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रीएजेंट सप्लाई का बड़ा खेल: ऐसे पीएचसी में भी सप्लाई किया गया जहां खून की जांच होना तो दूर इसके संचालन के लिए पद तक नहीं हैं

रायपुर/ मोहम्मद निजाम छत्तीसगढ़ के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में पिछले 6 माह में 300 करोड़ रुपए से ज्यादा की रीएजेंट सप्लाई का बड़ा खेल फूटा है। रीएजेंट खून की जांच में उपयोग होने वाले 32 तरह के केमिकल होते हैं। इनके साथ 800 ऑटो एनालायजर मशीनें भी खरीदी गईं। इन्हें ऐसे पीएचसी में भी सप्लाई किया गया जहां खून की जांच करना तो दूर, लैब तकनीशियन तक के पद नहीं हैं।

रीएजेंट सप्लाई का बड़ा खेल: ऐसे पीएचसी में भी सप्लाई किया गया जहां खून की जांच होना तो दूर इसके संचालन के लिए पद तक नहीं हैं 


 कुछ पीएचसी में  तो पाया कि वहां रीएजेंट फ्रीज में ठूंस दिए गए हैं। जहां फ्रिज नहीं हैं, वहां इन्हें कार्टून में ही छोड़ दिया गया है। कहीं थर्माकोल के बक्सों में रखा है, लेकिन उनमें बर्फ नहीं है। रीएजेंट 0-4 डिग्री तापमान में नहीं रखे गए तो खराब हो जाते हैं, इसलिए इन्हें बचाने अब 17 करोड़ रुपए से 600 फ्रिज-डीप फ्रीजर खरीदने की तैयारी है। रायपुर मेडिकल कॉलेज के पैथालॉजी एक्सपर्ट डॉ. अरविंद नेरल के मुताबिक- रीएजेंट को शून्य से 4 डिग्री तापमान में मेंटेन करना होता है। ऐसा नहीं हुआ तो ये खराब हो जाते हैं।

इतना ही नहीं स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी संगठनों और डाक्टरों से भी इस बारे में जानकारी ली। सभी हैरान हैं कि अचानक इतना स्टॉक एक साथ कैसे भेज दिया गया है। ऐसे सेंटर जहां तकनीशियन और लैब है वहां तो इतना स्टॉक भेज दिया गया है कि चार-पांच साल तक खत्म नहीं होगा। जबकि अभी जिस केमिकल की सप्लाई की गई है उसकी एक्सपायरी करीब 2 साल बाद है। पड़ताल के दौरान ही चला ये स्थिति​ पूरे प्रदेश में है। भास्कर के पास उन हेल्थ सेंटरों की सूची भी उपलब्ध है जिनमें लैब तकनीशियन का पद ही नहीं है।

  • फ्रिज खरीदने कांट्रेक्ट जारी

अब 600 डीप फ्रीजर- ​फ्रिज खरीदने की तैयारी रीएजेंट को रखने के लिए जिन हेल्थ सेंटरों में फ्रिज नहीं हैं वहां से शिकायतें आने के बाद अब गुपचुप तरीके से 600 नए डीप फ्रिजर और ​​​फ्रिज खरीदने की तैयारी है। इसके लिए रेट कांट्रेक्ट जारी किया गया है। ​​इन्हें उन हेल्थ सेंटरों में सप्लाई किया जाएगा जहां रीएजेंट भेजे गए थे। विभाग में इसे लेकर खासी हलचल है, क्योंकि इसके लिए अलग से बजट का प्रावधान किया जा रहा है।

900 से ज्यादा पीएचसी, इनमें से 200 में लैब तकनीशियन पद नहीं, वहां भेज दिया छत्तीसगढ़ में 900 से ज्यादा प्राथमिक हेल्थ सेंटर हैं। इनमें से 200 से ज्यादा हेल्थ सेंटर ऐसे हैं जिनमें लैब तो दूर तकनीशियन का भी पद स्वीकृत ही नहीं है। ऐसे हेल्थ सेंटरों में रीएजेंट और आटो एनालाइजर मशीन भेज दी गईं। ये भी चेक नहीं किया कि लैब या तकनीशियन का पद है या नहीं। दरअसल 2004-05 के बाद स्वास्थ्य विभाग के सेटअप में पीएचसी में लैब तकनीशियन का पद ही नहीं रखा गया था। 2014 के बाद इसमें संशोधन हुआ और पद सृजि​त किया गया। लेकिन इन 10 वर्षों में जहां भी पीएचसी खुलीं, वहां तकनीशियन का पद ही नहीं है।

डा. सुभाष मिश्रा, राज्य नियंत्रक-महामारी

आश्चर्य... जहां पद नहीं वहां कैसे भेज सकते हैं

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