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इंदौर की ये मूंग भजिए है बहुत प्रसिद्ध, 41 साल का है फैमिली बिजनेस

 


इंदौर।स्वच्छता की राजधानी इंदौर में खान-पान की इतनी वैरायटी है कि आप खाते-खाते थक जाएंगे, लेकिन खाने के आइटम खत्म नहीं होंगे। बस इसी कारण से इंदौर को जायके की राजधानी भी कहा जाता है। कड़ाके की सर्दी हो या बरसात का मौसम गरमा-गरम भजिए मिल जाएं तो क्या कहना।

यूं तो इंदौर में मूंग के भजिए बारह महीने मिलते हैं, लेकिन बारिश और सर्दी में इनकी डिमांड दो से तीन गुना बढ़ जाती है। पोहे-जलेबी से शहर को देशभर में पहचान मिलने के बाद इंदौरी मूंग दाल के भजिए अपनी महक बिखेर रहे हैं। वैसे तो शहर के हर कोने में मूंग के भजिए मिलते हैं, लेकिन आज जायके में बात करेंगे 41 वर्षों से एलआईजी चौराहे के नजदीक मिलने वाले श्री महालक्ष्मी मूंग भजिए की।

ये अपने अनोखे और सबसे पुराने स्वाद के लिए इंदौर ही नहीं आसपास के शहरों में भी मशहूर है। दुकान संचालक जितेंद्र कुशवाहा बताते हैं कि हमारे मूंग दाल के भजिए खाने से जुकाम और कब्ज जैसी समस्या दूर हो जाएगी। इसका कारण है इसमें डाले गए खड़े गरम मसालों का कॉम्बीनेशन।

इंदौर में चार जगह मिलते हैं श्री महालक्ष्मी के भजिए

जितेंद्र बताते हैं कि जब हमारी दुकान सीएचएल से हट कर एलआईजी चौराहे के पास लगने लगी तो ग्राहकों की भीड़ और डिमांड पहले से ज्यादा बढ़ गई। तब बड़े भाई रमेश कुशवाहा ने सत्य सांई के पास गुमटी में इसे शुरू कर दिया। इसके अलावा हमारे भतीजे बंगाली चौराहा और पिपल्यहाना चौराहे पर भी गुमटी लगाते हैं। एलआईजी चौराहे वाली दुकान पर बारिश और ठंड के दिनों में 70 से 80 किलो दाल के भजिए बिक जाते हैं। बहुत से ऐसे भी ग्राहक हैं, जो 25-30 सालों से यहां पर गरमा-गरम मूंग भजिए का लुत्फ उठाने आ रहे हैं।

दोपहर दो से रात 11 बजे तक खुली रहती है दुकान

दूसरी पीढ़ी के तौर पर दुकान संभाल रहे जितेंद्र कुशवाहा के बेटे आयुष बताते हैं कि दोपहर दो से रात 11 बजे तक दुकान खुली रहती है। वैसे तो दुकान पर दिनभर ग्राहक आते हैं, लेकिन विशेष रूप से रात में भीड़ ज्यादा रहती है। इंदौर के कई बड़े नेता भी हमारे भजिए के फैन हैं। हमारे गरमा-गरम भजिए के लिए लोग इंतजार भी करते हैं। वहीं कई लोग पैक कराकर घर और दफ्तर में ले जाते हैं। लोग हमारे भजिए के इस कदर दीवाने हैं कि वे कई किलो की मात्रा में मसाले, दाल या कच्चे भजिए पैक करवा कर दूसरे शहरों में ले जाते हैं। कई ग्राहक ऐसे हैं जो दिल्ली, मुंबई और आसपास के शहरों में ले जाते हैं।

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