दिल्ली के श्री बंगला साहिब गुरुद्वारा जहाँ धर्म, आस्था और मेडिकल टेक्नोलॉजी दोनों के साथ होता है ईलाज, विदेश से भी आते हैं लोग
- 30 रुपए में सीटी स्कैन, 50 रुपए में होता MRI
गुरुद्वारा श्री बंगला साहिब, दिल्ली। यह एक ऐसी जगह है जहां अरदास, धर्म, आस्था और मेडिकल टेक्नोलॉजी एक साथ देखी जा सकती हैं। लोगों की आस्था है कि यहां के तालाब के जल से रोग खत्म हो जाते हैं। यहां आए देश-विदेश के लोग इस जल को अपने साथ घर ले जाते हैं।
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| दिल्ली के श्री बंगला साहिब गुरुद्वारा जहाँ धर्म, आस्था और मेडिकल टेक्नोलॉजी दोनों के साथ होता है ईलाज, विदेश से भी आते हैं लोग |
गुरुद्वारे में नाममात्र कीमतों पर एडवांस मेडिकल टेक्नीक के जरिए इलाज भी किया जा रहा है। गुरुद्वारे को एडवांस डायग्नोसिस सेंटर बनाने की तैयारी चल रही है।
सुनी-सुनाई से ज्यादा जानने की उत्सुकता आज मुझे बंगला साहिब गुरुद्वारे तक ले आई। सोने के दो बड़े दरवाजों से होकर मैं अंदर दरबार साहिब पहुंचती हूं। LED और बेशुमार बड़े-बड़े झूमरों की रोशनी में दरबार साहिब की सोना जड़ी दीवारों से टकरा एक बार तो मेरी आंखें बंद हो गईं। फर्श पर मैरून, पीली, जामुनी और हरे रंग की नक्काशी है जिस पर नंगे पांव चलने से लग रहा है कि किसी मखमल पर चल रहे हैं।
मेरे सामने थड़ा साहिब (जिस स्थान पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश किया जाता है) की सेवा चल रही है। इत्र का छिड़काव हो रहा है। थड़ा साहिब को चांदी की गागर में भरे पानी और दूध से धोया जा रहा है। उसके बाद सफेद चादर और तौलियों से एकदम सुखा दिया गया। उसके ऊपर सफेद चादर बिछाई गई। कुछ गद्दे बिछाए गए। फिर गोटेदार चादरों की कई परतें। गुरु ग्रंथ साहिब के प्रकाश वाले स्थान को फूलों और कलीरों से दुल्हन की तरह सजा दिया गया।
ग्रंथी भाई रघुबीर सिंह अरदास कर रहे हैं। अरदास के बाद श्री गुरु ग्रंथ साहिब को उनके रात्रि विश्राम स्थल थड़ा साहिब तक लाया जा रहा है। सतनाम वाहेगुरु..एक ओंकार सतनाम, कर्ता पुरख, निर्मोह, निरवैर, अकाल मूरत, अजूनी सैभं से हॉल गूंज रहा है।
आगे-आगे नरसिंघा, उनके पीछे चांदी की चौब लिए सेवादार, उनके पीछे श्री गुरु ग्रंथ साहिब को किसी राजा की तरह थड़ा साहिब पर विराजा गया। उसके बाद फिर से कई चादरों की तह थड़ा साहिब पर बिछाई गई। गोटेदार चादरों की कई परतें लगाई गईं। अति महीन रीति-रिवाज और श्रद्धा से श्री गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश कर दिया गया।
ग्रंथी भाई रघुबीर सिंह का कहना है कि बंगला साहिब गुरुद्वारे में सुबह 1.50 बजे प्रकाश होता है। उससे पहले थड़ा साहिब की सेवा होती है, वस्त्रों की सेवा होती है, फिर सतगुरु जी के पावन स्वरूप का प्रकाश होता है। उसके बाद सुखमनी साहब का पाठ होता है। फिर नित नियम बाणियों का पाठ शुरू होता है। सुबह पांच बजे आसा की वार का कीर्तन होता है। फिर लगातार संगत आती रहती है और बाणी का पाठ होता रहता है।
अब सुबह के 3.50 बज चुके हैं। श्रद्धालु लगातार आ रहे हैं। गुरुद्वारा साहिब में भीड़ बढ़ती जा रही है। कुछ लोग व्हील चेयर पर भी बैठे गुरुबाणी सुन रहे हैं। दरवाजे के बाहर एक ऐसा स्थान है जहां एक विशेष जल मिल रहा है। इसी जल की खासियत जानने मैं यहां आई हूं। गुरुद्वारा कमेटी के वरिष्ठ सदस्य सुकविंदर जीती बताते हैं कि इस गुरुद्वारे में सिखों के आठवें गुरु हरकिशन जी रहते थे। यह गुरुद्वारा उनके ही नाम पर है।
गुरु हरकिशन जी का रोग दूर करने वाले जल से क्या कनेक्शन है?
इस पर सुकविंदर जीती बताते हैं कि आज दिल्ली में जिस जगह पर यह गुरुद्वारा है वो कभी राजा जयसिंह का बंगला हुआ करता था। गुरु हरकिशन जी दिल्ली प्रवास के दौरान यहां रहते थे। उस वक्त पूरे इलाके में चेचक और हैजा फैला हुआ था। लोग इस महामारी से मर रहे थे। गुरु हरकिशन जी इस बंगले के एक कुएं से ताजा पानी देकर लोगों का उपचार करने लगे। लोगों की सेवा करते-करते वो भी इस बीमारी से संक्रमित हो गए थे। इस वजह से गुरु साहिब जोती ज्योत समा गए थे यानी इंसान शरीर का त्याग कर दिया था। राजा जय सिंह ने तब इस बंगले को आठवें सिख गुरु को उनके नाम समर्पित कर दिया।
जिस कुएं के पानी से आठवें सिख हरकिशन जी बीमार लोगों का इलाज करते थे, उसके ऊपर गुरु राजा जय सिंह ने एक छोटा तालाब बनवाया।’
इस पर सुखविंदर जीती कहते हैं, ‘जगह-जगह से सिख यहां आते हैं और तालाब से पानी लेते हैं। हम इसे 'अमृत' कहते हैं। विदेश में रहने वाले सिख इसे अपने साथ ले जाकर घर के अंदर छिड़काव करते हैं।’
मुझे यहां हर धर्म के लोग देखने को मिल रहे हैं। सरोवर में मछलियां तैर रही हैं। अलग अलग कोनों में बैठे श्रद्धालु अपनी आंखें बंद किए भक्ति में लीन हैं। संगमरमर से बना गुरुद्वारा रात के अंधेरे में भी चमक रहा है। यह नजारा देखते-देखते सुबह हो गई। सुबह इसी गुरुद्वारा परिसर में दरबार साहब के सामने बने अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अब मैं अस्पताल में हूं। यहां बंगला साहब गुरुद्वारा कमेटी के सदस्य और गुरु हरकिशन पॉलिक्लिनिक, गुरुद्वारा बंगला साहिब के चेयरमैन भूपिंदर सिंह भुल्लर सुबह ही आ गए हैं।
मैं उनके कमरे में हूं तभी दिल्ली के लेडी हार्डिन अस्पताल से दो डॉक्टर आते हैं। उनमें से एक डॉक्टर जोए हैं जो नामी न्यूरो सर्जन हैं। उनका कहना है कि वह गुरुद्वारे के अस्पताल में सेवा करना चाहते हैं। वो रविवार के दिन फ्री रहते हैं, बाकी दिन दिल्ली के अलग-अलग अस्पतालों में उनकी ड्यूटी होती है। यहां सेवा देने के लिए वह एक एप्लिकेशन देते हैं और भुल्लर से बातें करने लगते हैं।
उनके जाने के बाद मैंने भुल्लर जी से पूछा कि बाकी के डॉक्टर भी ऐसे ही हैं क्या... इस पर वह मुझे एक चार्ट दिखाते हैं और कहते हैं कि यह सभी दिल्ली के वो जाने-माने डॉक्टर हैं जिनसे अपाइंटमेंट के लिए दो-दो महीने का समय मिलता है, लेकिन यहां वह सेवाभाव से सेवा करने आते हैं। यहां सेवा देने के लिए वो हमें एप्लिकेशन देकर बताते हैं कि कब वो मरीजों के लिए उपलब्ध होंगे।
फिर भुल्लर जी मुझे अस्पताल दिखाते हैं। सबसे पहले हम सीटी स्कैन, MRI और डिजिटल एक्सरे के कमरों में जाते हैं। यह सभी मशीनें एडवांस हाईटेक और दुनिया की नामी कंपनियों की हैं। चार करोड़ रुपए की सीटी स्कैन मशीन से सीटी स्कैन के मात्र 30 रुपए लिए जाते हैं। आठ करोड़ रुपए की लागत की MRI मशीन से MRI के मात्र 50 रुपए लिए जाते हैं। बीते दो साल पहले यह सुविधा शुरू हुई थी। दो साल में यहां कुल 40,000 MRI हो चुके हैं।
इसके अलावा दांत, आंख, दिल, गायनी की समस्याओं का इलाज और एडवांस डायग्नोस की सुविधा है। अगले महीने से जर्मनी से आई छह मशीनों के जरिए डायलिसिस शुरू होने जा रहा है। हार्ट विभाग में TMT, ECG जैसी सारी सुविधाएं हैं। यहीं अंदर होम्योपैथी अस्पताल भी है, एक्यूप्रेशर की सुविधा भी है। अगले कुछ दिनों में आंखों में लेंस की सुविधा शुरू हो रही है। बाहर 3000 वाले लेंस यहां 300 रुपए में डाले जाएंगे।
यहां की ब्लड टेस्ट मशीन एक घंटे में एक साथ 280 टेस्ट (हेमेटोलॉजी टेस्ट) करती है। ऐसे ही एक घंटे में एक साथ बायो केमिकल के 180 टेस्ट होते हैं। इससे भी ज्यादा अहम नवंबर से बंगला साहिब गुरुद्वारे में कैंसर डिटेक्शन की एक सुविधा शुरू होने जा रही है, जिस टेस्ट की बाहर 50,000 से 80,000 रुपए कीमत है, लेकिन कैंसर जांचने के लिए फुल बॉडी स्कैनिंग वाली इस मशीन से टेस्ट के यहां 3500 रुपए लगेंगे।
भूपिंदर भुल्लर का कहना है कि हम चाहते हैं कि कैंसर का शुरुआत में ही पता लग सके और इलाज हो सके। कोई भी कैंसर हो शुरुआत में पता लगे तो इलाज संभव है। महंगा होने की वजह से लोग इस टेस्ट को नहीं करवा पाते हैं। उनका कहना है कि भारत सरकार के एआरबी विभाग से परमिशन मिल चुकी है। पास में ही उसकी इमारत का काम चल रहा है। नवंबर से कैंसर डिटेक्शन का काम शुरू हो जाएगा। अमेरिका से आई कैंसर डिटेक्शन मशीन की कीमत 10 करोड़ रुपए है।
भुल्लर जी का कहना है कि हम गुरुद्वारा बंगला साहिब के इस अस्पताल को बेस्ट और मोस्ट एडवांस डायग्नोस सेंटर बनाना चाहते हैं। यहां इस वक्त लगभग सभी टेस्ट होते हैं। जिन टेस्ट की बाजार में 400 रुपए कीमत है वो यहां 50 से 100 रुपए में हो जाते हैं। मैमोग्राफी 700 रुपए में। दस रुपए की OPD की पर्ची बनती है, MRP से कम दाम में सभी तरह की जेनरिक हो या ब्रांडेड दवाएं मिलती हैं। अगर किसी दवा की कीमत 400 रुपए है तो वह यहां 50-100 रुपए में मिलती है।
गुरुद्वारा बंगला साहिब दिल्ली के बाकी गुरुद्वारों को कलेक्शन सेंटर के तौर पर डेवलप कर रहा है। यह सारा काम श्रद्धालुओं के डोनेशन से होता है। हर धर्म के लोग यहां इलाज करवाने आते हैं और हर धर्म के लोग डोनेशन कर रहे हैं। शायद मेरी नजर में यह सबसे सस्ता डायग्नोस सेंटर है जो गुरुद्वारा साहिब के परिसर में ही चलाया जा रहा है। डॉ. भुल्लर बताते हैं कि न्यूरो विभाग तो ऐसा है कि जहां नंबर ही नहीं आता है।
गुरुद्वारा बंगला साहिब दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के तहत आता है। कमेटी के बाकायदा चुनाव होते हैं। कमेटी का ऑफिस बंगला साहिब गुरुद्वारे के पास ही गुरुद्वारा श्री रकाबगंज में है। वहीं कमेटी सदस्य बैठते हैं। कमेटी के वरिष्ठ सदस्य सुखविंदर सिंह जीती बताते हैं कि यह गुरुद्वारा 24 घंटे खुला रहता है और यहां हर दिन 75,000 से लेकर एक लाख लोगों का लंगर बनता है। आपदा आने पर एक समय में दो-दो लाख लोगों का भी लंगर बनता है। जैसे हाल ही में यमुना किनारे रहने वालों को हर दिन गुरुद्वारे की तरफ से तीनों समय का लंगर पहुंचाया जाता था।


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