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रेडक्रॉस सोसाइटी को दान दाताओं द्वारा मिलते हैं हर साल लाखों रुपए, लेकिन न हिसाब का न काम-काज का पता है

बिलासपुर/ कमजोर वर्ग की सहायता, आपात स्थिति में मदद जैसे उद्देश्य के लिए स्थापित रेडक्रॉस सोसाइटी में बिलासपुर में कुछ नहीं हो रहा, सिवाय मेडिकल स्टोर संचालन और इससे मुनाफा कमाने के। जबकि, दान दाताओं द्वारा सोसाइटी को हर साल लाखों रुपए दिए जाते हैं। लेकिन, इससे आज तक कोई बेहतर योजना अमल में नहीं आ सकी। न ही इस सोसाइटी ने कभी आपात स्थिति में कोई मदद पहुंचाई। राज्य गठन के बाद 23 साल में 16 कलेक्टर बदल गए, लेकिन रेडक्राॅस सोसाइटी जहां से शुरू हुई थी, वहीं अटकी है। हैरत है, कि पूरी सोसाइटी को एक शिक्षक के हवाले कर दिया है, जिसके सामने अफसरों की भी नहीं चलती। यूं तो रेडक्राॅस संस्था इंटरनेशनल है। इसकी स्थापना मानव सेवा और जरूरतमंदों की मदद के लिए हुई थी। विश्वभर में इसके ब्रांच और सदस्य हैं। बड़े-बड़े समाजसेवी और नामधन्य लोग इससे जुड़े हैं।

लेकिन बिलासपुर जिले में इसका बड़ा बुरा हाल है। यहां मानव या समाज सेवा नहीं, सिर्फ मेडिकल स्टोर खोलकर दुकानदारी की जा रही है। स्थानीय रेडक्राॅस सोसाइटी की शहर में चार जगह मेडिकल दुकानें हैं। इनमें एक सिम्स में, दूसरा व तीसरा जिला अस्पताल में और चौथा बुधवारी बाजार में है। लाखों-करोड़ों का मुनाफा देने वाली इन दुकानों के अलावा यहां रेडक्रॉस के पास और कोई योजना या सेवा कार्य नहीं है। और इन लाखों-करोड़ों का हिसाब-किताब भी सिर्फ एक व्यक्ति के पास है, जिसका मूल काम तो अध्यापन है, लेकिन उसने 19 बरस से स्कूल की दहलीज पर कदम नहीं रखा। इतने वर्षों से शिक्षक सौरभ सक्सेना रेडक्रॉस सोसाइटी के नोडल अफसर बनकर जमे हुए हैं। उनसे बड़े-बड़े अफसर इस सोसाइटी के पदाधिकारी व सदस्य हैं, लेकिन सिर्फ नाम के लिए। उन अफसरों को कुछ नहीं पता, क्योंकि मेडिकल दुकान का सारा हिसाब-किताब शिक्षक बनाम नोडल अफसर ही देखते हैं।

साल में सिर्फ दो बार ही बैठक

सोसाइटी के लिए आयोजित बैठकों में किसी प्लान पर चर्चा नहीं होने के कारण अब इसकी बैठक महज औपचारिक होने लगी है। रेडक्राॅस में दान दाताओं द्वारा किए गए दान का भी कोई हिसाब-किताब नहीं है। न ही मेडिकल स्टोर की बिक्री का लेखा-जोखा। इसके मुनाफे के बारे में भी सदस्यों को कभी नहीं बताया जाता। बैठक में सदस्यों ने कई बार सवाल भी उठाए, लेकिन प्रशासन ने इस पर ध्यान ही नहीं दिया। रेडक्राॅस सोसाइटी के एक सदस्य का कहना है कि जिस उद्देश्य के साथ इस सोसाइटी का गठन किया गया था, उस हिसाब से काम नहीं किया जा रहा है।

इंटरनेशनल लैब की योजना फेल

20 साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. अजीत जोगी और उस दौर में बिलासपुर में कलेक्टर रहे आरपी मंडल ने बिलासपुर रेडक्रॉस सोसाइटी के सदस्यों के साथ बैठक कर बिलासपुर में रेडक्रॉस के फंड और सदस्यों की बदौलत एक इंटरनेशनल लैब बनाने की योजना तैयार की थी। इसका संचालन रेडक्रॉस करता। रेडक्रॉस की लैब में शासकीय दरों पर लोगों की जांच होती, लेकिन इस बात को एक युग बीत चुका पर अब तक जिले में रेडक्रॉस के तहत एक लैब भी तैयार नहीं हो पाई। इधर बिलासपुर जिले में रेडक्रॉस के तहत होने वाले मेडिकल सहायता भी बंद हो चुकी है।

तकरीबन 2 साल तक लोग कोरोना महामारी में त्रासदी से जूझते रहे। चारों तरफ हाहाकार मचा रहा। जिले में हजारों मरीज व उनके परिजन कोरोना जांच, एंबुलेंस, ऑक्सीजन, अस्पतालों में बेड, दवा-इलाज, भोजन के लिए भटकते रहे। निजी अस्पतालों तक में इलाज मुश्किल हो रहा था। रोजाना सैकड़ों मौतें हो रही थीं। इस बेहद मुश्किल दौर में भी जिले की रेडक्रॉस सोसाइटी ने कुछ नहीं किया।

योजना को लेकर कोई काम नहीं हुआ । रेडक्राॅस सोसाइटी के संबंध में ज्यादा जानकारी नहीं है, नोडल अधिकारी से जानकारी मांगी गई है। बहुत से लोग दान भी करते हैं। लेकिन रेडक्राॅस सोसाइटी शि​विर के अलावा अन्य योजना पर काम नहीं कर पाई है। -डॉ. राजेश शुक्ला, सीएमएचओ व सचिव रेडक्राॅस सोसायटी बिलासपुर

विकसित भारत संकल्प यात्रा के कार्यक्रम में हूं। इसलिए कोई जानकारी नहीं दे पाउंगा। -सौरभ सक्सेना, नोडल अधिकारी रेडक्राॅस सोसायटी

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