नई दिल्ली/ नाभि शरीर का महत्वपूर्ण अंग है। इसकी सही देखभाल और सफाई का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। नाभि में इंफेक्शन हो जाए तो क्या हो सकता है, नाभि में जमा गंदगी को कैसे साफ करें। इंटरनल मेडिसिन के डॉ. रविकांत चतुर्वेदी नाभि की देखभाल से जुड़ी जरूरी जानकारी दे रहे हैं।
नहाते समय कई लोग नाभि की सफाई का ध्यान नहीं रखते। हाइजीन की कमी के कारण नाभि में इंफेक्शन हो सकता है, जिसके कारण कई बार नाभि से बदबू भी आने लगती है। कई लोग नाभि को छिदवाते हैं यानी पियर्सिंग कराते हैं जिससे इंफेक्शन की संभावना बढ़ जाती है। नहाते समय नाभि की सफाई का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
नाभि से रुई निकलने की वजह
कुछ लोग अक्सर ये शिकायत करते हैं कि उनकी नाभि से रूई निकलती है, ऐसा क्यों होता है?
नाभि से रुई निकलने की वजह बताते हुए डॉ. रविकांत कहते हैं कि नाभि के अंदर से रुई नहीं निकलती। लेकिन कुछ लोगों की नाभि पर रुई जमा होती है।
ऐसा कपड़ों की वजह से होता है। बनियान, टी-शर्ट, शर्ट की रगड़ से उसके रेशे नाभि में रह जाते हैं जो जमा होकर रुई की तरह दिखाई देते हैं। ऐसे में नाभि से रुई निकलते देख लोग हैरान रह जाते हैं, लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसा होना नॉर्मल है।
शरीर से गंदगी झड़ जाती है
शरीर का ये नियम है कि बॉडी में जहां कहीं भी गंदगी जमा होती है, यदि उसे साफ न किया जाए तो वह सूख कर झड़ जाती है। कान, नाक, नाभि पर जमी गंदगी भी साफ न करने पर अपने आप झड़ जाती है।
इसलिए नाभि की सफाई करने के लिए अलग से कुछ नहीं करना होता है। नाभि में सरसों तेल लगाने की वजह यही है कि तेल लगाने से गंदगी बाहर निकल जाएगी।
साबुन के झाग से हो सकता है इंफेक्शन
नहाते समय नाभि की सफाई पर विशेष ध्यान दें। नाभि में यदि साबुन का झाग रह जाए तो शरीर में खुजली, जलन, रैशेज की शिकायत हो सकती है, जिससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है।
- नाभि में साबुन का झाग न जमने दें, उसे अच्छी तरह साफ करें।
- नाभि का घाव जल्दी ठीक नहीं होता
- नाभि में तेल लगाते समय या नहाते समय नाखून लग जाए या किसी और वजह से घाव हो जाए, तो उसे ठीक होने में समय लगता है।
- नाभि का सीधा कनेक्शन पेट से होता है इसलिए यहां के इंफेक्शन को ठीक होने में समय लगता है।
- नाभि में किसी भी तरह का घाव हो जाए तो उसका इलाज तुरंत कराएं। नाभि के घाव का जल्दी सूखना जरूरी है, वरना इंफेक्शन ठीक होने में ज्यादा समय लग सकता है।
शिशु की नाभि में क्यों लगाया जाता है तेल
अम्बिलिकल कॉर्ड यानी गर्भनाल एक तरह का छेद होता है जहां से मां और बच्चे का डायरेक्ट कनेक्शन होता है। गर्भनाल से ही बच्चे को मां से आहार मिलता है।
डिलीवरी के समय गर्भनाल को काट दिया जाता है, जिससे मां और बच्चे का डायरेक्ट कनेक्शन टूट जाता है। गर्भनाल को काट कर बांध दिया जाता है।
काटने के बाद जब गर्भनाल में ऑक्सीजन और ब्लड नहीं जाता, तो वो डेड सेल हो जाता है। धीरे-धीरे वो बच्चे के नाभि से झड़ जाता है। उसके बाद नाभि एक गड्ढे की तरह दिखाई देने लगती है।
बच्चे के जन्म के कुछ दिन बाद से लेकर दो-तीन साल तक उसकी नाभि में तेल लगाया जाता है। भारत में ज्यादातर घरों में बच्चों की नाभि पर सरसों का तेल लगाया जाता है।
बच्चे की नाभि पर तेल इसलिए लगाया जाता है, क्योंकि वहां पर जो ग्लैंड्स होते हैं वहां आसपास गंदगी जमने लगती है। तेल लगाने से गंदगी आसानी से निकल जाती है।
नाभि में सरसों का तेल लगाने के फायदे
नाभि या शरीर में सरसों का तेल लगाने के कई फायदे हैं। नवजात शिशु से लेकर बड़ों तक, सभी के लिए यह तेल लगाना फायदेमंद होता है। नाभि में सरसों का तेल लगाने से गंदगी बाहर निकल जाती है और इंफेक्शन से बचाव होता है।
सरसों का तेल शरीर में एक लेयर बना देता है जिससे हवा शरीर में नहीं जा पाती। इसीलिए बचपन में, खासकर सर्दियों में हमारे बड़े-बुजुर्ग नहाने से पहले हमारी सरसों के तेल से मालिश करते थे। फिर हमें नहलाते थे। ऐसा इसलिए किया जाता था ताकि सर्द हवाओं से हमारा बचाव हो सके। बच्चे ही नहीं, बड़े भी सर्दियों में नहाने से पहले सरसों के तेल से मालिश करते हैं। ये शरीर के लिए ठंडी हवाओं से प्रोटेक्शन का काम करता है।
सरसों के तेल की तासीर गर्म होती है। इसे लगाने से स्किन इंफेक्शन जल्दी नहीं होता। ये शरीर के फोड़े-फुंसियों को ठीक कर देता है।
ऐसे करें नाभि की केयर
नाभि शरीर का वो अंग है, जहां हमारी गर्भनाल जुड़ी होती है। हर व्यक्ति की नाभि की शेप और साइज अलग होती है, लेकिन इसकी देखभाल के नियम सबके लिए एक जैसे हैं। पूरे शरीर की तरह नाभि की सही देखभाल बहुत जरूरी है।
नाभि की ठीक से सफाई न की जाए तो वहां पर बैक्टीरिया जमा होने के कारण इंफेक्शन हो सकता है। कई बार गंदगी और इंफेक्शन के कारण नाभि से बदबू तक आने लगती है।
ऐसी स्थिति में तुरंत इलाज कराना चाहिए, वरना इंफेक्शन बढ़ सकता है। इंफेक्शन की स्थिति में नाभि को गीला न रहने दें। टाइट कपड़े न पहनें, कपड़ों पर पसीना या गंदगी न जमने दें।
पियर्सिंग से भी हो सकता है इंफेक्शन
कुछ महिलाएं स्टाइलिश दिखने के लिए नाभि में पियर्सिंग करवाती हैं, लेकिन ये नाभि की सेहत के लिए सही नहीं है। पियर्सिंग के बाद नाभि में गंदगी जमा होने या पस बनने के कारण इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है।
यदि आपको नाभि में तेज दर्द, किसी तरह का लिक्विड डिस्चार्ज, दर्द, फोड़े-फुंसियां हो जाएं, तो यह नाभि के इंफेक्शन के संकेत हो सकते हैं। नाभि में बैक्टीरिया और गंदगी जमा होने से इंफेक्शन बढ़ने लगता है।
इंफेक्शन होने पर सबसे पहले इसका कारण जानें, ताकि आप आगे से ये गलती न करें। इंफेक्शन शुरू होते ही तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। इंफेक्शन हटाने के लिए डॉक्टर एंटीफंगल या एंटीबायोटिक क्रीम, ओरल एंटीबायोटिक्स दे सकते हैं।
डॉक्टर के बताए अनुसार इनका नियमित रूप से उपयोग करें। नाभि की सफाई करने के लिए कॉटन बॉल को एंटीमाइक्रोबियल सोप और गर्म पानी के घोल में डुबोएं। इससे नाभि की सफाई करना आसान है।

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