बेटे का अमेरिका में कार एक्सीडेंट से मौत, अंतिम दर्शन के लिए तड़पा परिवार; शव इंडिया लाने में 50 लाख का खर्च
20 दिन बाद मिलेगा शव; इंडिया लाने में 50 लाख का खर्च
करनाल/ हरियाणा के करनाल के कोहंड गांव के नितिन मित्तल का शव अमेरिका से भारत लाने में करीब 50 लाख का खर्च आएगा। अमेरिका में क्रिसमस की छुट्टियों के कारण अभी पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो पा रही है। पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया भी मजिस्ट्रेट की देखरेख में होगी। इसके बाद डेथ सर्टिफिकेट रिलीज किया जाएगा और उसके बाद आगामी प्रक्रिया शुरू होगी। पूरी प्रक्रिया में 20 से 25 दिन लग सकते हैं।
बताया जा रहा है कि एक्सीडेंट में नितिन के शव को भारी नुकसान पहुंचा है और इतने दिनों तक शव को सलामत रख पाना भी आसान नहीं है। एक्सीडेंट के बाद कार की तस्वीर तो अमेरिका से परिजनों तक पहुंच गई है, लेकिन मृतक की फोटो या वीडियो अभी पुलिस की तरफ से रिलीज नहीं की गई है। ऐसे में परिजन अपने बेटे के अंतिम दर्शनों के लिए भी तड़प रहे हैं।
शव को भारत लाने की प्रक्रिया काफी जटिल भी है और इतने दिनों तक शव को सहेज कर भी नहीं रखा जा सकता। ऐसे में मृतक का अंतिम संस्कार अमेरिका में भी किया जा सकता है। परिवार के सामने असमंजस की स्थिति है और पिता सरकार से भी मदद की गुहार लगा रहा है।
- डारसेल के 336 ऑफिस संभालता था नितिन
पिता विजय मित्तल ने बताया कि नितिन ने अपनी माध्यमिक शिक्षा कोहंड गांव के एक प्राइवेट स्कूल से की थी। उसके बाद उसने घरौंडा के एक प्राइवेट स्कूल में दाखिला लिया था। 11वीं के बाद ही वर्ष 2006-2007 में वह दिल्ली में अपने मामा के पास चला गया था। चूंकि नितिन काफी इंटेलिजेंट था और उसे जाते ही वहां पर डारसेल कंपनी में जॉब मिल गई थी। 11 साल तक वह डारसेल कंपनी में काम करता रहा। अब वह अकाउंट मैनेजर बन चुका था।
उसके अधीन 336 ऑफिस थे। अकाउंट मैनेजर के बाद वह डायरेक्टर के पद पर जाने वाला था। कंपनी की तरफ से नितिन विदेशों में भी विजिट करता रहता था। उसके पास 25 देशों के वीजा थे। डारसेल में वह प्रति माह करीब डेढ़ लाख रुपए कमा रहा था। दिल्ली में अपने मामा के पास रहते हुए ही उसने अपनी आगे की पढ़ाई भी की। वह आगे बढ़ना चाहता था।
- स्पोंसर बेस पर पहुंच गया अमेरिका
परिजनों ने बताया कि नितिन हमेशा से ही विदेश जाने की बातें करता था। वह इंग्लिश सब्जेक्ट पर ज्यादा ध्यान देता था और अंग्रेजी भाषा की मूवी और सीरियल देखता था। उसकी इंग्लिश मजबूत पकड़ थी। डेढ़ साल पहले ही उसे स्पोंसर बेस पर अमेरिका में नौकरी मिली। वह अपने दम पर ही अमेरिका पहुंचा था।
पिता विजय मित्तल ने बताया कि अमेरिका में जाने के लिए करीब 35 लाख रुपए खर्च हुए थे। वहां पर वाको फूड मार्ट में उसे मैनेजर की नौकरी मिली थी। जहां पर करीब 5 लाख रुपए मंथली वह कमा रहा था, लेकिन उसके पिता ने कहा था कि वह अपना ध्यान रखे और पैसे को अपने ऊपर ही खर्च करें।
- 3 दिन पहले बनवाया था ग्रीन कार्ड
अमेरिका में वाको फूड मार्ट के 10 मॉल नितिन के अंडर थे। नितिन अकाउंट मैनेजर था। वह यूस्टर्न में 4 दिन रहता था और 3 दिन वाको के मॉल को देखता था। जिसका मेन काम अमाउंट कलेक्शन का था। उसने वहां पर मेहनत की और 3 दिन पहले ही उसने अपना ग्रीन कार्ड भी बनवा लिया था। वह खुश था और अपने घर वालों को बताया था कि वह अब सभी भाइयों को अमेरिका में सेट कर देगा
पिता विजय ने बताया कि कंपनी की तरफ से उसे क्यूएस-5 गाड़ी दी हुई थी, लेकिन वह अपनी गाड़ी खरीदना चाहता था और हादसे वाले दिन वह अपनी गाड़ी देखने के लिए भी जाने वाला था।
जानें- कब निकला, कैसे हादसा हुआ और कैसे घर वालों तक पहुंची खबर
जानकारी के अनुसार नितिन 23 दिसम्बर को अमेरिकन समय के अनुसार 12 बजे अपने कमरे से निकला था। उसके साथ कमरे पर ही डाहर गांव का रोहित भी रहता है और उसी के अंडर काम करता है। कमरे से दो मिनट की दूरी पर ही वाको का मॉल है, जहां पर रोहित काम करता है। उसने वहां पर रोहित को छोड़ा था।
मॉल में ही उसने 1.46 बजे फ्यूल डलवाया और दूसरे मॉल पर जाने के लिए निकल पड़ा। नितिन के पास 2.12 बजे लास्ट कॉल हुई है। उसके पास विनीत नामक युवक ने कॉल किया था, विनीत रोहित की मौसी का लड़का है और वह भी दूसरे मॉल में काम करता है।
विनीत को नितिन ने बताया था कि वह 15 मिनट में मॉल पर पहुंच जाएगा, लेकिन वह नहीं पहुंचा। पिता विजय ने बताया कि जब चार घंटे तक भी नितिन नहीं पहुंचा तो विनीत अपने कुछ साथियों के साथ नितिन को सर्च करने के लिए निकल पड़ा। वह हादसे वाली जगह पर जरूर पहुंच गया, लेकिन वहां कुछ नहीं मिला।
पुलिस ने घटनास्थल से सब कुछ साफ कर दिया था। तभी वहां पर पुलिस आई और उन लोगों से पूछताछ की कि आप यहां क्यों है तो उन्होंने बताया कि हमारा एक बंदा मिसिंग है, तो पुलिस वालों ने नितिन का ड्राइविंग लाइसेंस दिखाकर शिनाख्त करवाई और बताया कि इसकी डेथ हो गई है। नजदीकी अस्पताल के मोर्चरी में शव रखा गया है।
शव को भारत लाने की जद्दोजहद में पूरा परिवार
नितिन की मौत के बाद उसके मां, बाप, भाई, बहन, सगे संबंधियों व दोस्तों का रो-रोकर बुरा हाल है। उसके शव को भारत लाने के लिए एक जटिल प्रक्रिया है। चूंकि शव के हालात भी ठीक नहीं है और 20 से 25 दिन का समय लग सकता है। मजिस्ट्रेट की निगरानी में पोस्टमार्टम होगा और डेथ सर्टिफिकेट बनेगा। जिसके बाद आगे की प्रोसेस शुरू होगी।
परिवार के पास 3 विकल्प
ऐसे में अब परिवार के सामने तीन विकल्प है। पहला, वहां के हिंदू संगठन के माध्यम से हिंदू रीति रिवाज़ से दाह संस्कार करवाया जाए। दूसरा, दाह संस्कार के लिए कोई परिवार का सदस्य अमेरिका पहुंचे और अंतिम संस्कार करवाया जाए और तीसरा, शव को भारत लाया जाए, लेकिन तीसरा ऑप्शन एक जटिल प्रक्रिया का हिस्सा है। जिस पर करीब 50 लाख रुपए खर्च होने की संभावना है।
ऐसे में परिवार के पास ऑप्शन तो है लेकिन वह भी स्थिति और परिस्थिति पर निर्भर करता है। अब देखने वाली बात यह है कि कब तक नितिन का शव भारत आ पाता है या फिर अमेरिका में ही हिंदू रीति रिवाज के साथ दाह संस्कार किया जाता है। फिलहाल परिवार के प्रयासों में कोई कमी नहीं है कि वे अपने बेटे के शव को भारत लेकर आए।


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