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खेलते खेलते बच्चे ने निगल ली 8 सुइयां, 2 घंटे लगे डॉक्टरों को निकलने में

पेरू से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक बच्चे ने खेलते-खेलते 8 सुइयां निगल लीं। जीं हां, 8 सुइयां। इसके बाद जैसे ही बच्चे की मां को पता चला, वह तुरंत बच्चे को अस्पताल लेकर भागी।

अस्पताल में आनन-फानन में बच्चे की सर्जरी की गई। उसके शरीर से सुइयां निकालने में डॉक्टरों को करीब 2 घंटे का समय लगा। सर्जरी थोड़ी मुश्किल थी, लेकिन बच्चे के शरीर से सुइयां निकालने में डॉक्टर सफल हो गए।


फाइल फोटो 

यह वाकया काफी गंभीर और कई जरूरी सवाल उठाने वाला है। सुइयां ऐसी जगह क्यों रखी थीं कि वह आसानी से बच्चे को मिल गईं। जाहिर है बच्चे ने कुछ समय लगाया होगा, उसे खाने में। इतनी देर तक बच्चे के आसपास कोई वयस्क मौजूद क्यों नहीं था। बच्चा अकेला खेल रहा था और कोई बड़ा उसके आसपास उस पर नजर रखने के लिए नहीं था।

चाइल्ड केयर कभी भी आसान काम नहीं था, लेकिन पिछले कुछ दशकों में हमारी लाइफ स्टाइल जिस तरह से बदली है, उसमें चाइल्ड केयर और पैरेंटिंग से जुड़ी चुनौतियां और भी गंभीर हो गई हैं। अब अक्सर माता-पिता दोनों ही वर्किंग होते हैं। डेली लाइफ के बिजी शेड्यूल में पेरेंट्स अपने बच्चों पर पूरी तरह से ध्यान नहीं दे पाते हैं। इस वजह से बच्चों की देखरेख में कहीं न कहीं भूल हो जाती है।

जरूरत की खबर में आज जानेंगे कि पेरेंट्स कैसे अपने छोटे बच्चे से लेकर 10 साल तक के बच्चों का ध्यान रखें। उनकी परवरिश में क्या सावधानियां बरतें, जिससे उनकी देखभाल अच्छे से हो और पेरु वाली घटना की तरह दुखद हादसों से बचा जा सके।

एक्सपर्ट- पेरेंटिंग कोच मेघल लेही, पेरेंटिंग एक्सपर्ट मीनू त्रिपाठी

सवाल: बच्चा अगर सूई खा ले या कुछ इस तरह का काम कर बैठे, जिससे उसे गंभीर नुकसान पहुंचे तो क्या इसके लिए जिम्मेदार बच्चे को ठहराया जा सकता है?

जवाब: यह समझने के लिए रॉकेट साइंटिस्ट होने की जरूरत नहीं है कि बच्चे और एडल्ट के बीच यदि किसी की जिम्मेदारी बनती है तो वह एडल्ट की ही है। बच्चों में इतनी समझदारी नहीं होती। यह समझदारी उम्र के साथ आती है, लेकिन उसके लिए भी पेरेंट्स ही जिम्मेदार हैं। उनका सजग और समझदार होना जरूरी है। जाहिर है कि पेरेंट्स को सुइयां या रिस्की चीजें बच्चे के आस-पास नहीं रखनी चाहिए।

सवाल: बच्चे वाले घर में पेरेंट्स किस-किस तरह की लापरवाही करते हैं?

जवाब: वर्किंग पेरेंट्स का शेड्यूल काफी बिजी रहता है। ऐसे में बच्चों को लेकर अनजाने में कई तरह की लापरवाही कर जाते हैं। जैसे-

  • बच्चे की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पहले से ही घर में सेफ्टी की कोई तैयारी नहीं करना।
  • इलेक्ट्रिकल एप्लायंस से बचाव को लेकर बच्चों को अवेयर नहीं करना।
  • बच्चे के लिए बेबीसिटर चुनते समय लापरवाही बरतना। इस बात का ध्यान न रखना कि वह प्रॉपरली ट्रेंड, सेंसिटिव और केयरिंग हो।
  • किसी दूसरे पर बच्चे की जिम्मेदारी छोड़ने से पहले घर में सीसीटीवी लगवाने की जरूरत नहीं समझना।
  • कार में ट्रेवल करते हुए बच्चे की सुरक्षा और जरूरतों का पर्याप्त इंतजाम नहीं करना। कई बार लोग बच्चों को कार में लॉक करके शॉपिंग वगैरह करने चले जाते हैं। इस वजह से कई दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं।
  • पानी, डिटर्जेंट, डिसइंफेक्टेंट जैसी खतरनाक चीजों को बच्चों की पहुंच से दूर नहीं रखना।
  • किचन में शॉर्प और आसानी से नुकसान पहुंचाने वाली चीजें खुले में छोड़ देना।

सवाल: अपने घर की प्लानिंग और डिजाइन करते समय बच्चे की सुरक्षा को देखते हुए क्या सावधानियां बरतें?

जवाब: इसे नीचे लगे क्रिएटिव से समझते हैं-

सवाल: पेरेंट्स वर्किंग हैं, क्या बेबीसिटर के पास बच्चा छोड़कर जाना सेफ है?

जवाब: अगर आपको एक विश्वसनीय और अच्छी बेबीसिटर मिल गई है तो उसके पास बच्चों को छोड़ने में कोई बुराई नहीं है। लेकिन बेहतर यही होगा कि परिवार का कोई व्यक्ति, कोई बुजुर्ग घर में मौजूद हो।बेबीसिटर जब तक पूरी तरह ट्रायड और टेस्टेड न हो, उस पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं किया जा सकता।

सवाल: बेबीसिटर चुनते समय किन बातों का ख्याल रखना चाहिए?

जवाब: अगर घर में बच्चे की देखभाल के लिए कोई नहीं है तो ऐसे चुनें बेबीसिटर…

  • बच्चे को बेबीसिटर के साथ छोड़ने के कुछ महीने पहले ही बेबीसिटर ढूंढना शुरू कर दें।
  • आसपास पूछताछ करने के अलावा ऑनलाइन विश्वसनीय एजेंसी के जरिए भी बच्चे के लिए नैनी ढूंढ सकते हैं।
  • अगर आस-पड़ोस में किसी दूसरी फैमिली ने नैनी रखी हुई है तो उसी को आप भी अपने बच्चे के लिए बुला सकते हैं।
  • कोई विश्वसनीय इंसान अगर नैनी का काम करना चाहता है तो उसे पहली प्रेफ्रेंस दें।
  • नैनी रखने से पहले उसका इंटरव्यू वगैरह करके उसे अच्छे से समझ लें।
  • नैनी का बैकग्राउंड चेक भी जरूर करवा लें। पहले जहां काम किया है वहां बात करें और पता करें कि वहां नौकरी क्यों छोड़ी।
  • नैनी या बेबीसिटर का पुलिस वेरिफिकेशन जरूर करवाएं। इस काम में आलस बिल्कुल न करें।

कई पेरेंट्स नैनी भी नहीं रखना चाहते। वो डे-केयर सेंटर प्रेफर करते हैं। 12 महीने से बड़े बच्चों को डे-केयर सेंटर में डाल सकते हैं।

सवाल: कार से ट्रैवल करते समय पेरेंट्स कई बार कुछ सामान खरीदने या काम से बच्चों को कार में छोड़कर चले जाते हैं, क्या बंद गाड़ी में बच्चे को छोड़ना सेफ है?

जवाब: नहीं ऐसा करना बिल्कुल गलत है। ये बच्चे के लिए जानलेवा भी हो सकता है। कई ऐसे मामले आ चुके हैं जिसमें बच्चे गाड़ी में लॉक हो गई है या बच्चे को गाड़ी में छोड़ने की वजह से उसकी मौत हो गई।

आजकल गाड़ियों में सेंट्रल लॉकिंग सिस्टम होता है। जिसकी वजह से बच्चे खुद गाड़ी से बाहर नहीं आ पाते। बंद गाड़ी में दम घुटने का रिस्क बढ़ जाता है। जो काफी रिस्की हो सकता है।

सवाल: छोटे बच्चों के साथ कार से ट्रैवल करते हुए किस तरह की सावधानियां बरतनी चाहिए?

जवाब: बच्चे के साथ ट्रैवलिंग के लिए कार एक कंफर्टेबल ऑप्शन है। मगर इसमें बच्चों के साथ कुछ चीजों का ध्यान रखना चाहिए…

कार के चाइल्ड सेफ्टी लॉक एक्टिवेट कर दें। बच्चे कई बार खुद ही कार का दरवाजा खोल लेते हैं।

बच्चे को गोद में बिठाकर सीट बेल्ट न लगाएं। इससे बच्चे का गला दब सकता है और दम घुट सकता है। बच्चे को अलग सीट पर बिठाकर सीट बेल्ट लगाएं।

जहां कई गाड़ियां पार्क हों, वहां बच्चों को खेलने न दें।

लंबे सफर पर जा रहे हैं तो बच्चे के सोने के लिए हेडरेस्ट या किड्स सीट लेकर जाएं।

अगर बच्चा छोटा है तो उसकी सहूलियत के लिए इन्फैन्ट कार सीट गाड़ी में लगवा सकते हैं।

पिछली सीट पर बच्चों को अकेला न छोड़ें।

सवाल: घर के खिड़की, दरवाजे बच्चों के लिए सेफ कैसे बनाएं?

जवाब: घर में छोटे बच्चे हैं तो खिड़की, दरवाजों को ऐसे सुरक्षित बना सकते हैं…

स्लाइड होने वाले दरवाजे और खिड़की न लगवाएं। इन्हें बच्चे आसानी से खिसकाकर बाहर गिर सकते हैं।

ऑटोमैटिक लॉक वाले दरवाजे बच्चों के लिए ठीक नहीं होते। इनमें बच्चे खुद को लॉक कर लेते हैं।

खिड़की-दरवाजों के पर्दों में लंबी डोरी और एक्स्ट्रा कपड़ा नहीं होना चाहिए।

खिड़की में मोटी लोहे की जाली जरूर लगवाएं।

जिस खिड़की, दरवाजे को खोलते नहीं है उसे अच्छी तरह लॉक जरूर करें।

खिड़की के पास ऐसा फर्नीचर न रखें जिस पर आसानी से चढ़ा जा सके।

सवाल: इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स से बच्चों को काफी खतरा रहता है। इसे लेकर क्या सावधानी बरतें?

जवाब: इलेक्ट्रिसिटी और इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स को लेकर ऐसे रह सकते हैं सावधान…

घर में खुला सर्किट या खुला तार नहीं होना चाहिए।

फ्रिज को लॉक करके रखें।

सेंसर वाली लाइट लगा सकते हैं। इससे बच्चों को स्विच ऑन-ऑफ करने की जरूरत नहीं होगी।

बच्चे अगर पतंग उड़ाते हैं तो ध्यान दें कि कहीं वो पावर लाइन के पास तो ऐसा नहीं करते।

अगर थोड़ी देर के लिए भी किसी इलेक्ट्रिक एप्लायंस का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, तो उसका मेन पावर बटन बंद कर दें।

इलेक्ट्रॉनिक आइटम से पानी या मेटल की चीजें दूर रखें।

पिछले कुछ सालों में मां-बाप के बीच एक ट्रेंड तेजी से बढ़ा है कि वो अपने बच्चों का मन बहलाने के लिए उन्हें कहानी या लोरियां सुनाने की जगह मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट पकड़ा देते हैं।

पेरेंट्स सोचते हैं कि हम बच्चों को पढ़ना सिखा रहे हैं। उन्हें A, B, C, D और राइम्स लगाकर मोबाइल थमा देते हैं। लेकिन वो बच्चों को गैजेट्स की लत लगा रहे होते हैं।

बच्चे इनके आदी हो जाते हैं और वर्चुअल दुनिया में खो जाते हैं, जोकि उनके लिए डेंजरस हैं।

कुछ बातें जो हमें बच्चों को बचपन से ही सिखानी चाहिए, उन्हें ट्रेंड करना चाहिए, जिससे बच्चे सही-गलत की पहचान कर सकें। उनमें यह विवेक विकसित हो सके कि उनके लिए क्या डेंजरस है और क्या सुरिक्षत। इसके लिए कुछ और पॉइंट्स को समझने की जरूरत है-

  • बच्चे को बताएं कि उन्हें कैंची, चाकू, नुकीली चीजें नहीं छूनी है। इससे चोट लग सकती है।
  • बच्चे को घर के अंदर सीढ़ियां उतरने का सही और सुरक्षित तरीका बताना चाहिए।
  • बच्चे को बताएं कि बेड पर कैसे चढ़ना है, कैसे उतरना है।
  • बच्चे को बताएं कि खाना खाने से पहले हाथ धोना क्यों जरूरी है। यह कीटाणुओं से बचाव करता है।
  • बच्चे को बताएं कि इलेक्ट्रिक सामानों को न छुए। उससे करंट लग सकता है।
  • बच्चे को अनजान व्यक्ति द्वारा दिए गए सामान को खाने से मना करें और उसके बताएं कि उसके साथ बच्चा कहीं न जाए।
  • बच्चा चाहे लड़का हो या लड़की दोनों को ही गुड और बैड टच के बारे में बताना।
  • हमें बच्चों में हर चीज को लेकर सुरक्षा और असुरक्षा का बोध पैदा करना चाहिए।
  • मार्केट में कई किताबें मौजूद हैं, जिनसे आप अपने बच्चे को अच्छी ट्रेनिंग दे सकते हैं। जैसे-
  • पंचतंत्र की 101 कहानियां

दादी अम्मा कहें कहानी

Board Book: Safe at Home (Let's be Safe)

The Book of Good Habits for Kids

Activity Book Good Habit

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