सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

रायगढ़ जिले में राजस्व अधिकारी और भू-माफिया की मिलीभगत ने मुआवजे के नाम पर करोड़ों का घोटाला किया

 कागजों पर बनाई सड़क, बिल्डिंग व मंदिर 

रायगढ़/  राजस्व अधिकारी और भू-माफिया की सांठगांठ से भू-अर्जन के नाम पर की गई धांधली की पोल जल्द खुल सकती है। दूसरे दिन शुक्रवार को भी भू-अभिलेख के संचालक रमेश शर्मा के साथ रायपुर से पहुंचे राजस्व अफसरों में आरए पटवारी की टीम ने तमनार के बजरमुड़ा में मुआवजे में बंदरबांट की शिकायतों की जांच की।


टीम ने फोटो और वीडियोग्राफी भी कराई है। दरअसल, तमनार ब्लॉक के बजरमुड़ा, ढोलनारा मिलूपारा समेत आसपास के कई गांव में मुआवजे के नाम पर करोड़ों की धांधली की गई है। निजी कंपनियों के अधिग्रहण में ऐसी धांधली नहीं होती, लेकिन यहां अर्जन सरकारी प्रोजेक्ट के लिए था, इसलिए अफसर, माफिया ने जमकर लूट की। एलएलएम के स्टूडेंट दुर्गेश शर्मा ने अखबारों में भू-अर्जन में व्यापक धांधली की बात पढ़ी तो उन्होंने गांव का दौरा किया। सूचना का अधिकार लगाया, ताकि जानकारी जुटा सके। राजस्व विभाग ने बड़ी मुश्किल से जानकारी दी, लेकिन अधूरी। जनवरी 2023 में उन्होंने शासन को शिकायत भेजी। 25 अक्टूबर और 5 दिसंबर को उन्हें बयान के लिए बुलाया गया। गुरुवार को टीम बजरमुड़ा पहुंची थी।

शिकायतकर्ता शर्मा ने बताया कि सारी गड़बड़ियां घरघोड़ा के तत्कालीन एसडीएम अशोक मार्बल के कार्यकाल में हुईं। वहीं भास्कर ने तत्कालीन एसडीएम अशोक मार्बल से बात की। अशोक ने कहा, मैं भू-अर्जन अधिकारी था, मेरे समक्ष जो गणना पत्रक प्रस्तुत किया गया, मैंने उसके आधार पर मुआवजा बंटवाया। मौके पर स्थित देखने राजस्व के अमले के साथ ही पीडब्ल्यूडी का अधिकारी था, जिसने निर्माण की पुष्टि की थी। किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई है।

शिकायतकर्ता दुर्गेश ने बताया कि आरटीआई के तहत जानकारी मिलने के बाद उन्होंने कई घरों की तस्दीक की थी। कुछ पक्के घरों में टाइल्स लगाना बताया गया था। वहां दरअसल टाइल्स रखकर राजस्व अमले से सत्यापन कराया, टाइल्स लगी नही है। टुकलाल और खेमानिधि का कच्चा मकान (अब भी यथास्थिति) है, जिसे दो मंजिला पक्का मकान बताकर करोड़ों रुपए का मुआवजा दिया गया है।

बिना काम सिर्फ नाम चढ़ाकर बांटा मुआवजा घरघोड़ा सब डिविजन के राजस्व अफसर व कर्मियों की मिलीभगत के बिना यह धांधली संभव नहीं है। मधुमक्खी पालन करना बता अजय सिदार को मुआवजे के रूप तीन करोड़ 10 लाख 38 हजार दिए, जबकि यह जमीन आबादी जमीन थी। नेतराम पिता दुबराज को शौचालय के नाम पर 88 लाख 60 हजार, मंदिर के नाम पर 44 लाख दिए।

मुआवजा देने से पहले टीम सर्वे करती है। निर्माण की लागत का आंकलन करने पीडब्ल्यूडी का इंजीनियर होता है, फिर गणना पत्रक में ऐसी गड़बड़ी कैसे हुई। दुर्गेश ने अश्वनी को 55 करोड़, खेमानिधि, टुकलाल को 34 करोड़, संतोष नायक, यादलाल को 11 करोड़, माधवलाल, ज्वाला प्रसाद, बाबूलाल को 27 करोड़, पूरनलाल, हेमसागर को 15 करोड़ देने की भी शिकायत की है।

टिप्पणियाँ