कम टाइम में ज्यादा पैसा कमाने के लिए ऑनलाइन गेमिंग में लोग खुद ऐसे फंसते हैं फिर जिंदगी हो जाती है बर्बाद
भोपाल/ ये कहानी भोपाल के रूपेश की है। रूपेश इंदौर में एक कंपनी में नौकरी करते हैं। ऑनलाइन गेमिंग ऐप के चक्कर में उन्होंने पूरी सेविंग गंवा दी। ऐप से पैसे कमाने के लालच में बर्बाद होने वाले रूपेश अकेले नहीं हैं। बस ये लोग सामने नहीं आते, इसलिए पता नहीं चल पाता। बदनामी के डर से चुप रहते हैं, अपने साथ हुई ठगी के बारे में घरवालों को नहीं बताते और कहीं शिकायत भी नहीं करते। सबकी कहानी एक सी है। शुरुआत में थोड़े से पैसे लगाए, जीते तो लाखों-करोड़ों लगाने लगे। आखिर में सब हार गए।
ये लोग पहचान नहीं बताना चाहते, इसलिए इनके नाम बदल दिए हैं। हमने एक्सपर्ट्स और गेमिंग ऐप में काम कर चुके स्टाफ से भी बात की, ताकि पता चले कि ये ऐप काम कैसे करते हैं।
6 महीने पहले ही मेरी शादी हुई है। वाइफ IT कंपनी में जॉब करती है। उसकी नाइट शिफ्ट होती है। वाइफ दिन में घर पर रहती है और रात में मैं। ऑनलाइन गेम में पैसे लगाने की शुरुआत एक मैसेज से हुई। उसमें गेम का लिंक था। वो स्लाइडिंग वाला गेम था। एक जैसी स्लाइड आती थीं, तो कुछ रिवॉर्ड मिलता था, जैसे आपने 10 रुपए लगाए तो 100 रुपए मिल जाएंगे। शुरुआत में मैंने भी कुछ पैसे जीते।
अकाउंट में पैसे दिखने लगे तो मेरा लालच बढ़ गया। मैंने ज्यादा पैसे लगाने शुरू किए। इसमें भी मैं विन-विन सिचुएशन में रहा। न हार, न जीत। करीब 12 से 15 दिन तक ऐसा चला। एप्लिकेशन पर यकीन हो गया, तो मैं बड़ा अमाउंट लगाने लगा। अचानक मैं हारने लगा। ढाई लाख रुपए हार गया। ये मेरी 3 से 4 साल की सेविंग थी।
रूपेश बताते हैं, मैंने कुछ पैसा क्रेडिट कार्ड से लिया, कुछ शेयर मार्केट से निकाला। पैसा डूबा, तो मैं परेशान हो गया। मैं जिस UPI के जरिए पैसा ट्रांसफर करता था, उससे मुझे ऐप कंपनी के कुछ लोगों के नाम मिले। ये लोग बेंगलुरु, इंदौर और मुंबई के थे। मैंने उन्हें मेल किया कि आपने ऐसा गेम सेट किया कि मेरे सारे रुपए डूब गए।
उनकी तरफ से रिप्लाई आया कि आपने जितना पैसा जीता था, उसे वापस ट्रांसफर कर दीजिए। फिर आपका इनवेस्ट किया अमाउंट वापस कर देंगे। मैं समझ गया कि ये मुझे फिर से फंसाने की साजिश है। मैंने कह दिया कि मैं अब कोई अमाउंट ट्रांसफर नहीं कर पाऊंगा।
मैं पुलिस के पास गया, लेकिन उन्होंने मेरी शिकायत नहीं ली। कहा कि आप जिस ऐप पर पैसे हारे हैं, वो तो वैलिड एप्लिकेशन है। आप ऑनलाइन शिकायत कर दीजिए। तभी कुछ हो पाएगा।
मैंने ऑनलाइन शिकायत की, लेकिन कुछ नहीं हुआ। तीन महीने तो बहुत परेशान रहा। फिर दोबारा नौकरी पर फोकस किया। अब भी कंपनी वालों के मेरे पास कॉल आते हैं कि आप गेम खेल लीजिए, आपको अच्छा रिटर्न मिलेगा। ये बात मैंने किसी को नहीं बताई।
- 24 साल के विवेक की कहानी
ढाई करोड़ रुपए हारे, 15 महीने से रिहैब सेंटर में चल रहा ट्रीटमेंट
विवेक की कहानी रूपेश से भी ज्यादा डरावनी है। इंदौर के रहने वाले विवेक ने B Com किया है। पिता गोल्ड का बिजनेस करते थे। उनकी डेथ के बाद विवेक कामकाज संभालने लगे।
विवेक कहते हैं, ’पापा के न रहने पर मैंने ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स पर सट्टा लगाना शुरू किया। करीब 12 लाख रुपए हार गया। उसकी भरपाई के लिए और पैसे लगाए। इंदौर में हमारी एक प्रॉपर्टी 2 करोड़ 27 लाख रुपए में बिकी थी। मैंने पूरा पैसा ऑनलाइन गेमिंग में लगा दिया और सब हार गया।’
विवेक की बहन सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। पति की डेथ के बाद वे बेटी के पास UK चली गई थीं। वहां से लौटीं, तब विवेक के बारे में पता चला। उन्होंने विवेक को रिहैब सेंटर में एडमिट करवाया। 15 महीने से उनका ट्रीटमेंट चल रहा है। अब विवेक रिहैब सेंटर से बाहर आ चुके हैं और हालात पहले से बेहतर हैं।
- महाराष्ट्र के दो भाई, एक 40 लाख रुपए हारा, दूसरा 7 करोड़
इंदौर के अंकुर रिहैब सेंटर में पिछले साल महाराष्ट्र से एक पेशेंट आए थे। उम्र 28 साल थी। ऑनलाइन गेमिंग की ऐसी लत लगी कि 40 लाख रुपए हार गए। रिलेटिव रिहैब सेंटर लेकर आए। यहां ट्रीटमेंट के बाद हालत सुधरी।
एक साल बाद उसी पेशेंट के 28 साल के छोटे भाई को रिहैब सेंटर लाया गया। छोटा भाई, बड़े से भी ज्यादा बुरी तरह से ऑनलाइन गेमिंग में फंसा था और 7 करोड़ रुपए हारा था। इतना पैसा हारने के बाद सुसाइड की कोशिश की। इनके पिता नहीं हैं और मां US में रहती हैं। पेशेंट का अब भी ट्रीटमेंट चल रहा है।
- इंदौर के डॉक्टर ने 50 हजार लगाए
इंदौर के एक डॉक्टर ने ‘द लॉयन बुक’ वेबसाइट में पैसे लगाए थे। ये वेबसाइट क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस, पोकर, तीन पत्ती और कसीनो के जरिए गैम्बलिंग करवाती है। डॉक्टर ने 50 हजार रुपए लगाए और 2 लाख रुपए जीत गए। जीतने के बाद उन्हें ढाई लाख रुपए मिलने थे, लेकिन नहीं मिले।
कंपनी के लोग उन्हें वॉट्सऐप चैट पर पैसे मिलने की अलग-अलग तारीखें देते रहे। बाद में कह दिया कि हमारे नाम से किसी ओर ने आपसे पेमेंट ले लिया है। फिर जवाब देना बंद कर दिया। डॉक्टर के पास पेमेंट वाले नंबर्स और वॉट्सऐप चैट की डिटेल है। अब सभी नंबर बंद हैं।
ऑनलाइन बेटिंग कैसे हो रही है, कौन करवा रहा है, इसका तरीका क्या है, लोग इसमें कैसे फंस रहे हैं और इसे क्यों रोका नहीं जा सकता। दैनिक भास्कर ने इन सवालों की पड़ताल की। इसके लिए हमने ऐसे शख्स की तलाश शुरू की, जो इस बिजनेस से जुड़ा हो।
मध्य प्रदेश के एक बुकी के जरिए एक व्यक्ति मिल गया। वो ऑनलाइन गेमिंग के जरिए सट्टा खिलाने वाली वेबसाइट में काम कर चुका था। पहचान छिपाते हुए उसने बताया कि ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर सट्टा खिला रहीं वेबसाइट कैसे काम करती हैं।
मैं TAJ777 वेबसाइट के लिए काम करता था। ये वेबसाइट कुराकाओ में रजिस्टर्ड है। कुराकाओ डच कैरेबियन आइसलैंड है, जो लैटिन अमेरिकी देश वेनेजुएला से करीब 65 किमी दूर है। हमें लॉगिन आईडी क्रिएट करवाने का टारगेट दिया जाता है। इसके लिए हर स्टेट में टीम होती है। डेटाबेस कंपनी प्रोवाइड करती है। इसमें देशभर के लोगों के मोबाइल नंबर होते हैं। टेलीकॉलिंग के लिए अलग लोग होते हैं।
इंस्टाग्राम, फेसबुक, टेलीग्राम पर ऐप का प्रमोशन करने के लिए अलग लोग होते हैं। मैसेज और कॉल के जरिए भी कस्टमर्स तक डायरेक्ट लिंक पहुंचाई जाती है। हम लोगों को फंसाते नहीं, बल्कि वे खुद फंसते हैं। हमारा टारगेट सिर्फ उन तक ऐप का लिंक पहुंचाना होता है।
कई बार उन्हें यकीन दिलाने के लिए फर्जी कॉल्स भी करवाते हैं। इसमें बताया जाता है कि फलां आदमी ने इतने दिनों में इतना प्रॉफिट कमाया है।
हमारी वेबसाइट के डोमेन बाहर के देशों में बुक होते हैं। बाहर के सर्वर पर ही वेबसाइट रन होती है। सॉफ्टवेयर में ऐसी कोडिंग की जाती है कि एक लिमिट के बाद कंपनी का प्रॉफिट होता है और यूजर हारता है।
कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स और डेवलपर्स की टीम होती है। कोई साइट ब्लॉक होती है, तो मिलते-जुलते नाम से तुरंत दूसरी साइट पर काम शुरू हो जाता है। जिन अकाउंट में पैसा आता है, उनसे विड्रॉल करने के लिए अलग टीम होती है। कभी भी एक अकाउंट में पैसा नहीं होता। ये सब फर्जी नाम से बने अकाउंट होते हैं।
अब बहुत लोग ऐप की फ्रेंचाइजी लेने लगे हैं। इसमें लाइसेंस मेन कंपनी के नाम पर होता है, बाकी लोगों को बिजनेस के हिसाब से कमीशन मिलता है। दो-दो, चार-चार लोग फ्लैट, कमरों से ऐप चला रहे हैं। इसके लिए किसी बड़े सेटअप की जरूरत नहीं है।
- सरकार ने 122 गैम्बलिंग ऐप बैन किए, सैकड़ों अब भी चल रहे
ऐप के काम करने का तरीका पता करने के बाद हमें अलग-अलग राज्यों में चल रहीं वेबसाइट्स के बारे में मालूम करना था। छत्तीसगढ़ में महादेव बेटिंग ऐप का मामला सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने 122 गैम्बलिंग ऐप बैन कर दिए थे। पड़ताल में पता चला कि ऐसे सैकड़ों ऐप अब भी चल रहे हैं।
हमने बुकी और इस बिजनेस से जुड़े लोगों से बात करके कुछ वेबसाइट्स/ ऐप की लिस्टिंग की है। इनके अलावा भी बड़ी संख्या में गेम के नाम पर गैम्बलिंग करवाने वाली वेबसाइट्स चल रही हैं।
- काम करने का तरीका क्या है
पहले लोगों को ज्यादा पैसा कमाने का लालच दिया जाता है। इसके लिए इंस्टाग्राम, टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म यूज करते है। सेलेब्स के जरिए प्रमोशन करवाया जाता है।
यूजर सिर्फ वॉट्सऐप नंबर पर ही कॉन्टैक्ट कर सकता है। कॉन्टैक्ट करने पर उसे दो नंबर दिए जाते हैं।
एक नंबर पैसा डिपॉजिट करने के लिए होता है। दूसरा नंबर यूजर आईडी के लिए होता है, जिसके जरिए बेटिंग की जाती है।
पेमेंट UPI के जरिए प्रॉक्सी बैंक अकाउंट्स में पेमेंट लेते हैं।
प्रॉक्सी अकाउंट्स में आने वाला अमाउंट हवाला, क्रिप्टो और दूसरे गैरकानूनी रूट्स के जरिए इधर से उधर किया जाता है।
इंडियन बैंक अकाउंट से जुड़ी पेमेंट प्रॉक्सी को बदल देते हैं, मतलब जिस रूट से ट्रांजैक्शन हो रहा है, वो पता नहीं चलता। रूट कुछ ओर दिखता है, पेमेंट कहीं ओर जाता है।
इस तरह की ज्यादातर वेबसाइट्स साइप्रस, माल्टा, कुराकाओ, मॉरीशस और केमैन आइलैंड जैसे देशों में रजिस्टर्ड हैं। यहां सट्टेबाजी कानूनी है।
- भारत में सट्टा बैन
US में रजिस्ट्रेशन, कुराकाओ का लाइसेंस
गैम्बलिंग करवाने वाली वेबसाइट्स के डोमेन फॉरेन कंट्रीज में बुक होते हैं। इनके सर्वर भी वहीं होते हैं। इन देशों में गैम्बलिंग लीगल और टैक्स कम है। वहीं से बैठकर भारत में सट्टा खिलाया जाता है।
पड़ताल में सामने आया कि गेमिंग के नाम पर सट्टा खिलाने वाले ज्यादातर मोबाइल ऐप्स महादेव बेटिंग, महादेव बुक या रेड्डी अन्ना बुक के नाम पर रजिस्टर्ड हैं। इस पूरे नेक्सस के पीछे सबसे बड़ा प्लेयर महादेव है। इस ग्रुप की अलग-अलग नाम से 5 हजार से भी ज्यादा वेबसाइट्स हैं।
khael.shop, ReddyAnna US के एरिजोना में रजिस्टर्ड हैं। एरिजोना का कानून गैम्बलिंग को सपोर्ट करता है। वहां टैक्स भी कम लगता है। पड़ताल में पता चला कि महादेव बुक के लाइसेंस पर ही ज्यादातर वेबसाइट्स चल रही हैं। महादेव ने कुराकाओ से लाइसेंस लिया है। इसी लाइसेंस से ज्यादातर कंपनियों ने एरिजोना में रजिस्ट्रेशन करवाया है।
- ऐप ऐसे सिंक्रोनाइज करते हैं कि कंपनी को ज्यादा प्रॉफिट होता है
टेक एक्सपर्ट सिद्धार्थ राजहंस के मुताबिक, यदि ऑनलाइन गैम्बलिंग को स्किल बेस्ड गेम माना जाए तो हमें यह समझना होगा कि ऐप एल्गोरिदम पूरे गेम को कंट्रोल करता है। इसे इस तरह से सिंक्रोनाइज किया जाता है कि प्लेयर्स से ज्यादा प्रॉफिट कंपनी बनाती है।
अगर गेम को स्किल गेम के तौर पर क्लासिफाइड किया जा रहा है, तो इसमें एनालिटिक्स स्टैटिस्टिक्स और डेटा स्टडी को शामिल करना चाहिए। अनुमान पर आधारित डिसिजन को स्किल नहीं माना जा सकता।
क्रिकेटबैट 9 क्रिकेटबज की मिरर वेबसाइट है। क्रिकेटबज बैन हुआ, तो उसके ऑपरेटर्स ने क्रिकेटबैट 9 वेबसाइट शुरू कर दी। इसका मेन ऑपरेशन चंडीगढ़ से हो रहा है। इनके पास महादेव बुक का ही लाइसेंस है।
महादेव बुक ने ही कई वेबसाइट्स को अपने नाम का लाइसेंस दे रखा है। इन्होंने खुद को भारत में नहीं बल्कि कुराकाओ में रजिस्टर्ड करवा रखा है। इसलिए फ्रॉड करने के बावजूद ये कंपनियां बच जाती हैं।
वहीं, अहमदाबाद के टेक एक्सपर्ट ध्रुव पंडित के मुताबिक, इन ऐप्स ने खुद की ऐसे ब्रांडिंग की है कि जैसे ये गेम खिलवाते हैं। हकीकत में सब सट्टा ही है। ऐप पर सब बेटिंग ही करते हैं। ये ऐप्स एल्गोरिदम पर कंट्रोल होते हैं। शुरुआत में जिताया जाता है, ताकि यूजर को लत लगे, फिर उसे लूटा जाता है। ये ऐप्स ह्यूमन इंटरफेस से होकर गुजरते हैं। इन्हें लगातार मॉनिटर किया जाता है।
- सब पता होने के बाद भी लोग गैम्बलिंग में क्यों फंस जाते हैं।
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में साइकेट्रिस्ट डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी कहते हैं, ‘हमारे ब्रेन में रिवॉर्ड सेंटर होता है। वहां से हमें प्लेजर फील होता है, अच्छा लगता है। ये फूड, सेक्स और अचीवमेंट्स से क्रिएट होता है। ऑनलाइन बेटिंग ऐप्स में इसलिए शुरू में जिताया जाता है, ताकि हम अच्छा फील करें।’
डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी बताते हैं, ‘मेरे पास मेडिकल स्टोर चलाने वाले 45 साल के आदमी का केस आया था। वे 10 लाख रुपए ऑनलाइन गेमिंग में हारे थे। बेंगलुरु के एक आईटी इंजीनियर के 12 से 15 लाख रुपए डूबे थे। एक इंजीनियरिंग स्टूडेंट 11 हजार रुपए हार गया था।’
‘इनमें से कोई डिप्रेशन का शिकार हुआ। किसी ने शराब पीना शुरू कर दिया। स्टूडेंट का पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था, जिसका असर उसके ग्रेड पर हुआ। ऐसे लोग शर्म की वजह से किसी से हेल्प नहीं मांगते। सेलेब्स की पब्लिसिटी की वजह से भी यंगस्टर्स गेमिंग ऐप्स के चक्कर में फंस रहे हैं।’
- हार के गिल्ट में आकर और पैसे लगाते हैं
इंदौर के अंकुर रिहैब सेंटर के एमडी डॉ. अंकुर अग्रवाल कहते हैं, ‘ऑनलाइन सट्टे में यूजर शुरुआत में कमाने के लिए खेलता है, लेकिन ऑनलाइन गेम की प्रोग्रामिंग इस तरह होती है कि वे आपको ऑड और ईवन सीक्वेंस में हराते और जिताते हैं। आखिर में यूजर हारता ही है।’
‘हमारे ब्रेन के अंदर रिवॉर्डिंग केमिकल डोपामाइन होता है। एक बार रिवॉर्ड मिलने पर हम बार-बार रिवॉर्ड की कोशिश करते हैं। फिर पैसे हार जाते हैं, तो गिल्ट में आ जाते हैं। इस गिल्ट की भरपाई के लिए और ज्यादा पैसे लगाते हैं।’
- गेमिंग ऐप का बाजार
गेमिंग ऐप का ऐडवर्टाइजिंग शेयर 3 से 18% पर पहुंचा
बीते कुछ साल में भारत में फैंटेसी ऐप्स की पॉपुलैरिटी तेजी से बढ़ी है। ड्रीम 11, माय सर्कल 11, MPL जैसे प्लेटफॉर्म्स पर लाखों यूजर्स पहुंच रहे हैं। फैंटेसी गेमिंग ऐप्स इंडियन प्रीमियर लीग, यानी IPL के 16वें सीजन में टॉप ऐडवर्टाइजर्स थे। TAM मीडिया रिसर्च की ऐडवर्टाइजिंग रिपोर्ट के मुताबिक, इनका शेयर पिछले IPL से 15% बढ़कर 18% हो गया।
सौरव गांगुली, विराट कोहली, शुभमन गिल, हार्दिक पंडया के साथ ही आमिर खान, आर माधवन, शरमन जोशी इन्हें इंडोर्स करते हैं। कंसल्टेंसी RedSeer की रिपोर्ट के मुताबिक 2022 के मुकाबले 2023 में फैंटेसी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स की इनकम 24% बढ़ी है। ये अब 341 मिलियन डॉलर या 2800 करोड़ हो गई है। इस दौरान 6 करोड़ यूजर्स ने फैंटेसी गेमिंग एक्टिविटी में हिस्सा लिया। इनमें से करीब 65% छोटे शहरों से आते हैं।
ये गेमिंग ऐप यूजर से एंट्री फीस लेते हैं। उनकी टीम के अंडर परफॉर्म रहने पर पैसा डूबने का डर होता है। ड्रीम-11 भारत का सबसे बड़ा फैंटेसी स्पोर्ट्स प्लेटफॉर्म है। इसके 20 करोड़ रजिस्टर्ड यूजर हैं। MPL 9 करोड़ और माय सर्कल-11 4 करोड़ यूजर्स होने का दावा करते हैं।
- गेमिंग ऐप के जरिए गैम्बलिंग को रोका क्यों नहीं जा सकता
भारत में फैंटेसी गेमिंग ऐप्स को कंट्रोल करने के लिए पब्लिक गैम्बलिंग एक्ट 1867 का इस्तेमाल होता है। ये एक्ट देश में सभी तरह की गैम्बलिंग रोकता है। हालांकि, ये ऐसे गेम्स को नहीं रोक पाता, जिनमें स्किल इन्वॉल्व होती है। इनके विज्ञापन मिसलीडिंग होते हैं, जिसमें काफी पैसा जीतते हुए दिखाया जाता है। असलियत में ज्यादातर प्लेयर बहुत छोटा अमाउंट जीतते हैं।
- महादेव ऐप बैन, लेकिन उसके जैसे ऐप अब भी सट्टा खिला रहे
छत्तीसगढ़ में महादेव बेटिंग ऐप का मामला सामने आने के बाद केंद्र सरकार की इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मिनिस्ट्री ने 122 गैरकानूनी बेटिंग ऐप्स को बैन किया है। महादेव ऐप पर अलग-अलग तरह के गेम्स खिलाए जाते थे। इनमें कार्ड गेम्स, चांस गेम्स, क्रिकेट, बैडमिंटन, टेनिस, फुटबॉल शामिल थे। इनके जरिए यूजर आईडी क्रिएट कर सट्टा खिलाया जा रहा था। मनी लॉन्ड्रिंग हो रही थी और पैसा बेनामी अकाउंट में जा रहा था।
ED ने एक आरोपी असीम दास के हवाले से ये भी बताया कि महादेव ऐप के प्रमोटर ने UAE से कैश कूरियर के जरिए छत्तीसगढ़ के पूर्व CM भूपेश बघेल को 508 करोड़ रुपए दिए थे। हालांकि, बाद में असीम दास बयान से मुकर गया था। इसके पहले मार्च में IT मिनिस्ट्री ने 138 बेटिंग और गैम्बलिंग ऐप बैन किए थे।
केंद्र सरकार भले इन बेटिंग ऐप्स को बैन कर चुकी है, लेकिन हमारी इनवेस्टिगेशन में सामने आया है कि कई बेटिंग ऐप्स अब भी चल रहे हैं। ये एकदम उसी पैटर्न पर हैं, जैसे महादेव बेटिंग ऐप ऑपरेट हो रहा था। टेक एक्सपर्ट के मुताबिक, ये ऐप मिरर वेबसाइट से चलते रहते हैं, यानी सरकार किसी ऐप को बैन करती है, तो उसका नाम बदलकर दोबारा शुरू कर दिया जाता है।
सवाल: ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर चल रहीं वेबसाइट्स वाकई फ्रॉड करती हैं या लोग उनमें पैसा हारते हैं?
जवाब: ये दोनों बातें हो सकती हैं। कुछ जगह फ्रॉड हो जाता है और कुछ जगह ऑनलाइन बेटिंग में हार हो जाती है। फ्रॉड कई तरह से होता है। पहला ऐसे कि कुछ रुपए लगातार जिताते हैं और फिर कुछ रुपए आप हार जाते हैं। ऐप के लोग कहते हैं और पैसा लगाने पर आप जीत जाएंगे।
दूसरा ऐसे कि कुछ पैसा दीजिए और आपसे कोई लिंक डाउनलोड करवा देंगे। ये भी होता है कि कोई लिंक आपको भेजेंगे और आपसे OTP पूछ लेंगे। इस तरह से फाइनेंशियल फ्रॉड होता है।
सवाल: क्या ऐप के सॉफ्टवेयर में पहले से कोडिंग होती है, जिससे एक स्टेज के बाद यूजर हारने लगता है?
जवाब: इनके सॉफ्टवेयर में कोडिंग भी हो सकती है। कई बार यूजर नॉर्मली भी सट्टा हारते हैं। अलग-अलग केस में अलग-अलग प्रक्रिया होती है। ये लोग फ्रेंचाइजी देने से लेकर एजेंट तक से काम करवा रहे हैं।
सवाल : क्या गेमिंग ऐप के जरिए ब्लैकमनी को वॉइट किया जा रहा है?
जवाब: गेमिंग ऐप के जरिए ऐसा किया जा सकता है। ये टेक्निकली पॉसिबल है।
- भारत में किसी भी तरह की बेटिंग अपराध
मध्यप्रदेश में साइबर सेल के ADGP योगेश देशमुख बताते हैं कि भारत में किसी भी तरह की बेटिंग अपराध है। गेम ऑफ स्किल अलग है, लेकिन अगर कोई ऑनलाइन बेटिंग करवाता है तो जानकारी मिलने पर पुलिस एक्शन लेती है। कई बार ऑनलाइन बेटिंग करवा रही वेबसाइट्स के सर्वर देश से बाहर होते हैं। बहुत सी इन्फॉर्मेशन मिल नहीं पाती। कोऑर्डिनेशन का भी इश्यू होता है।

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