अंतरिक्ष में UAE के एस्ट्रोनॉट द्वारा ब्रेड और शहद खाते हुए विडियो वायरल हुआ, शहद गोल शेप में बदल गया
अंतरिक्ष में जाने के बाद एस्ट्रोनॉट्स क्या और कैसे खाते हैं, इसका एक दिलचस्प वीडियो सामने आया है। UAE से स्पेस में जाने वाले शुरुआती 2 एस्ट्रोनॉट्स में शुमार नियादी इस वक्त 6 महीने के स्पेस मिशन पर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन गए हुए हैं। वहीं से उन्होंने यह वीडियो जारी किया है। इसमें वो एक शहद की बोतल खोलकर उससे ब्रेड पर शहद लगाते दिख रहे हैं। इस दौरान वो बोतल को उल्टा करने की बजाय सीधा ही रखते हैं, क्योंकि अंतरिक्ष में ग्रैविटी नहीं होती।
जीरो ग्रैविटी की वजह से नहीं गिरा शहद
इसकी वजह से शहद नीचे गिरने की तरफ ऊपर की ओर निकलता है। ब्रेड पर लगने के बाद शहद एक बॉल का आकार ले लेता है। पूरे वीडियो में वो कई बार ब्रेड या फिर शहद की बोतल को हवा में छोड़ते भी नजर आते हैं, जो उसी क्षेत्र में तैरता रहता है। अल-नियादी का ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। लोग इस पर लगातार कमेंट भी कर रहे हैं।
एक यूजर ने लिखा- ये बहुत दिलचस्प है कि कैसे ब्रेड पर लगने के बाद शहद एक बॉल का आकार ले लेता है। एक अन्य यूजर ने कहा- इस वीडियो को देखकर मुझे समझ आया कि मैं अंतरिक्ष में कहीं भी अपने खाने को छोड़ सकता हूं, जो बहुत कूल है। इसके बाद एक यूजर ने लिखा- मुझे अंतरिक्ष में खाना खाने में सालों लग जाएंगे, क्योंकि मैं पूरे समय इससे खेलता ही रहूंगा।
इसके अलावा अल-नियादी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से कई वीडियो शेयर किए हैं। इसमें से एक में वो स्पेस फार्मिंग दिखाते और इससे जुड़ी जानकारी देते भी नजर आ रहे हैं।
कड़ी ट्रेनिंग के बाद स्पेस में जाते हैं एस्ट्रोनॉट्स
अंतरिक्ष में जाने से पहले एस्ट्रोनॉट्स की ट्रेनिंग के बारे में बात करते हुए स्पेस ग्रुप ऑफ कंपनीज के फाउंडर और चेयरमैन सचिन भांबा ने बताया कि स्पेस में जाने के बाद गुरुत्वाकर्षण महसूस नहीं होता और बॉडी रोटेट होती रहती है, ऐसे में दिमाग को इस बात के लिए तैयार करना होता है।
दिमाग को सिखाया जाता है कि स्पेस में जाने के बाद वो पेट को ग्रैविटेशनल फोर्स फील नहीं होने का सिग्नल न दें, जिससे उल्टी जैसा फील नहीं होता। इसके लिए एस्ट्रोनॉट्स को कई-कई घंटे मशीनों में गोल-गोल घुमाया जाता है। ये ट्रेनिंग के सबसे अहम हिस्सों में से एक है।
सुनीता विलियम्स ने वीडियो में दिखाई थी स्पेस लाइफ
इससे पहले अपनी स्पेस लाइफ के बारे में बात करते हुए 2016 में भारतीय मूल की एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स ने बताया था- स्पेस स्टेशन भी एक घर जैसा होता है। यहां सोने के लिए स्लीपिंग बूथ बने होते हैं। इस रूम में अंतरिक्ष यात्री अपनी किताबें, लैपटॉप, कपड़े रखते हैं, क्योंकि यही उनका छोटा ऑफिस होता है।
सोने के लिए खुद को एक स्लीपिंग बैग के अंदर पैक करना पड़ता है, ताकि एस्ट्रोनॉट्स रात में किसी दूसरी जगह न पहुंच जाएं। इसके लिए उन्हें खुद को एक बेल्ट से भी बांधना पड़ता है। सुनीता ने वीडियो के जरिए बताया था कि ब्रश करते वक्त पानी के लिए वो एक किट का इस्तेमाल करते हैं। इससे पानी की बूंद बाहर निकलते ही बॉल का आकार ले लेती है और हवा में तैरने लगती है। इसी दौरान एस्ट्रोनॉट्स को इन वाटर ड्रॉप्स को पीना होता है।
सुबह ब्रेकफस्ट के लिए यहां भी घर की तरह एक किचन मिलता है, जहां खाने की सारी चीजें डिहाइड्रेटेड फॉर्म में होती हैं। खाने में अंडे, मीट, सब्जियां, ब्रेड, स्नैक्स जैसी सभी वैराइटी मिलेगी। आमतौर पर यह स्पेशल खाना अमेरिका में बना होता है, लेकिन स्पेस स्टेशन में जापान और रूस के बने फूड भी मौजूद होते हैं।


टिप्पणियाँ