सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

आदिवासी महिला के दो एकड़ जमीन को गैर आदिवासी के नाम पर नामांतरण करने के आरोपी राजस्व अधिकारियों की जमानत ख़ारिज

बिलासपुर/ आदिवासी महिला के करीब सवा दो एकड़ को गैर आदिवासी के नाम पर नामांतरण करने के आरोपी दो राजस्व अधिकारियों की अग्रिम जमानत अर्जी हाई कोर्ट ने खारिज कर दी है। मामले में कोरबा के दर्री थाने में शिकायत हुई थी । दर्री के तत्कालीन तहसीलदार रहे और वर्तमान में बस्तर में डिप्टी कलेक्टर अशोक कुमार मार्बल और पामगढ़ में ज्वाइंट कलेक्टर राजकुमार तंबोली ने संभावित गिरफ्तारी से बचने अग्रिम जमानत अर्जी लगाई थी।

कोरबा के जमनीपाली में रहने वाली बुधवारो बाई पति राम सिंह के नाम 2.19 एकड़ जमीन थी। महिला इस जमीन पर खेती करती थी, उसके कोई बच्चे नहीं थे। बुधवारो बाई के यहां किराये पर रहने वाले मानकेशर लाल ने 6 दिसंबर 1983 को महिला को दबाव में डालकर वसीयत तैयार करा लिया। बाद में राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों से मिलीभगत कर जमीन का नामांतरण खुद के नाम पर करा लिया। इसे लेकर बुधवारो बाई के एक रिश्तेदार इंद्रपाल सिंह कंवर ने जेएमएफसी कटघोरा के कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई। सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत दर्ज शिकायत में कटघोरा के तत्कालीन तहसीलदार अशोक कुमार मार्बल, राजकुमार तंबोली समेत मानकेशर लाल, पटवारी विशंभर सिंह ठाकुर, पटवारी एसके साहू समेत अन्य के नाम शामिल थे। शिकायत में बताया गया कि बुधवारो बाई आदिवासी थीं, जबकि मानकेशर लाल एसटी वर्ग से था, इस वजह से आदिवासी की जमीन का गैर आदिवासी के नाम पर नामांतरण नहीं हो सकता था, लेकिन इसकी अनदेखी करते हुए राजस्व रिकॉर्ड में मानकेशर लाल का नाम दर्ज कर लिया गया।

जेएमएफसी, कटघोरा ने 10 फरवरी 2014 को संबंधित पुलिस थाने को मामले में आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471/34 के तहत जुर्म दर्ज करने का आदेश दिया था। पुलिस ने आदेश के परिपालन में एफआईआर दर्ज की थी। इस मामले में संभावित गिरफ्तारी से बचने के लिए कटघोरा के तत्कालीन तहसीलदार और वर्तमान में बस्तर में डिप्टी कलेक्टर अशोक कुमार मार्बल तत्कालीन तहसीलदार और वर्तमान में पामगढ़ में ज्वाइंट कलेक्टर राजकुमार तंबोली ने हाई कोर्ट में जमानत अर्जी लगाई थी। जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच ने अर्जी खारिज की।

टिप्पणियाँ