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"एसीबी को भ्रष्टाचार के आरोपी अधिकारियों की जानकारी देने से छूट देना आरटीआई एक्ट के उद्देश्यों के विपरीत"- बिलासपुर हाई कोर्ट

बिलासपुर/ सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत एंटी करप्शन ब्यूरो को छूट देने के नियम को हाई कोर्ट ने गलत ठहराया है। जस्टिस संजय के अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने एक अहम आदेश में वर्ष 2013 में जारी अधिसूचना पर सामान्य प्रशासन विभाग को स्पष्टीकरण के साथ तीन सप्ताह में नई अधिसूचना जारी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही याचिका मंजूर करते हुए एसीबी में भ्रष्टाचार के आरोपी अधिकारियों की जानकारी मांगते हुए लगाई गई अर्जी पर चार सप्ताह के भीतर निर्णय लेने को कहा गया है।

बिलासपुर हाई कोर्ट

चिरमिरी में रहने वाले आरटीआई कार्यकर्ता राजकुमार मिश्रा ने एंटी करप्शन ब्यूरो से 2 नवंबर 2006 को एंटी करप्शन ब्यूरो से सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के प्रावधानों के अनुसार भ्रष्टाचार के मामले में दर्ज लंबित मामलों की जानकारी मांगी। एसीबी ने आवेदन को वर्ष 2013 में यह कहते हुए नामंजूर कर दिया कि एसीबी को आरटीआई एक्ट के तहत जानकारी देने से छूट दी गई है।

मिश्रा ने इसके खिलाफ वर्ष 2017 में हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी, इसमें उन्होंने अपने केस की पैरवी खुद की। मामले पर नोटिस जारी करने के बाद राज्य शासन का जवाब आने के बाद जस्टिस संजय के अग्रवाल और जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल की बेंच में सुनवाई हुई। 12 सितंबर 2023 को सुनवाई पूरी होने के बाद हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था।

छूट देना एक्ट के विपरीत

हाई कोर्ट ने फैसले में आरटीआई एक्ट के उद्देश्यों और विभिन्न मामलों में दिए गए फैसलों का हवाला देते हुए कहा है कि एसीबी को भ्रष्टाचार के आरोपी अधिकारियों की जानकारी देने से छूट देना एक्ट के उद्देश्यों के विपरीत है। हाई कोर्ट ने जीएडी द्वारा 1 अगस्त 2013 को अधिसूचना जारी कर एसीबी को आरटीआई एक्ट के तहत जानकारी देने से छूट देने के नियम को अनुचित बताते हुए तीन सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण के साथ नई अधिसूचना जारी करने के निर्देश दिए हैं।

स्टेट ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन का गठन

छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद 1 नवंबर 2000 को स्टेट ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन का गठन किया गया। सरकार ने सीआरपीसी के प्रावधानों के तहत ने 27 फरवरी 2003 को एसीबी का गठन किया। 7 नवंबर 2006 को अधिसूचना जारी कर एसीबी को आरटीआई एक्ट की धारा 24 से छूट दे दी गई। 1 अगस्त 2013 को एसीबी को आरटीआई के दायरे से बाहर कर दिया।

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