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मैग्सेसे एवार्डी सोनम वांगचुक ने कहा - 'IIT और PMT प्रवेश पद्धति गलत', रट कर सेलेक्ट होने के बाद साबुन, तेल और टूथपेस्ट बेचते हैं

भिलाई/ देश के जाने माने इंजीनियर और मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित सोनम वांगचुक ने भारत के सबसे बड़े एंट्रेंस एग्जाम IIT और PMT की पद्धति को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि जिस पद्धति से अभी एंट्रेंस एग्जाम हो रहा है उससे मल्टीपल क्वेश्चन रट कर आने वाले बच्चे सिलेक्ट हो रहे हैं। जबकि इसमें उन बच्चों का चयन होना चाहिए, जिनके अंदर वाकई इंजीनियरिंग और मेडिकल के क्षेत्र में कुछ करने की प्रतिभा हो।

 वांगचुक ने कहा कि, विद्यार्थी रिलेटेड सब्जेक्ट को रट कर सवालों के जवाब पर टिक करके एडमिशन ले लेते हैं। इसके बाद जब वो वहां से इंजीनियर और डॉक्टर बनकर निकलते हैं तो अपने प्रोफेशन पर फोकस न करके साबुन, तेल और टूथपेस्ट बेचते हैं। इसलिए हमें प्रैक्टिकल सिस्टम के एंट्रेंस एग्जाम पर फोकस करना चाहिए।

  • पुराने एजुकेशन सिस्टम को बदलने की जरूरत


वांगचुक ने कहा, इससे वो लोग एडमिशन ले पाएंगे जिनके अंदर इस वाकई इसकी प्रतिभा है। वर्तमान सिस्टम में ऐसे प्रतिभाशाली छात्र गांव में रह जाते हैं। आगे नहीं बढ़ पाते हैं। उन्होंने कहा इस बारे में भारत सरकार को भी पता है। वो इस पर कुछ करना भी चाहती है, लेकिन देश की जनता पुराने ढर्रे पर ही चल रही है। उन्हें एजुकेशन सिस्टम पर अपना विचार बदलने की जरूरत है।

बेहतरीन प्रॉब्लक सॉल्वर बनने के लिए मातृ भाषा में ज्ञान जरूरी
सोनम वांगचुक ने कहा कि हमें किसी भी चीज का सबसे पहले अपनी मातृ भाषा में ज्ञान होना जरूरी है। भारत में लंदन और न्यूयॉर्क की तरह अंग्रेजी भाषा में बताया जाता है। जबकि पहले उसी चीज को उनकी मातृ भाषा में बताएं, जिससे वो उसे अच्छे से समझ लें। कहा जैसे मां का दूध शरीर के लिए जरूरी है, वैसे ही मातृ भाषा मानसिक विकास के लिए जरूरी है। जब आपका सही मानसिक विकास होगा तभी आप बेहतरीन साइंटिस्ट या प्रॉब्लम सॉल्वर बन सकेंगे।

  • आपको अपना जीवन अपने तरीके से जीना चाहिए


रुंगटा कॉलेज के कार्यक्रम में आए इंजीनियर वांगचुक ने कहा भारत में भी विदेशों की तरह अच्छे इंस्टीट्यूट हैं। फर्क इतना है कि बाकी देशों में लोग अपने जीवन को बहुत गंभीरता से लेते हैं। अपने जीवन में किसी और के सपने के लिए जगह ही नहीं देते हैं। न ही वो किसी दूसरे के किए कार्य की वाहवाही को देखकर कार्य करते हैं। भारत में हम सबसे पहले देखते हैं कि समाज क्या कहेगा। माता पिता क्या चाहते हैं।

आपको 60-70 साल का जीवन मिला है। उसे अपने तरीके से जियो। जो आपको अच्छा लगाता है, जिसमें आपकी रुचि है वो लाइन चुनो। इंजीनियर वो बने जिनके अंदर इंजीनियरिंग का जुनून हो। आईएएस वो बने जो प्रशासनिक चीजों में रुचि लेता है। यदि किसी फौज की मानसिकता वाले व्यक्ति को टीचर बना देंगे, आर्टिस्ट को इंजीनियर और अच्छे डांसर को डॉक्टर बना देंगे तो वो लोगों की जान लेगा।

कौन हैं इंजीनियर सोनम वांगचुक
आपने राजकुमार हिरानी की फिल्म थ्री ईडीयट्स देखी होगी। उसमें अभिनेता आमिर खान ने एक इनवेंटर का किरदार निभाया था, जो भारत के सुदूर उत्तर लद्दाख में रहता है और बच्चों को पढ़ाता है। यह किरदार जिस शख्सियत से प्रेरित था, उनका नाम है सोनम वांगचुक। सोनम का आज भी लद्दाख में स्कूल है। वहां उन बच्चों को एडमिशन दिया जाता है जो बार-बार फेल होते हैं। सोनम का कहना है कि वे ऐसे बच्चों की रुचि के ऊपर काम करते हैं और उसी के मुताबिक उसे एजुकेट करते हैं।

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