क्यों लगता है कुछ लोगों को ज्यादा डर, ये पैदा दिमाग में होते हैं और महसूस पेट या दिल में क्यों होते हैं
डर और एंग्जायटी...पेट में हलचल पैदा कर देते हैं। एसी स्थिति में सांसें तेज होने लगती हैं, घबराहट भी महसूस होती है। लेकिन दिमाग में किसी तरह का एहसास या दर्द नहीं होता।
दूसरी तरफ साइंस कहता है कि डर और एंग्जायटी दिमाग में पैदा होते हैं। यहीं से प्रोसेस भी होते हैं। अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि जब ये पैदा दिमाग में होते हैं तो महसूस पेट या दिल में क्यों होते हैं।
रिसर्चर्स कहते हैं कि इमोशन्स दिमाग में बनते हैं और हमारा शरीर इनका रिएक्शन दे रहा होता है। इसे समझने के लिए दिमाग के उन हिस्सों को समझना होगा जो डर को प्रोसेस करते हैं।
अमिगडला (प्रमस्तिष्कखंड)
दिमाग का ये हिस्सा कान के पास होता है। बादाम जैसा दिखने वाला अमिगडला किसी स्थिति की प्रमुखता या भावनात्मकता का पता लगाता है और उस पर कैसे प्रतिक्रिया देनी है ये तय करता है। जब आप किसी चीज को देखते हैं तो अमिगडला तय करता है कि उस चीज पर क्या प्रतिक्रिया दी जानी चाहिए। यानी उस चीज को खाना चाहिए, उससे दूर भागना चाहिए या उस पर हमला करना चाहिए।
थ्रेट डिटेक्शन यानी डर का पता लगता बेहद अहम है। ये प्रोसेस काफी तेज होती है, इसलिए अमिगडला लॉजिक लगाए बिना ही रिएक्शन देता है। उदाहरण के लिए जब हम किसी जानवर को अपनी तरफ आते हुए देखते हैं तो उस पर बिना सोचे ही हमला करने लगते हैं।
हिप्पोकैंपस
दिमाग का ये हिस्सा कुछ भी नया सीखने या याददाश्त के लिए जिम्मेदार होता है। इसे ब्रेन का मेमोरी हब भी कहा जाता है। हिप्पोकैंपस और अमिगडला आपस में जुड़े होते हैं। ये हिस्सा डर के संदर्भ (कॉन्टेक्स्ट) में याद रखता है कि कौन-सी चीज से खतरा है और कौन-सी चीज सेफ है।
अमिगडला और हिप्पोकैंपस के रोल को उदाहरण के जरिए समझें...
गुस्साए हुए शेर को जंगल में देखकर और किसी जू में देखकर अमिगडला में डर पैदा होता है। लेकिन हिप्पोकैंपस डर की प्रतिक्रिया देता है। यानी हिप्पोकैंपस बताता है कि जू वाले शेर से डरने की जरुरत नहीं है और जंगल में घूम रहा शेर खतरनाक है।
प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स (मस्तिष्काग्र की बाह्य परत)
प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स आखों के ऊपर होता है। ये हिस्सा ज्यादातर डर के सामाजिक पहलुओं से जुड़ा होता है। जैसे- जब तक आपसे कोई ये न कह दे की सांप या कुत्ता खतरनाक नहीं है, तब तक आप उससे डरते हैं। जैसे ही कोई कह दे कि ये कुत्ता या सांप बहुत फ्रेंडली है तो फौरन आपको डर लगना कम या खत्म हो जाएगा।
हालांकि, प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स को आमतौर पर दिमाग के उस हिस्से के रूप में देखा जाता है जो भावनाओं को नियंत्रित करता है। लेकिन यह आपके सामाजिक परिवेश के आधार पर आपको डर महसूस करवा सकता है। जैसे- आप भले ही रोज अपने बॉस से बात करते हों, लेकिन नौकरी से निकाले जाने की खबर सुनने के बाद आपको बॉस के पास जाने में डर लग सकता है।
अब जानिए की जब डर लगता है तो बॉडी क्यों रिएक्ट करती है...
जब आपका दिमाग ये तय कर लेता है कि किसी परिस्थिति में डरना या किसी चीज को देखकर होने वाली डर की प्रतिक्रिया सही है तो वो आपको तुरंत एक्शन लेने के लिए तैयार करता है। इसके लिए वह न्यूरोन और हार्मोन के कई ग्रुप एक्टिव कर देता है। इसलिए थ्रेट डिटेक्शन दिमाग में होता है और प्रतिक्रिया हमारा शरीर दे रहा होता है।
बॉडी के रिएक्शन को समझने के लिए हमें बॉडी सिस्टम को समझना होगा।
मोटर कॉर्टेक्स
दिमाग का ये हिस्सा खास तरह की मसल्स (मांसपेशियों) को फौरन मूवमेंट करने के लिए सिग्नल भेजता है। ये मसल्स हमारी छाती और पेट में होती हैं। ये मसल्स छाती और पेट के आस-पास मौजूद महत्वपूर्ण अंगों को प्रोटक्ट करती हैं। ये अंग तनावपूर्ण या डर की परिस्थिति में आपकी छाती और पेट में जकड़न की भावना पैदा कर सकते हैं।
सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम
सिम्पैथेटिक न्यूरॉन्स पूरे शरीर में फैले हुए होते हैं। दिल, फेफड़े और आंतों में ये काफी ज्यादा मात्रा में होते हैं। ये न्यूरॉन एड्रीनल ग्लैंड को ट्रिगर करते हैं। इससे एड्रेनालाईन रिलीज होता है, जो खून के जरिए दिल तक पहुंचता है। डर महसूस करते समय ये प्रोसेस काफी तेज हो जाती है जिससे हार्ट रेट बढ़ने लगता है। इस दौरान मांसपेशियां तक ब्लड सप्लाई हो सके इसके लिए सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम दिल की धड़कने और खून के फ्लो को बढ़ा देता है।
इस पूरी प्रोसेस के दौरान आप छाती में बढ़ी हुई हार्ट बीट और खून का फ्लो दोनों महसूस करते हैं, यही कारण है कि आप इंटेंस इमोशन की फीलिंग को दिल में महसूस कर पाते हैं। सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम फेफड़ों में भी सिग्नल्स भेजता है। इससे ब्रीदिंग रेट बढ़ जाता है। कई बार सांसें फूलने लगती हैं।
इसी तरह सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम पेट में खून का फ्लो कम हो जाता है। आपके गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सिस्टम में इन बदलावों को डर और एंग्जायटी से जोड़कर देखा जा सकता है।
ये सभी सेंसेशन वापस दिमाग तक पहुंचते हैं
पेट-छाती में महसूस होने वाले ये सभी सेंसेशन स्पाइनल कॉर्ड के जरिए वापस दिमाग में जाते हैं। दिमाग इन सिग्नल्स को कॉन्शियस और अनकॉन्शियस दोनों लेवल पर प्रोसेस करता है।
'साइंस अलर्ट' के मुताबिक, डर और एंग्जायटी आपके दिमाग में पैदा होते हैं, लेकिन आप उन्हें अपने शरीर में भी महसूस करते हैं क्योंकि आपका दिमाग आपके बॉडी फंक्शन को बदल देता है। इमोशन्स आपके शरीर और दिमाग दोनों में होते हैं, लेकिन आप अपने दिमाग से उनके अस्तित्व के बारे में जानते हैं।
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