मां दुर्गा पूजा नगर पंचायत चंपानगर देवी घड़ा दुर्गा मंदिर राजकीय सम्मान के साथ आयोजित होने वाला पूजा जोरों पर है
चम्पानगर/ पूर्णिया/ जिले के चम्पानगर नगर पंचायत के चम्पानगर देवी घडा दूर्गा मंदिर में राजकीय सम्मान के साथ आयोजित होने वाले दूर्गा पूजा को लेकर तैयारी जोरों पर है।नवरात्र शुभारंभ से दशमी तक दूर्गा पूजनोत्सव पर श्रद्धालुओं की अच्छी खासी भीड़ लगी रहती है, और श्रद्धालु वहाँ पड़ोसी देश नेपाल के अलावा अंतर प्रांत और अंतर जिले समेत दुर दुर से मां का दर्शन करने के लिए आते हैं। बताते चलें की बनैली स्टेट चम्पानगर के महाराजा लीलानंद सिंह के दो पुत्र राजा कलानंद सिंह व राजा कृत्यानंद सिंह ने अपने वंशज को कृतिमान स्थापित रखने के लिए वर्ष-1908 में मंदिर निर्माण के लिए नींव रखी थी। यह भी बताया जाता है की मंदिर निर्माण से क ई दशक पूर्व से भी फुस वाले घर में मिट्टी का पींड स्थापित कर दूर्गा मंदिर में दूर्गा पूजा हुआ करता था।उल्लेखनीय है की बनैली स्टेट चम्पानगर राजघराने परिवार द्धारा आयोजित दूर्गा पूजा को लेकर ख्यातिप्राप्त मूर्तिकारों द्धारा रथ वाले मंडप में करीब एक दर्जन से अधिक प्रतिमाएँ बनाई जाती है। उस प्रतिमा में बनारस के साज सज्जया से शुशोभित किए जाने की परंपरा अब भी जीवित है।नवरात्र शुभारंभ से दशमी तक सदियों से चली आ रही बनारस के मशहूर शहनाई वादक बिस्मिल्ला ख़ाँ के चम्पानगर में वादन बाद उनके निधन उपरांत उनके वंशज द्धारा शहनाई की मधुर धुन से माता को प्रसन्न करने की भी परंपरा चली आ रही है।नवरात्रि के सप्तमी की शाम सभी प्रतिमाओं में सोने और चांदी के आभूषणों से सुसज्जित करने के बाद मंडप के उपर प्रतिमा वाले मेढ भी चढाया जाता है।नवरात्र समापन बाद दशमी तिथि को पूजा विसर्जन बाद दोपहर सभी प्रतिमाओं को दर्शनार्थ हेतु बाहर रखा जाता है। शाम 4 बजे हाथी, घोड़ा और सैकड़ों श्रद्धालुओं के साथ शहनाई की धुन पर माता की विदाई करने की परंपरा राजघराने परिवार द्धारा राजकीय सम्मान के साथ चलता आ रह है।दूर्गा पूजा मौके पर न्यास समिति प्रबंधन द्धारा एक महिने तक भब्य मेला भी लगाया जाता है।

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