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अच्छे म्यूजिक से पौधों का विकास अच्छा, ख़राब ध्वनि उन्हें भी नहीं पसंद, वे भी करते हैं बात

1986 में ब्रिटेन के तत्कालीन राजकुमार प्रिंस चार्ल्स ने एक इंटरव्यू में कहा था कि पौधों से बात करना और उन्हें सुनना जरूरी है। उस वक्त इसका मजाक उड़ाया गया, लेकिन आज कई रिसर्च में प्रूव हो चुका है कि पौधों को भी संगीत पसंद है।


वे ध्वनि बना सकते हैं, उसे समझकर प्रतिक्रिया दे सकते हैं। दुनियाभर में 1960 के दशक से पौधों के करीब ध्वनि बजाकर कई रिसर्च हो रही हैं, लेकिन इनके परिणाम अब मिलने लगे हैं।

शोरगुल में पौधों का बढ़ना रुका

2018 में प्रकाशित एक रिसर्च में दावा किया गया कि टेलीग्राफ प्लांट (एशियाई पत्तेदार पेड़) को जब 56 दिन बौद्ध मंत्रों के संपर्क में रखा तो उसमें बड़े पत्ते उगने लगे। जब उसे पश्चिमी पॉप संगीत या एकांत में रखा तो पत्ते छोटे रहे। 2022 के एक रिसर्च पेपर में बताया गया कि व्यस्त हाईवे के शोर के संपर्क में आने वाले मैरीगोल्ड्स और सेज के पौधों का बढ़ना रुक गया।

म्यूजिक से बीजों का अंकुरण तेज हुआ

इसी तरह चीन में हुई रिसर्च बताती हैं कि ग्रीन हाउस वातावरण में जब धुनें बजाई गईं तो उससे बीजों का अंकुरण तेजी से हुआ, फसलों की पैदावार तक बढ़ी। 2023 की शुरुआत में तेल अवीव विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने बताया कि पौधों की कई प्रजातियां ऐसी हैं, जो विभिन्न तनावों के जवाब में शोर पैदा करती हैं। ये शोर इतने धीमे होते हैं कि मनुष्य इन्हें नहीं सुन सकते।

कैटरपिलर के पत्तियों को चबाने वाले कंपन को रिकॉर्ड किया गया

पौधे लाखों सालों से उन कीड़ों के साथ-साथ विकसित हो रहे हैं जो उन्हें परागित करते हैं या खाते हैं, लेकिन सवाल ये है कि क्या पौधे इन कीड़ों द्वारा निकाली जाने वाली ध्वनि तरंगों के प्रति संवेदनशील हो सकते हैं? इसका जवाब जानने के लिए ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी में वनस्पतिशास्त्री हेइडी अपेल और मिसौरी यूनिवर्सिटी के कीट विज्ञानी रेजिनाल्ड कोक्रॉफ्ट ने कैटरपिलर की कुछ प्रजातियों द्वारा पत्तियों को चबाने के दौरान होने वाले कंपन को रिकॉर्ड किया।

कंपन दूसरी पत्ती तक पहुंचने में सक्षम है

उन्होंने पाया कि ये कंपन इतने शक्तिशाली नहीं हैं कि हवा में ध्वनि तरंगें पैदा कर सकें, लेकिन यदि पत्तियां आपस में जुड़ती हैं तो कंपन दूसरी पत्ती तक पहुंचने में सक्षम है। इसे प्रमाणित करने के लिए शोधकर्ताओं ने लैब में पौधों पर कैटरपिलर छोड़े। पता चला कि जो पत्तियां खुली थीं, उनमें ग्लोकोसाइनोलेट्स और एंथोसायनिन जैसे रक्षात्मक रसायनों का स्तर काफी ज्यादा था। इसलिए कैटरपिलर उन्हें खा नहीं पाए।

पौधे इस तरह के खतरे को पहचानने और बचाव करने में सक्षम होते हैं। इनकी रिसर्च के निष्कर्ष 2014 में प्रकाशित हुए।

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