गोरखपुर/ सड़क हादसे में पूरी तरह कटे बाएं हाथ के अंगूठे को बीआरडी मेडिकल कालेज के प्लास्टिक सर्जन डॉ नीरज नथानी ने जोड़ दिया। खास बात यह है कि इस ऑपरेशन के बाद अंगूठे की नसों में भरे गंदे खून को निकालने के लिए जोंक जैसे कीट की मदद ली गई।इसे लीच (जोंक) थेरेपी कहते हैं। अंगूठा पूरी तरह से जुड़ गया है। उसमें ताकत लौटने लगी हैं। उसकी नसों में भी ताकत लौट आई है।
BRD मेडिकल कालेज के प्लास्टिक सर्जन ने एक विशेष सर्जरी कर मरीज के कटे अंगूठे को जोड़ कर दुरुस्त किया। बता दें की सड़क हादसे में पूरी तरह कटे बाएं हाथ के अंगूठे को बीआरडी मेडिकल कालेज के प्लास्टिक सर्जन डॉ नीरज नथानी ने जोड़ दिया। खास बात यह है कि इस ऑपरेशन के बाद अंगूठे की नसों में भरे गंदे खून को निकालने के लिए जोंक जैसे कीट की मदद ली गई।इसे लीच (जोंक) थेरेपी कहते हैं। अंगूठा पूरी तरह से जुड़ गया है। उसमें ताकत लौटने लगी हैं। उसकी नसों में भी ताकत लौट आई है।
एक्सीडेंट में कट गया था मरीज का अंगूठा
मोतीराम अड्डा निवासी अमरनाथ जायसवाल का 10 अक्तूबर को दोपहर सवा 12 बजे बाइक से एक्सीडेंट हो गया। हादसे में अंगूठा बाइक की चेन में फंस कर कट गया। अंगूठा पूरी तरह से अलग हो गया। परिजन उसे गंभीर हालत में लेकर बीआरडी मेडिकल कालेज के प्लास्टिक सर्जन डॉ नीरज कुमार नथानी के पास पहुंचे। उन्होंने इमरजेंसी में सर्जरी करने का फैसला किया। मरीज के भर्ती होने के तीन घंटे के अंदर प्रत्यारोपण सर्जरी की गई।
जानिए कैसे होती है लीच थैरेपी
डॉ. नथानी ने बताया कि आपरेशन के अगले दिन अंगूठे की नसों में हरकत नहीं हो रही थी। ऐसा कटे हिस्से की खून की धमनियों में गंदा खून जमा होने से हो जाता है। इससे अंगूठा खराब हो सकता था। अंगूठे को बचाने के लिए धमनियों में फंसे गंदा खून के थक्के को निकालना आवश्यक हो गया था। इसके लिए लीच थेरेपी का प्रयोग करने का फैसला किया गया। फिर जोंक का इंतजाम किया गया। उन्हें तीन दिन तक रोजाना अंगूठे के पास रखा जाता। जोंक ने गंदा खून चूस लिया। गुरुवार को मरीज की ड्रेसिंग में अंगूठा पूरी तरह से ठीक हो गया था। मरीज को डिस्चार्ज कर दिया गया।

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