यदि किसी भी कारण से व्यक्ति की सुनने की क्षमता अगर कम हुई तो उसके डिमेंशिया का शिकार होने की संभावना बढ़ गई। हियरिंग कैपेसिटी से इसका सीधा रिश्ता देखा गया।
  11. गरीबी- गरीबी एक अभिशाप की तरह है, जो डिमेंशिया के जोखिम को बढ़ा देती है। ‘द लैंसेट हेल्दी लॉन्जिविटी जर्नल’ में छपी एक स्टडी के अनुसार कमजोर सोशल-इकोनॉमिक वर्ग वाले लोगों में हाई सोशल-इकोनॉमिक वर्ग की तुलना में डिमेंशिया का खतरा तीन गुना ज्यादा होता है।
  12. एपोलिपोप्रोटीन E4- एपोलिपोप्रोटीन E4 यानी APOE4 एक प्रकार का जीन है। अगर अपने माता-पिता से APOE4 जीन हमें विरासत में मिले हैं तो हमारे डिमेंशिया का शिकार होने की संभावना ज्यादा होगी।
  13. डिमेंशिया से बचने के उपाय
  14. सी-रिएक्टिव प्रोटीन का बढ़ना- सी-रिएक्टिव प्रोटीन यानी CRP एक तरह का प्रोटीन होता है, जो बॉडी में इन्फेक्शन लेवल को बताता है। सामान्य लोगों में CRP की वैल्यू 1MG/L से कम होनी चाहिए। अगर CRP का लेवल इससे ज्यादा बढ़ता है तो डिमेंशिया होने का खतरा रहता है।

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