कोई भी मुद्दा हो, आम लोगो के लिए बना दिल्ली का कनॉट प्लेस डिबेट का हब, बहस, बिल्कुल टीवी चैनलों की तरह
नई दिल्ली/ दिल्ली का कनॉट प्लेस, शाम 4:30 बजे के बाद यहां चहल-पहल बढ़ जाती है, हाथ में कैमरा और माइक लिए यूट्यूबर्स आने लगते हैं। ये भीड़ जुटाते हैं, कुछ लोगों को सिलेक्ट करते हैं और फिर शुरू होती है बहस, बिल्कुल टीवी चैनलों की तरह। इलेक्शन, पार्टी, नेता या फिल्म, मुद्दा कोई हो, सभी के एक्सपर्ट यहां तैयार होकर आते हैं।
पिछले 5 साल में राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 6 के पास की खाली जगह इस तरह की डिबेट का हब बन गई है। हम इस ट्रेंड को समझने पहुंचे, तब तक डिबेट शुरू हो चुकी थी। हमने कुछ यूट्यूबर्स और बहस में शामिल लोगों से बात की।
पता चला कि डिबेट में बतौर एक्सपर्ट शामिल होने वाले आम लोग हैं। कोई सेल्समैन है, तो कोई गार्ड की नौकरी करता है। काम खत्म होते ही सभी कनॉट प्लेस की ओर दौड़ पड़ते हैं। ज्यादातर किसी न किसी पार्टी-नेता के सपोर्टर या विरोधी हैं। इनके जरिए यूट्यूबर्स को फ्री कंटेंट मिलता है और लोगों को पॉपुलैरिटी। अच्छा बोलने वालों को बार-बार कैमरे पर आने का मौका मिलता है।
इन यूट्यूबर्स के पास अच्छे-खासे फॉलोअर्स हैं। लोग उनके चैनल पर दिखकर वायरल होने के लिए आते हैं। गदर-2 और पठान फिल्म रिलीज हुई, तो कई यूट्यूब चैनल अपने चुनिंदा प्रवक्ताओं को थिएटर ले गए और वीडियो बनाए। हालांकि, आसपास के दुकानदार इस शोर-शराबे से परेशान हैं। पुलिस में शिकायत की, लेकिन डिबेट रुकी नहीं, चलती जा रही है।
डिबेट के लिए 200 किमी का सफर, मथुरा से दिल्ली अपडाउन
55 साल के प्रवीण गौतम मथुरा के रहने वाले हैं। तीन महीने पहले कनॉट प्लेस आए थे। किसी यूट्यूबर ने उनका व्यू लिया। प्रवीण की बातों में मथुरा वाला अंदाज सभी को बहुत पसंद आया। प्रवीण को भी अच्छा लगा। इसके बाद से वे लगातार हफ्ते में तीन दिन मथुरा से करीब 200 किमी दूर दिल्ली आते हैं।
12वीं तक पढ़े प्रवीण गौतम ने शादी नहीं की। मथुरा में खेती करते हैं। कमाई का यही एक जरिया है। उनके चार भाई हैं। परिवार सोशल मीडिया पर बोलने से मना करता है। इस पर प्रवीण कहते हैं, 'मैंने स्कूल-कॉलेज में परिवार की बात नहीं सुनी, तो बुढ़ापे में क्यों सुनूंगा?'
सेल्समैन की नौकरी, काम से फ्री होते ही डिबेट की तैयारी
40 साल के योगेश गौतम दिल्ली में एक लॉजिस्टिक्स कंपनी में सेल्स का काम देखते हैं। परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं। नौकरी से घर चलाने लायक पैसा नहीं मिलता, इसलिए दूसरे काम भी करते हैं। काम से फ्री होकर योगेश सीधे कनॉट प्लेस पहुंचते हैं।
उनके जवाब देने का अंदाज यूट्यूबर्स को बहुत पसंद है। सभी उनसे बात करना चाहते हैं। हम कनॉट प्लेस पहुंचे थे, तब योगेश एक यूट्यूब चैनल को इंटरव्यू दे रहे थे। इस चैनल पर योगेश के कई वीडियो और रील्स हैं। योगेश दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बारे में बोलने में एक्सपर्ट हैं।
इंटरव्यू खत्म होने के बाद यूट्यूबर योगेश को अलग ले गया और हाथ मिलाकर व्यूज बढ़ाने के लिए कहा। योगेश किसी पार्टी के समर्थक नहीं हैं। वे कहते हैं, 'मैं अगली पीढ़ी के लिए काम करता हूं। PM मोदी के काम से बहुत प्रभावित हूं।’
एक एंकर उनसे पूछता है- आपको 'इंडिया' नाम से दिक्कत है?
योगेश उसी से सवाल पूछते हैं- मुझे इंग्लैंड नाम से भी दिक्कत है। क्या आपको नहीं है?
इसके बाद यूट्यूबर और योगेश में बहस होने लगती है। यूट्यूबर पूछता है, 'ऐसे तो ताजमहल भारत का बनाया नहीं है। उसे तोड़ दें क्या?'
योगेश हंसते हुए जवाब देते हैं, 'हमें ताजमहल बनाना ही नहीं था। उसे तो उन्होंने बनाया, जो भारत में घुस आए।' योगेश की बात सुनकर आसपास खड़े लोग तालियां बजाने लगते हैं।
योगेश गौतम बताते हैं, ‘मैं पिछले एक साल से यहां आ रहा हूं। ऑफिस में जैसे ही मीटिंग ख़त्म होती है, मैं निकल पड़ता हूं। 2002 से PM मोदी को फॉलो कर रहा हूं। उनके काम पर सवाल उठाए जाते हैं, उन्हीं के जवाब देने यहां आता हूं। इसके लिए मेहनत भी करता हूं। हिंदी और इंग्लिश न्यूज चैनल देखता हूं।'
योगेश कहते हैं, 'सोशल मीडिया की ताकत बहुत बड़ी है। हर आदमी फेसबुक और यूट्यूब चलाता है। उसके जरिए हमारी बात लोगों तक पहुंचती है। कई लोग मुझे सुनते हैं। मेरा एक वीडियो करीब 10 लाख लोगों ने देखा। 19 हजार कमेंट भी मिले।'
गार्ड की नौकरी गई, फिलहाल काम नहीं, डिबेट से कॉन्फिडेंस बढ़ता है…
44 साल के गिरीश शर्मा बेरोजगार हैं। कांग्रेस का सपोर्ट करते हैं। परिवार में माता-पिता, बड़े भाई, पत्नी और दो बच्चे हैं। भाई IT कंपनी में हैं। उनकी सैलरी से घर चलता है। गिरीश बताते हैं, ‘अभी मेरा स्ट्रगलिंग टाइम चल रहा है। पहले ऑटो चलाता था। 2017 में सिक्योरिटी गार्ड का काम शुरू किया, 2020 में कोरोना के टाइम पर नौकरी चली गई।’
गिरीश बताते हैं, ‘मुझे राजनीति में दिलचस्पी नहीं थी। कोरोना के दौरान बुलंदशहर अपने गांव गया था। वहीं मुझे कांग्रेस के जिलाध्यक्ष राकेश भाटी मिले। तब विधानसभा चुनाव थे। मुझे चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी मिल गई।’
‘पिछली सरकारों के काम और देश की हर बड़ी घटना मुझे याद रहती है। उसके आधार पर अपना पॉइंट ऑफ व्यू बना लेता हूं और फिर बात रखता हूं।'
7 महीने से रोज कनॉट प्लेस आ रहीं मेघा, ‘हिंदू शेरनी’ नाम मिला
19 साल की मेघा को कनॉट प्लेस के सभी यूट्यूबर्स 'हिंदू शेरनी' कहते हैं। मेघा दिल्ली यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस की पढ़ाई कर रही हैं। पिता कैब चलाते हैं और मां कपड़ों का काम करती हैं।
मेघा कहती हैं, 'मैं शाम को टहलने के लिए कनॉट प्लेस आती हूं। मन हल्का हो जाता है। यहां आते हुए 7 महीने हो गए। शुरुआत में मम्मी-पापा रोकते थे। मैं लव जिहाद पर बात करती थी। परिवार को लगता था कि ऐसे सब्जेक्ट पर बात करने से बहुत दुश्मन बन जाएंगे। धीरे-धीरे लोगों ने ही मम्मी-पापा को समझाया कि आपकी बेटी सनातन धर्म के लिए बड़ा काम कर रही है।'
कैमरे का क्रेज, आम लोग भी डिबेट से जुड़े
51 साल की सीमा चौधरी झारखंड के रामगढ़ की रहने वाली हैं। वे सिविल कोर्ट में वकील हैं। बेटी की शादी 6 साल पहले दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा में हुई थी। सीमा साल में 3 बार दिल्ली आती हैं। सीमा बताती हैं, ‘दो साल पहले पहली बार यहां आई थी, तब मीडियावालों ने मुझसे बात की थी। अपनी बात कहकर अच्छा लगा। तब से जब भी दिल्ली में रहती हूं, कनॉट प्लेस जरूर आती हूं।'
डिबेट से आसपास के दुकानदार परेशान, पुलिस से शिकायत की
कनॉट प्लेस के कई दुकानदार यहां होने वाली डिबेट से परेशान हैं। उनकी शिकायत है कि डिबेट के नाम पर लोग गलत बातें करते हैं। आर्मी, नेताओं और पार्टियों के बारे में बुरा बोलते हैं।
45 साल के गुरप्रीत सिंह कनॉट प्लेस में प्रॉपर्टी का काम करते हैं। वे हर शाम काम खत्म करके दोस्तों के साथ बैठते हैं। गुरप्रीत बताते हैं, ‘2019 से कुछ पहले यहां यूट्यूबर्स का आना शुरू हुआ था। पिछले साल की बात है, एक शख्स झूठ बोल रहे थे। जोर-जोर से चिल्ला रहे थे।'
'मुझसे रहा नहीं गया। मैंने भी बोलना शुरू किया। मुझे लगा था वो मेरे साथ डिबेट करेगा। मैंने जैसे ही बोलना शुरू किया, आसपास भीड़ लग गई। उन्होंने मुझे सरकार के खिलाफ कुछ नहीं बोलने दिया। मैं तो पॉलिसी की आलोचना कर रहा था। उन लोगों ने मेरे साथ बदतमीजी की। इसके बाद से मैंने किसी भी चैनल को बाइट देना बंद कर दिया। यहां ऐसा ही होता है।'
गुरप्रीत के साथ बैठे मनीष कनोजिया कई बार पुलिस में शिकायत कर चुके हैं। वे कहते हैं, ‘यहां डिबेट के नाम पर लोग लड़ने लगते हैं। हाथापाई करते हैं। कोई उन्हें रोकने की कोशिश करे, तो बदसलूकी करते हैं। ये सब बिना परमिशन के हो रहा है।’
‘मैंने कनॉट प्लेस थाने में इसकी शिकायत की है। ये लोग माहौल खराब कर रहे हैं। मैंने बार-बार DCP और थाना प्रभारी को लिखित शिकायत दी कि ऐसे यूट्यूब चैनल की पहचान की जाए, जो लोग डिबेट में हिस्सा ले रहे हैं उनकी पहचान की जाए कि ये लोग कहां से आते हैं। पुलिस बीच-बीच में आती है और इन्हें भगा देती है। कुछ दिन बाद ये लोग फिर से आ जाते हैं।'
हमने मनीष की बात को वेरिफाई करने के लिए कनॉट प्लेस के SHO उपेंद्र यादव से बात की। वे कहते हैं, ‘हम यूट्यूबर्स को हटाने की कोशिश करते हैं। चेतावनी देते है कि यहां न आया करें। ये लोग चाहे यूट्यूबर्स हों या डिबेट में आने वाले, यहां आकर माहौल खराब करते हैं। समय-समय पर हमने इन्हें हटाया भी है।’
हमने SHO उपेंद्र यादव से पूछा कि आखिरी बार इन लोगों को कब हटाया था, उन्होंने जवाब दिए बिना फोन काट दिया।

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