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खाद्य एवं औषधि विभाग के अधिकारियों द्वारा अवैध कारोबार को खुला संरक्षण

 रायपुर/ छ.ग. में तीन साल के अन्दर सहायक औषधि नियंत्रकों ने सैकड़ों मेडिकल स्टोरों को नशीली दवा का अवैध कारोबार करते हुए पकड़ा है जिसमें से मात्र 5 पांच मेडिकल स्टोरों के ही लाईसेंस को रद्द किया गया है बाकि नशीली दवा वाले मेडिकल स्टोरों को दो चार दिन के लिए निलंबित कर गलत ढंग से छोड़ दिया गया है जिसके कारण मेडिकल स्टोर वाले खुलेआम नशीली दवा का कारोबार अवैध रूप से कर रहे हैं।

नशीली दवा वाले मेडिकल स्टोरों के लाईसेंस को रद्द नहीं करके उनको संरक्षण देने वाले सहायक औषधि नियंत्रकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई किया जाना आवश्यक है। छ.ग. में लगभग 50 प्रतिषत मेडकल स्टोर किराए के लाईसेंस में चल रहा है इन मेडिकल स्टोरों में फार्मासिस्ट उपस्थित नहीं रहता जिसे ड्रग इंस्पेक्टर लोग जांच के दौान पकड़ते भी हैं और फार्म 35 के निरीक्षण रिपोर्ट में लिखते भी हैं, इन मेडिकल स्टोरों के लाईसेंस को भी रद्द होना आवश्यक है लेकिन मिलीभगत के कारण लाईसेंस को रद्द नहीं किया जाता, जिस मेडिकल स्टोर से ईनाम नहीं मिलता उसके लाईसेंस को रद्द किया जाता है। 

मेडिकल दुकानों में फार्मासिस्ट नहीं बैठाने वालों के लाईसेंस को भी रद्द होना आवश्यक है। फार्मासिस्ट नहीं बैठाने वाले मेडिकल स्टोरों के लाईसेंस को रद्द नहीं करके उनको संरक्षण देने वाले सहायक औषधि नियंत्रकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होना आवश्यक है। ड्रग इंस्पेक्टरों के फार्म 35 में लिखे गए निरीक्षण रिपोर्ट को देखकर सहायक औषधि नियंत्रकों के मनमानी को पकड़ा जा सकता है। सूचना का अधिकार के तहत् मेरे द्वारा जानकारी निकाला गया है।

कई बिमारी के दवा को ज्यादा मात्रा में खाने एवं पिने पर षराब जैसा नषा करता है इन नषीली दवाओं को डाॅक्टरों के पर्ची में ही बिक्री करना आवश्यक है लेकिन ज्यादा मुनाफा के चक्कर में कई मेडिकल वाले बिना डाॅक्टरी पर्ची के ही गलत ढंग से नषेड़ियों को बिक्री कर रहे हैं जिसे ड्रग इंस्पेक्टर लोग जांच में मेडिकल स्टोरों को पकड़ते हैं लेकिन मेडिकल स्टोरों के लाईसेंस को रद्द नहीं करते जो कि बहुत ही गलत है।

छ.ग. में हर साल लगभग 2000 दो हजार प्रकरण खाद्य सामानों में मिलावट का बनता है इन मिलावटखोरों के खाद्य लाईसेंस को रद्द होना आवश्यक है लेकिन खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा मिलीभगत एवं मनमानी करके खाद्य लाईसेंस को रद्द नहीं किया जा रहा है जो कि बहुत ही गलत है मनमानी करने वाले खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होना आवष्यक है। छ.ग. के अधिकतर खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा भारी लापरवाही एवं मनमानी किया जा रहा है जिसके कारण लगभग 50 प्रतिषत खाद्य व्यवसायियों के पास वर्तमान में खाद्य लाईसेंस नहीं है।


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