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मिलावटखोरों को खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा संरक्षण

रायपुर/ छ.ग. में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा खाद्य सामानों के मिलावटखोरों को संरक्षण देने के कारण खाद्य सामानों में भारी मिलावट हो रहा है जो कि बहुत ही गलत है। हर साल खाद्य सामानों के जांच में लगभग 2000 दो हजार प्रकरण अमानक (मिलावट) खाद्य सामान एवं असुरक्षित खाद्य सामान का बनता है जो कि बहुत ज्यादा है।


    छ.ग. के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा मिलावटखोरों के प्रकरण को जिला न्यायालय में प्रस्तुत करने के बजाय गलत ढंग से एसडीएम के न्यायालय में प्रस्तुत किया जाता है, जेल क बजाय पांच-दस हजार रूपए जुर्माना करवाने हेतु।
    छ.ग. के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा मिलावटखोरों के खाद्य लाईसेंस को रद्द या निलंबित नहीं किया जाता है मिलीभगत के कारण। शासन के नियमानुसार मिलावटखोरों के खाद्य लाईसेंस को रद्द या निलंबित होना आवश्यक है।
    मिलावटखोरों को छोटे न्यायालय में जेल की सजा नहीं मिलने पर बड़े न्यायालयों में अपील करके जेल की सजा दिलवाना चाहिए।
मिलावटखोरों को जेल की सजा नहीं दिलवाने एवं खाद्य लाईसेंस को रद्द या निलंबित नहीं करने के कारण ही छ.ग. में भारी मिलावट हो रहा है।
शासकीय कार्य में मनमानी एवं लापरवाही बरतने वाले खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई किया जाना चाहिए।
मिलावटखोरों के खिलाफ मामला बनाकर जिला न्यायालय में प्रस्तुति नहीं करने वाले खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होना आवश्यक है। छोटे न्यायालयों में मिलावटखोरों को जेल की सजा नहीं मिलने पर बड़े न्यायालय में अपील होना आवश्यक है।
प्रदेश में लगभग 40 प्रतिशत बड़े खाद्य व्यापारियों द्वारा खाद्य लाईसेंस नहीं लिया गया है एवं समय पर लाईसेंस का नवीनीकरण भी नहीं करवाया जा रहा है इनके खिलाफ प्रकरण बनाना आवश्यक है लेकिन खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा प्रकरण नहीं बनाया जा रहा है।

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