रेडक्राॅस साेसायटी लेता है हर साल जिले में सभी स्कूल के बच्चों से 30 रुपए माह, ये कहाँ खर्च हो रहे कोई हिसाब नहीं; गड़बड़ी की आशंका
बिलासपुर/ रेडक्राॅस सोसायटी द्वारा प्रति वर्ष 9वीं से 12वीं तक के प्रत्येक विद्यार्थियों से प्रतिदिन 3 रुपए के हिसाब से 10 माह के 30 रुपए लिए जाते हैं। यह शुल्क सभी शासकीय, अर्ध शासकीय व निजी स्कूलों में अनिवार्य किया गया है। रेडक्राॅस साेसायटी ने इस वर्ष (2023 में) भी 29 लाख 94 हजार 480 रुपए स्कूली बच्चों से लिए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग रेडक्राॅस को पिछले 20 साल से यह शुल्क देता आ रहा है।
लेकिन, इस पैसे का उपयोग कहां किया जाता है, यह बताने वाला काेई नहीं। इसकी जानकारी शिक्षा विभाग को नहीं दी जाती। शिक्षक बनाम नोडल अधिकारी की मिलीभगत से रेडक्राॅस में करोड़ों की गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। स्कूली बच्चों की फीस में रेडक्राॅस के नाम से 30 रुपए लिए जाते हैं।
जिलेभर के स्कूलों में बच्चों की दर्ज संख्या के हिसाब से जो राशि आती है, उसमें से 10 प्रतिशत राशि जिला शाखा और 20 प्रतिशत राशि राज्य शाखा को जाती है। यह सिलसिला पिछले 20 साल से चला आ रहा है। शिक्षा विभाग के एक अधिकारी का कहना है पिछले तीन साल से यह राशि स्कूलों से सीधे रेडक्राॅस सोसायटी ले रही है।
यह था उद्देश्य
रेडक्रॉस अंतरराष्ट्रीय संगठन है। 1863 में हेनरी ड्यूट ने इसकी स्थापना की। इसका मुख्यालय जेनेवा में है। इसका उद्देश्य युद्ध के समय, महामारी बीमारी, या प्राकृतिक आपदा के समय पीड़ितों की सहायता करना है। स्कूली बच्चों में दीन, गरीब व बीमारों के प्रति सेवा भावना लाने के लिए स्कूलों में जूनियर रेडक्राॅस दल भी बनाए गए।
हो रहा है कुछ और ही
रेडक्रॉस सोसायटी के नाम पर जमकर फर्जीवाड़ा हो रहा है। दो दशकों से सौरभ सक्सेना नामक शिक्षक को नोडल अफसर बनाकर रखा गया है। न सोसायटी का ऑडिट होता है न फंड वसूली और खर्च की जानकारी मिल पाती।
2023 में दिया गया फंड
9 वीं में 36649 बच्चे - रेडक्रॉस द्वारा ली गई फीस 10 लाख 99 हजार 470 रुपए
10 वीं में 12925 बच्चे - रेडक्रॉस द्वारा ली गई फीस 3 लाख 87 हजार 750 रुपए
11 वीं में 26750 बच्चे - रेडक्रॉस द्वारा ली गई फीस 8 लाख 25 हजार रुपए
12 वीं में 23492 बच्चे - रेडक्रॉस द्वारा ली गई फीस 7 लाख 4 हजार 760 रुपए
किसी योजना पर प्लानिंग नहीं
कक्षा, दर्ज संख्या, प्रति छात्र ली गई राशि व जमा किया गया अंशदान। किस स्कूल से कितना मिला और इसका क्या उपयोग हुआ, ये भी किसी को नहीं बताया जाता।
स्कूलों से रेडक्राॅस के नाम पर राशि मिलती है, हर साल शुल्क मिल भी रहा है। लेकिन इसे कहां खर्च किया जाता है, इसकी जानकारी लेनी पड़ेगी।
डॉ. राजेश शुक्ला, सीएमएचओ व सचिव रेडक्रॉस
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