बिलासपुर संभागायुक्त कार्यालय में टाल-मटोल, 3228 प्रकरण सुनवाई के लिए प्रस्तुत किए गए हैं जिसमें से 196 मामले ही निपटे हैं
बिलासपुर/ बिलासपुर संभागायुक्त कार्यालय में पेंडेंसी लगातार बढ़ रही है। अब तक यहां 3228 प्रकरण सुनवाई के लिए प्रस्तुत किए गए हैं, जिनमें से महज 196 मामले ही निपटाए जा सके हैं। संभागायुक्त और अपर संभागायुक्त को मिलाकर फिलहाल 3032 केस लंबित हैं।
अपर संभागायुक्त के पास बिलासपुर के साथ ही मार्च 2021 से सरगुजा का भी अतिरिक्त प्रभार है, लेकिन मामलों की सुनवाई नहीं हो पा रही है। रिटायर हो चुके बाबुओं को वर्षों से संविदा नियुक्ति दी जा रही है। उन्हीं के भरोसे दफ्तर चल रहा है और पक्षकार परेशान हो रहे हैं।
बिलासपुर संभागायुक्त कार्यालय में संभागायुक्त केडी कुंजाम के साथ अपर संभागायुक्त केएल चौहान मामलों की सुनवाई करते हैं। दो आईएएस की नियुक्ति होने के बाद भी लगातार पेंडेंसी बढ़ती जा रही है। संभागायुक्त केडी कुंजाम ने बिलासपुर में जुलाई 2023 में ज्वॉइन किया है। जबकि अपर संभागायुक्त केएल चौहान ने जून 2021 में यहां ज्वॉइन किया था।
तत्कालीन संभागायुक्त डॉ. संजय अलंग ने कार्य विभाजन करते हुए उन्हें अनुविभाग बिल्हा, कोटा, तखतपुर, मस्तूरी, पेंड्रारोड, मरवाही, पोड़ी-उपरोड़ा, लोरमी, पामगढ़, डभरा, सारंगढ़, खरसिया, धरमजयगढ़, रायगढ़ एवं लैलूंगा के समस्त प्रकरणों का जिम्मा सौंपा था।
प्रशासनिक कार्य के तौर पर चौहान को भू-अर्जन, पुर्नवास एवं पुर्नस्थापन के प्रकरण, इंडस्ट्रियल कॉरीडोर के प्रकरणों में कार्रवाई, सीएसआर, स्वच्छ भारत अभियान, नगरीय निकाय एवं पंचायत निर्वाचन से संबंधित प्रकरण सौंपे गए थे। इससे पहले मार्च 2021 से उनके पास सरगुजा के अपर संभागायुक्त का प्रभार भी था।
- दो संभागों का प्रभार, मामलों की सुनवाई नहीं हो पा रही
अपर संभागायुक्त की पदस्थापना को दो साल पूरे हो चुके हैं। वे बिलासपुर के साथ सरगुजा के प्रभार में हैं, लेकिन दोनों संभागों में मामलों की सुनवाई नहीं हो पा रही है। बिलासपुर की बात करें तो अपर संभागायुक्त के पास सुनवाई के लिए 1064 केस दर्ज किए गए हैं, जिसमें से सिर्फ 113 केस ही निराकृत हो सके हैं। वेबसाइट के आंकड़ों के अनुसार फिलहाल 951 केस लंबित हैं। वहीं, सरगुजा में उनके पास सुनवाई के लिए 542 केस दर्ज करवाए गए, जिसमें से 180 मामलों का निराकरण किया जा सका है। फिलहाल 362 केस लंबित हैं।
- रिटायर बाबू संविदा पर रखा है, अधिकारी और पक्षकारों के बीच सेतु यही
बिलासपुर संभागायुक्त कार्यालय में कई रिटायर बाबू संविदा पर नौकरी कर रहे हैं। बताया जाता है कि अधिकारी और पक्षकारों के बीच सेतु यही होते हैं। अपर संभागायुक्त कार्यालय भी सालभर पहले रिटायर हो चुके बाबू के भरोसे है। मजे की बात यह है कि इस बाबू को संविदा नियुक्ति भी नहीं दी गई है। जिम्मेदार अफसरों ने राज्य सरकार के स्तर पर नियुक्ति नहीं होने के बाद भी सालाना मानदेय पर काम पर रखा हुआ है, इसे लेकर शिकायत भी की जा चुकी है, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई।
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