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टॉयलेट से ज्यादा बैक्टीरिया रसोई में, लकड़ी के बोर्ड से लिवर-आंतें खराब; बिमारियों का घर बनेगा सही सफाई न होने पर

नई दिल्ली/ किचन को अन्नपूर्णा कहा जाता है। यहां पकने वाला खाना घर के हर सदस्य की भूख को मिटाता है।

जब से लोग फिटनेस कॉन्शियस हुए हैं, तब से वह केवल होम कुक फूड को ही अहमियत देते हैं क्योंकि घर के हाइजेनिक खाने को पौष्टिक और सेहतमंद माना जाता है। लेकिन किचन जितनी साफ-सुथरी और हाइजेनिक दिखती है, असल में होती नहीं है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि किचन से भी इंसान बीमार पड़ सकता है। इस्तांबुल की जेलिज्म यूनिवर्सिटी की स्टडी के अनुसार 9% बीमारियां किचन में पनप रहे बैक्टीरिया की वजह से होती हैं जो आंखों से नजर भी नहीं आते।

किचन में यूज होने वाले कपड़े बीमारी का घर

किचन में काम करने के दौरान और खाना बनाने के बाद हर बार लोग किचन की स्लैब और गैस स्टोव को कपड़े या टॉवल से साफ करते हैं।

रिसर्च के अनुसार इस गंदे कपड़े में रातों रात सैल्मनेल (salmonella) नाम के बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। कपड़ा धोने के बाद भी यह बैक्टीरिया खत्म नहीं होते।

पारस हॉस्पिटल, गुरुग्राम में इंटरनल मेडिसिन के डॉ. संजय गुप्ता के अनुसार अगर यह बैक्टीरिया शरीर के अंदर प्रवेश कर जाएं तो इससे डायरिया, पेट में मरोड़े या दर्द, बुखार, उल्टी, सिरदर्द और टाइफाइड तक हो सकता है।

सिंक और फ्रिज में बैक्टीरिया ही बैक्टीरिया

फ्रिज जहां सब्जियों को ताजा रखने में मदद करता है, वहीं सिंक में इन्हें साफ किया जाता है लेकिन सब्जी, फल और मीट को फ्रिज में रखना और सिंक में धोने से ही किचन में बैक्टीरिया फैल सकते हैं क्योंकि सब्जी उठाने के बाद अक्सर लोग किचन में कई जगहों पर हाथ लगाते हैं।

किचन में सबसे ज्यादा ई-कोलाई, सैल्मनेल, शिगेला, हेपेटाइटिस ए, नोरोवायरस और कैम्पिलोबैक्टर नाम के बैक्टीरिया मिलते हैं। ई-कोलाई जहां किचन की स्लैब, सिंक या फर्श पर 1 घंटे तक जिंदा रहते हैं, वहीं सैल्मनेल 4 घंटे तक और हेपेटाइटिस ए 1 महीने तक जीवित रह सकते हैं।

सिंक को बैक्टीरिया से मुक्त रखने के लिए क्या करें

सिंक को बैक्टीरिया से मुक्त रखने के लिए रात में 1 कप गर्म पानी में क्लोरिन ब्लीच मिलाकर सिंक और उसके पाइप में छोड़ दें। इसे हर हफ्ते रिपीट करें।

किचन में मोबाइल का भी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। मोबाइल में कई कीटाणु होते हैं जो खाने के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं।

किचन में मोबाइल का भी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। मोबाइल में कई कीटाणु होते हैं जो खाने के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं।

बर्तन भी साफ नहीं होते हैं

किचन में कढ़ाई से लेकर प्लेट तक कई तरह के बर्तन इस्तेमाल किए जाते हैं। भले ही आप इन्हें धोकर इस्तेमाल करें लेकिन फिर भी यह आपको बीमार कर सकते हैं। अक्सर लोग थाली में सब्जी काटते हैं और उसे पकाने के बाद उसी थाली से ढक देते हैं।

कच्ची सब्जी वैसे ही बीमारी का घर होती हैं और उस पर लगे बैक्टीरिया थाली पर जमे रहते हैं। यही हाल चाकू के साथ है। एक ही चाकू से कई चीजें काट दी जाती हैं लेकिन उसे धोया नहीं जाता। बेहतर है कि सब्जी काटने के बाद चाकू और प्लेट को गर्म पानी और साबुन से धोया जाए और उसे दोबारा तभी इस्तेमाल करें जब तक वह सूख नहीं जाती।

कटिंग बोर्ड से करें तौबा

किचन में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला कटिंग बोर्ड भी इन्फेक्शन का घर है। लोग सब्जी हो या मीट, इस पर रखकर ही काटते हैं। यह किचन टूल सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है।

लेकिन इस्तांबुल की जेलिज्म यूनिवर्सिटी के अनुसार इस पर सबसे ज्यादा ई-कोलाई और सैल्मनेल बैक्टीरिया पनपते हैं क्योंकि यह सबसे गंदे रहते हैं।

बाजार में कटिंग बोर्ड कांच, प्लास्टिक और लकड़ी के बिकते हैं लेकिन सबसे सेफ स्टील का कटिंग बोर्ड होता है। प्लास्टिक के कटिंग बोर्ड से बैक्टीरिया के साथ-साथ खाने में माइक्रोप्लास्टिक भी मिल जाता है और लकड़ी के कटिंग बोर्ड से लकड़ी का बुरादा भी शरीर में जाता है जिससे लिवर, लंग्स और आंतों से जुड़ी बीमारी हो सकती है।

बर्तन धोने के स्क्रबर पर टॉयलेट सीट से ज्यादा बैक्टीरिया

बर्तनों की सफाई के लिए हर घर में स्क्रबर यूज किया जाता है लेकिन इससे डायरिया और टाइफाइड हो सकता है। जर्मनी की यूनिवर्सिटी ऑफ फर्टवैंनगन की स्टडी में डिश स्क्रबर में 8200 करोड़ से ज्यादा बैक्टीरिया मिले।

इन माक्रोब्स की संख्या टॉयलेट सीट से भी ज्यादा थी। नमी की वजह से इस पर Moraxella osloensis नाम के बैक्टीरिया पाए गए। स्टडी में यह भी कहा गया कि गेहूं, आटा और तेल बैक्टीरिया का घर है और स्क्रबर जैसे ही बर्तनों पर लगाया जाता है तो यह स्क्रबर में चिपक कर बैक्टीरिया का घर बन जाता है। स्क्रबर को हर हफ्ते बदल लेना चाहिए।

किचन में कॉकरोच हेल्थ के लिए विलेन

कपबर्ड, सिंक के पाइप समेत किचन में कई जगह कॉकरोच के घर होते हैं। यह कई तरह के वायरस, फंगस और पैरासाइट्स फैलाते हैं जिससे लोग हैजा, प्लेग, लेप्रोसी, पेट से जुड़ी बीमारियों के शिकार हो जाते हैं।

कॉकरोच कैंपाइलोबेक्टर नाम की बीमारी भी फैलाते हैं। इससे इंसान को पेट में मरोड़े, दर्द, उल्टी, दस्त और बुखार से जूझना पड़ता है। अगर किसी को कॉकरोच से एलर्जी है तो उसे सांस लेने में दिक्कत, खांसी, छींक, त्वचा में खुजली और कान में इन्फेक्शन हो सकता है।

साफ किचन का डायबिटीज से कनेक्शन

ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन की रिपोर्ट में सामने आया कि जो लोग साफ-सुधरे बैक्टीरिया फ्री किचन में काम करते हैं उन्हें तनाव नहीं होता और डायबिटीज दूर रहती है। शोध में पाया गया कि जो लोग सप्ताह में 20 मिनट सफाई को देते हैं, वह तनाव मुक्त रहते हैं।

इस शोध के अनुसार साफ वातावरण में बॉडी से कोर्टिसोल नाम का हार्मोन रिलीज होता है जो ब्लड शुगर के लेवल को कंट्रोल रखता है। साफ किचन इस हार्मोन को रिलीज करके इंसान को इस बीमारी से दूर रखता है।

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